हमाम में सब नंगे हैं

Last Updated: Friday, January 4, 2013 - 17:26

वासिंद्र मिश्र
हमाम में सब नंगे हैं- ये कहावत सियासी लोगों के बारे में समय-समय पर पढ़ने और सुनने को मिलती रही हैं। दिल्ली में हुई बहुचर्चित गैंग-रेप की घटना और उसके बाद नेताओं के बयानों पर बारीकी से नज़र डालने पर ये बात साबित भी हो जाती है। ताजा मामला संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान से उठे बवंडर, उसके बाद संघ प्रवक्ता राम माधव की सफाई, बीजेपी की लीपापोती और कांग्रेस पार्टी की राजनैतिक लाभ उठाने की कोशिश से ज़ाहिर हो जाती है।
दरअसल, संघ परिवार जिस संस्कृति की वकालत करता है उसका उद्गम वेदों से है। वेदों में लिखा है, `यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवता` इसका मतलब बिल्कुल साफ है कि अगर आप ईश्वरीय शक्ति में विश्वास रखते हैं तो उसकी आधारशिला ही नारी है। एक और चर्चित श्लोक है-
` न गृहम् गृह मित्याहु, गृहिणी गृह उच्यते,
गृहम् गृहिणी हीनम, अरण्य सदृशम मतम`
मतलब उस घर को घर नहीं कहा जा सकता जहां गृहिणी ना हो, जिस घर में गृहिणी नहीं होती वो घर जंगल के समान होता है। ऐसा लगता है कि संघ प्रमुख को भारत और इंडिया की व्याख्या करते समय हिंदू धर्म और वेदों में नारी के बारे में कही गई बातों का ध्यान नहीं रहा होगा। स्त्री-पुरुष समानता की बातें डॉ. राम मनोहर लोहिया से लेकर गांधी-नेहरू तक कहते रहे हैं लेकिन उनका नाम लेकर राजनीति करने वाले सियासतदान ही समय-समय पर महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करने से बाज़ नहीं आते। सच्चाई तो ये है कि बौद्धिक, वैचारिक और राजनैतिक धरातल पर भले ही नेताओं की अलग-अलग राय देखने को मिलती हो लेकिन मानव समाज की आधी आबादी के प्रति नज़रिया सबका लगभग समान है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान दिए गए बयानों पर नज़र डालें तो स्थिति और भी साफ हो जाती है मसलन-
-बलात्कार एक मामूली घटना है और इससे बचने के लिए घरों के अंदर रहें- वी.सत्यनारायण, आंध्रप्रदेश कांग्रेस के प्रमुख
-50 करोड़ की गर्लफ्रेंड - नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री
-पुरानी पत्नियों में वो बात नहीं रह जाती - श्रीप्रकाश जायसवाल, केंद्रीय कोयला मंत्री
-लड़कियों को मोबाइल फोन की ज़रूरत नहीं होती - राजपाल सैनी, बीएसपी विधायक, उत्तर प्रदेश
-बलात्कार रोकना है तो लड़कियों की शादी जल्दी कर दो - ओम प्रकाश चौटाला, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री
स्मृति ईरानी ठुमके वाली है - संजय निरुपम, कांग्रेस नेता
उक्त बयानों से जाहिर है कि हमारे देश के राजनेता चर्चित बलात्कार कांड के बाद देश भर में पैदा हुए आम लोगों के आक्रोश को दबाने और आम जनता को भटकाने की कवायद तेज कर चुके हैं। इस मसले पर जितनी जल्दी और जितनी आक्रामकता के साथ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच जुगलबंदी और प्रतिक्रिया देखने को मिली है उससे लगता है कि हमाम में सब नंगे हैं का मुहावरा इनपर बहुत सटीक बैठता है।
(लेखक ज़ी न्यूज़ उत्तर प्रदेश के संपादक हैं)



First Published: Friday, January 4, 2013 - 17:26


comments powered by Disqus