रणजी फाइनल में 5वीं बार खेलेंगे तेंदुलकर

Last Updated: Monday, January 21, 2013 - 17:30

नई दिल्ली : सचिन तेंदुलकर ने जब से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया तब से मुंबई भले ही 11वीं बार रणजी ट्राफी फाइनल में पहुंचने में सफल रहा है लेकिन यह स्टार बल्लेबाज केवल पांचवीं बार राष्ट्रीय क्रिकेट चैंपियनशिप का खिताबी मुकाबला खेलेगा। मुंबई ने सोमवार को यहां सेना को पहली पारी के आधार पर हराकर 44वीं बार फाइनल में प्रवेश किया जहां उसका मुकाबला 26 जनवरी से सौराष्ट्र से होगा।
तेंदुलकर पहले ही इस मैच में खेलने की पुष्टि कर चुके हैं ताकि आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला से पहले उन्हें मैच अ5यास का पर्याप्त अवसर मिल सके। तेंदुलकर का यह पांचवां रणजी फाइनल होगा। इससे पहले उन्होंने मुंबई की तरफ से जिन चार फाइनल में भाग लिया है उनमें से तीन में उनकी टीम ने खिताब जीता जबकि एक मैच में उसे हार मिली थी। तेंदुलकर ने इन चार मैचों की आठ पारियों में 75 . 25 की औसत से 602 रन बनाये हैं जिसमें तीन शतक और दो अर्धशतक शामिल हैं।
इस स्टार बल्लेबाज ने अपना पहला रणजी फाइनल 1991 में हरियाणा के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में खेला था जिसमें उन्होंने पहली पारी में 42 और दूसरी पारी में 96 रन बनाये थे। तेंदुलकर शतक से चूक गये और कपिल देव की अगुवाई वाली हरियाणा की टीम यह मैच दो रन के मामूली अंतर से जीतकर रणजी चैंपियन बन गई थी।
इसके बाद 1995 में जब तेंदुलकर रणजी फाइनल खेलने के लिये उतरे तो वह मुंबई की अगुवाई कर रहे थे। पंजाब के खिलाफ अपने घरेलू मैदान वानखेड़े में खेले गये इस मैच में इस स्टार बल्लेबाज ने दोनों पारियों में शतक (140 और 139 रन) बनाए थे। मुंबई इस मैच में पहली पारी के आधार पर विजेता रहा था।
इसके बाद 2009 में भी तेंदुलकर ने रणजी फाइनल में हिस्सा लिया था। बीसीसीआई ने उस वर्ष नाकआउट के मैच तटस्थ स्थानों पर करवाने का फैसला किया था और इसलिए मुंबई और उत्तर प्रदेश के बीच फाइनल मैच हैदराबाद के उप्पल स्टेडियम में खेला गया। मुंबई ने 243 रन के विशाल अंतर से जीत दर्ज की लेकिन तेंदुलकर इस मैच में खास प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। वर्तमान में भारतीय तेज गेंदबाजी की नयी सनसनी भुवनेश्वर कुमार ने तब उन्हें पहली पारी में खाता भी नहीं खोलने दिया था।
तेंदुलकर दूसरी पारी में सातवें स्थान पर बल्लेबाजी के लिए आए और केवल चार रन बना पाए थे। उस मैच में अधिक दर्शक नहीं पहुंचे थे और तेंदुलकर के कहने पर ही बीसीसीआई ने उसके बाद नाकआउट के मैच तटस्थ स्थानों पर नहीं करवाए। अब तेंदुलकर सौराष्ट्र के खिलाफ फाइनल में खेलने के लिये उतरेंगे जिसके खिलाफ मुंबई का पलड़ा हमेशा भारी रहा है।
इन दोनों टीमों का इससे पहले रणजी ट्राफी में 51 बार आमना सामना हुआ है।
इनमें से 26 मैच में मुंबई ने जीत दर्ज की जबकि 20 में उसने पहली पारी में बढ़त हासिल की। एक मैच का परिणाम नहीं निकल पाया जबकि सौराष्ट्र ने बाकी चार मैच में पहली पारी में बढ़त हासिल की थी। इन दोनों टीमों के बीच इस सत्र में भी राजकोट में लीग मैच खेला गया था जिसमें मुंबई ने पहली पारी में बढ़त हासिल की थी। (एजेंसी)



First Published: Monday, January 21, 2013 - 17:30


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