भारत में फॉर्मूला वन का रोमांच

जब भी रफ्तार की बात होती है तो पूरे शरीर में सनसनी फैल जाती है और मन उत्साह से भर जाता है। चाहे हाई स्पीड ट्रेन की बात हो, आसमान में पक्षियों की भांति हवाई जहाज का उड़ना या बादलों के बीच रॉकेटों को धुआं छोड़ते हुए तेज गति से आगे बढ़ते हुए देखना, दिल को बहुत भाता है।

रामानुज सिंह

जब भी रफ्तार की बात होती है तो पूरे शरीर में सनसनी फैल जाती है और मन उत्साह से भर जाता है। चाहे हाई स्पीड ट्रेन की बात हो, आसमान में पक्षियों की भांति हवाई जहाज का उड़ना या बादलों के बीच रॉकेटों को धुआं छोड़ते हुए तेज गति से आगे बढ़ते हुए देखना, दिल को बहुत भाता है।

 

उसी तरह खेल में रफ्तार की बात आती है तो जेहन में सबसे पहले कार रेस आती है और उस रफ्तार को देखने से लिए मन मचल उठता है, तब अपने मन की चाहत को शांत करने के लिए टीवी ही सहारा होता है। लेकिन अब भारतवासियों को जो विदेश जाकर इस रेस को देखने में असमर्थ थे वो इस रफ्तार को अपने देश में अपनी आंखों से देख सकते हैं।

 

जी हां, 28 अक्टूबर से ग्रेटर नोएडा में देश की पहली फॉर्मूला वन रेस (एफ-1) होने जा रही है। इस रेस के लिए नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर दुनिया का सबसे तेज ट्रैक बनाया गया है। ट्रैक का डिजाइन मशहूर फॉर्मूला वन डिजाइनर हरमन तिल्के ने तैयार किया है। ट्रैक पर 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फॉर्मूला वन कारें दौड़ सकती हैं। 1900 एकड़ में फैले इस सर्किट में ट्रैक की लंबाई 5.14 किलोमीटर रखी गई है। जिसमें कुल 16 मोड़ हैं। इस रेसकोर्स में करीब दो लाख दर्शकों की क्षमता है।

 

इस फॉर्मूला वन रेस में दुनिया भर की 12 टीमें हिस्सा ले रही हैं. इन टीमों के नाम हैं रेड बुल, फेरारी, फोर्स इंडिया, मैक्लॉरेन, मर्सिडीज, रेनॉल्ट, साउबेर, टोरो रोसो, वर्जिन, विलियम्स, हिस्पेनिया और टीम लोटस।

 

विश्व की नंबर एक टीम रेड बुल है जिसके ड्राइवर विश्व चैंपियन सेबेस्टियन वेट्टेल(जर्मनी) व मार्क वेबर (ऑस्ट्रेलिया) हैं। इसी तरह फेरारी के ड्राइवर फर्नांडो अलोंसो (स्पेन) और फेलिप मासा (ब्राजील) हैं। भारत की पहली फॉर्मूला वन टीम फोर्स इंडिया, जिसे मशहूर उध्योगपति विजय माल्या ने 2007 में स्पाइकर को खरीद कर फोर्स इंडिया नाम दिया। जिसमें हाल ही में सहारा के शामिल होने से टीम का नाम सहारा फोर्स इंडिया कर दिया गया है। इस टीम के ड्राइवर एड्रियन सुतिल (जर्मनी), पॉल डि रेस्टा (ग्रेट ब्रिटेन) हैं। मैक्लॉरेन एफ वन में सबसे ज्यादा आठ बार विश्व खिताब जीतने वाली टीम है, जिसके ड्राइवर लुइस हेमिल्टन (ग्रेट ब्रिटेन), जेनसन बटन(ग्रेट ब्रिटेन) हैं। मर्सिडीज ऐसी टीम है जिसके पास मशहूर ड्राइवर माइकल शूमाकर (जर्मनी) है जिन्होंने सात बार विश्व चैंपियन का खिताब हासिल किया। इनके अलावा निको रोजबर्ग (जर्मनी) टीम के ड्राइवर हैं। रेनॉल्ट के ड्राइवर विताली पेट्रोव (रूस), निक हेडफील्ड (जर्मनी) हैं। साउबेर के पास कामुई कोबायाशी (जापान), सर्गियो पेरेज (मेक्सिको) और पेड्रो डे ला रोसा (स्पेन) ड्राइवर हैं। टोरो रोसो टीम से पास जैमी एल्गुयरसुआरी (स्पेन), सेबेस्टियन ब्यूमी (स्विट्जरलैंड) ड्राइवर हैं। वर्जिन टीम के ड्राइवर जेरोमी डी एंब्रोसियो (बेल्जियम), टिमो ग्लॉक (जर्मनी) हैं। विलियम्स टीम में रूबेन बारचेली (ब्राजील), पैस्टोर मैलडोनाडो (वेनेजुएला) ड्राइवर हैं। हिस्पेनिया टीम के साथ भारत के पहले फॉर्मूला वन ड्राइवर नारायण कार्तिकेयन जुड़े हैं। इनके अलावे इस टीम में विटानटोनिया ल्यूजी (इटली), डेनियल रिकार्डो ड्राइवर हैं। पिछले सीजन में करुण चंडोक भी इसी टीम के साथ थे। लेकिन इस सीजन में करुण चंडोक टीम लोटस के साथ जुड़ गए हैं।

 

नोएडा में होने वाले इस रेस में करोड़ों भारतवासियों की उम्मीद नारायण कार्तिकेयन और करुण चंडोक से होगी, साथ ही भारत की पहली फॉर्मूला वन टीम फोर्स इंडिया को भी जीतते देखना अच्छा लगेगा।

 

रेस के आयोजन के लिए जेपी ग्रुप ने रेसकोर्स के निर्माण पर 1500 करोड़ रुपए खर्च किए। इसके लिए जेपी ग्रुप को 10 साल तक फॉर्मूला वन रेस कराने की मेजबानी दी गई है।

 

इस रेस के प्रायोजक बनने के लिए कंपनियों में होड़ लग गईं हैं। एयरटेल ने 240 करोड़ रुपए खर्च किए, जबकि अन्य प्रायोजकों में फोर्स इंडिया व यूवी ग्रुप के मालिक विजय माल्या, मुकेश अंबानी, महिंद्रा, हीरो मोटो कॉर्प, सहारा जैसे दिग्गज शामिल हैं।

 

भारत में पहली बार 1997 में कोलकाता में एफ-1 रेस कराने की योजना बनाई गई थी लेकिन 2003 में करार पर हस्ताक्षर हुआ और 2007 में हैदराबाद में इस रेस को होना तय हुआ था बाद में स्थगित हो गया। फिर 2009 में गुड़गांव में होने वाला था, पर इसे ग्रेटर नोएडा शिफ्ट कर दिया गया। यहां यह रेस 2010 में होनी थी लेकिन अब 28 अक्टूबर 2011 से शुरू हो रही है।

 

फॉर्मूला वन सबसे महंगा खेल है जो आम लोगों के बजट से बाहर है। प्रत्येक टीम का सालाना बजट 400 मिलियन डॉलर यानी 19 अरब रुपए से भी ज्यादा है। लेकिन कमाई के हिसाब से भी यह खेल कई खेलों से बहुत आगे है। हर साल एफ-1 से 4 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा की कमाई होती है।

 

लोकप्रियता की बात करें तो भारत का सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट फॉर्मूला वन के सामने कहीं नहीं ठहरता। 2010 में करीब 60 करोड़ लोगों ने एफ-1 रेस को टीवी पर देखा जबकि भारत और श्रीलंका के बीच 2011 में हुए वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में दर्शकों की संख्या सिर्फ सात करोड़ के करीब थी।

 

क्रिकेट के देश में रफ्तार को रोमांच कम नहीं है। लोगों में फॉर्मूला वन का जुनून सिर चढ़कर बोलने लगा है। जिसके चलते एफ-1 की सबसे सस्ती टिकट 2,500 रुपए की है, सभी टिकटें बिक्री शुरू होने के पहले दिन कुछ ही घंटों में बिक गईं। ग्रैंड स्टैंड की टिकट की कीमत 35,000 है। कॉरपॉरेट बॉक्स की टिकट 35 लाख से एक करोड़ तक बिक रही हैं। इतनी महंगी होने के बावजूद भी टिकटों की बिक्री धड़ल्ले के जारी है।

 

टिकटें सीमित होने को कारण, हो सकता है आपको टिकट उपलब्ध न हो सके। पर चिंता की कोई बात नहीं, आप रेस का लुत्फ टीवी पर उठा सकते हैं। इस साल एफ-1 रेस के प्रसारण का अधिकार बीबीसी और स्काई स्पोर्ट्स ने मिलकर खरीदे हैं।

 

देश-विदेश से आने वाले फॉर्मूला वन रेस के दर्शकों के लिए मनोरंजन का भी भरपूर इंतजाम किया गया है। 28 अक्टूबर को गुड़गांव में मशहूर पॉप सिंगर लेडी गागा अपनी प्रस्तुति देंगी और साथ में रॉकबैंड मैटेलिका भी होगा। इसके अलावे कई रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 

 

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