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रेल सिग्नल प्रणाली आधुनिक करने पर जोर

Wednesday, March 14, 2012, 09:56
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नई दिल्ली:  रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने बुधवार को रेल बजट पेश करते हुए उन्नत प्रौद्योगिकी के साथ सिग्नल प्रणाली के आधुनिकीकरण की घोषणा की। त्रिवेदी ने कहा कि वर्ष 2014 तक 700 से अधिक स्टेशनों पर पैनल/रूट रिले इंटरलॉकिंग प्रणाली मुहैया करानी है। इस तरह 6,200 स्टेशनों में से 5,500 में यह कार्य पूरा हो जाएगा। त्रिवेदी ने कहा कि पहले से ही इंटरलॉकिंग प्रणाली से सुसज्जित 10,000 समपारों के अलावा 1,500 अतिरिक्त समपारों को इंटरलॉकिंग प्रणाली से सुसज्जित करना है, जिससे बिना इन्टरलॉकिंग वाले समपारों की संख्या 350 रह जाएगी।
 
रेल मंत्री ने कहा कि पहचाने गए 6,200 स्टेशनों में से 1,250 स्टेशनों का पूर्णरूपेण ट्रैक सर्किटिंग करना है, 3,000 अतिरिक्त स्टेशनों पर एक्सल काउंटरों की स्थापना और शेष 625 स्टेशनों पर आइसोलेशन की व्यवस्था की जानी है।
 
त्रिवेदी ने यह भी कहा कि गाड़ी सुरक्षा चेतावनी प्रणाली (टीपीडब्ल्यूएस) की व्यवस्था इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण साबित होगी। यह प्रणाली गाड़ी चालक द्वारा खतरे के सिग्नल की अनदेखी करने की स्थिति में स्वत: ब्रेक सुनिश्चित कराती है, जिससे गाड़ियों की टकराने की सम्भावना समाप्त हो जाएगी।
 
प्रारम्भ में यह प्रणाली 3,000 किलोमीटर से अधिक लम्बे मार्गो पर लगाने का प्रस्ताव है। इससे भारतीय रेलवे का सम्पूर्ण ऑटोमैटिक सिग्नलिंग वाला क्षेत्र इसके अंतर्गत आ जाएगा। इस प्रौद्योगिकी का भारतीय स्थितियों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
 
रेल मंत्री ने कहा कि आरडीएसओ द्वारा विभिन्न प्रौद्योगिकियों की खूबियों को मिलाकर टीसीएएस (ट्रेन कोलिजन अवायडेंस सिस्टम) का विकास करने के प्रयास जारी रहेंगे। यात्री गाड़ियों की गति बढ़ाकर 160 किलोमीटर प्रतिघंटा करने के लिए यह एक पूर्व शर्त होगी।
 
आगामी 5 वर्षो में सिग्नल एवं दूरसंचार सम्बंधी विभिन्न कार्यो की लागत 39,110 करोड़ रुपये आकी गई है। इसके लिए 2012-13 में 2002 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है, जो अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। (एजेंसी)


First Published: Wednesday, March 14, 2012, 15:28

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