जीएसटी को पटरी से उतार सकता है सीएसटी मुद्दा : राज्य

Last Updated: Wednesday, July 11, 2012 - 20:58

नई दिल्ली: राज्यों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा है कि केन्द्रीय बिक्री कर की दर में कमी से राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई को केंद्र के इनकार से वस्तु एवं सेवा कर की शुरआत पटरी से उतर सकती है।
राज्यों के वित्तमंत्रियों की अधिकारसंपन्न समिति के चेयरमैन सुशील कुमार मोदी ने इस बारे में प्रधानमंत्री सिंह को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है, अगर केन्द्र सरकार जीएसटी की शुरआत तक सीएसटी मुआवजा नहीं देती है तो राज्यों को राजस्व में अच्छा खासा नुकसान होगा और फिर वे कर क्षेत्र में ऐसे कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं जो कि शायद कर सुधारों के हित में नहीं हों।
मोदी ने इस बारे में प्रधानमंत्री के साथ बैठक की मांग की है। प्रधानमंत्री के पास इस समय वित्त मंत्रालय का प्रभार है। मोदी ने कहा है कि 2010-11 के बाद सीएसटी दर में कटौती पर राज्यों को मुआवजा नहीं देने के केंद्र के एकतरफा फैसले का देश में जीएसटी की शुरआत सहित अन्य कर सुधारों की प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे सीएसटी मुआवजे से जुड़े फैसले पर पुनर्विचार करें।
केंद्रीय ब्रिकी कर (सीएसटी) की वसूली केंद्र करता है और यह राज्यों में बांटा जाता है। जीएसटी की शुरुआत की तैयारियों के सिलसिले में अप्रैल 2007 में केन्द्र और राज्यों ने मिलकर तीन साल की अवधि में सीएसटी को समाप्त करने का समझौता किया था। इस दौरान हर साल सीएसटी की दर एक-एक प्रतिशत घटाकर इसे पूरी तरह समाप्त किया जाना था। केन्द्र राज्यों को 2010-11 तक इसकी भरपाई कर चुका है।
मोदी ने कहा कि जब यह तय हुआ था कि सीएसटी समाप्त किया जायेगा तब यह मान लिया गया था कि अप्रैल 2010 से जीएसटी अमल में आ जायेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक संसदीय समिति जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक पर विचार कर रही है। (एजेंसी)



First Published: Wednesday, July 11, 2012 - 20:58


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