इजराइल के विश्वविद्यालय में टैगोर की प्रतिमा का अनावरण

इस्राइल के प्रतिष्ठित हिब्रू विश्वविद्यालय में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के अवसर पर उनकी आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया गया।

यरूशलम : इस्राइल के प्रतिष्ठित हिब्रू विश्वविद्यालय में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 150वीं जयंती के अवसर पर उनकी आवक्ष प्रतिमा का अनावरण किया गया। टैगोर की कविताओं और लघु कहानियों ने इस्राइलियों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
इस आवक्ष को विश्वविद्यालय के जोसेफ और सेल माजेर गार्डन में मानविकी संकाय के पास स्थापित किया गया है। इसी संकाय के तहत एशियाई अध्ययन विभाग आता है।
इस आवक्ष प्रतिमा को प्रख्यात शिल्पकार रामकिंकर बैज ने बनाया है और इसे भारतीय सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा मुहैया कराया गया है। प्रतिमा का अनावरण करते हुए पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि टैगोर का सम्मान करने के लिए हिब्रू विश्वविद्यालय सही स्थान है।
सहाय ने कहा, इस विश्वविद्यालय में समृद्ध एशियाई अध्ययन विभाग है जिसकी उत्कृष्ट विद्वता में गहरी जड़ें हैं। यह टैगोर प्रतिमा के लिए सही स्थान है। मंत्री ने कहा, मैं शैक्षणिक छात्रवृत्ति की इस उच्च परंपरा को बरकरार रखने के लिए विश्वविद्यालय को बधाई देता हूं। हमारे संबंध पिछले बीस वषरें में मजबूत हुए हैं तथा पर्यटन मंत्री के रूप में मेरा लक्ष्य जनता के बीच संपर्क कायम करना है ताकि हम एक दूसरे को बेहतर तरह से समझ सकें।
विख्यात भारतविद प्रोफेसर डेविड शुल्मैन ने आवक्ष अनावरण समारोह में कहा, एक चित्रकार, एक संगीतकार, महान कवि, कहानी लेखक, उपन्यासकार और एक शिक्षाविद शांति का प्रचार करने वाले व्यक्ति जिनकी उपस्थिति हिब्रू संस्कृति के शुरूआती वर्षों में राज्य की स्थापना से पहले भी थी।
शुल्मैन ने कहा, मुझे याद है कि 1960 के दशक में जब मैं एक युवक के तौर पर इस्राइल आया था, मैंने देखा कि लोग पूह शालेव तोरेन द्वारा अनुदित टैगोर की कहानियों की छोटी पुस्तकें रखते थे। लोग उन्हें अपनी जेब में रखकर ले जाते थे। टैगोर की यहां काफी उपस्थिति है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि उनके छात्रों में से कोई एक दिन टैगोर की मूल रचना को बांग्ला से हिब्रू में अनुवाद करेगा।
इस्राइल के विदेश मंत्रालय में उप महानिदेशक रूथ कहानोव ने कहा, मैं उन युवा छात्रों में हुआ करती थी जो टैगोर की छोटी पुस्तिकाएं अपने साथ ले जाया करती थी।’’ उन्होंने टैगोर के शब्दों को दोहराया कि मित्रता की गहराई जान पहचान की लंबाई पर निर्भर नहीं करती। उन्होंने इस अवसर पर पिछले बीस वर्ष में भारत इस्राइल संबंधों में मजबूती आने पर भी जोर दिया।
इस साल भारत-इस्राइल राजनयिक संबंधों के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। भारत ने 1992 में इस्राइल के साथ औपचारिक रूप से अपने संबंध कायम किये थे। कहानोव ने कहा, दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध केवल 20 साल पुराने है लेकिन ऐसा लगता है कि इस छोटी सी अवधि में हमने दोनों देशों और लोगों के पूर्ण और ठोस संबंध बनाकर लंबी दूरी तय की है।
कहानोव ने कहा, मैं यदि यह कहूं तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि हम कुछ ऐसे क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं जो देशों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं जैसे खाद्य सुरक्षा, कृषि, रक्षा, आतंकवाद से निपटना आदि और भारत इस्राइल के अग्रणी आर्थिक भागीदारों में से एक बन गया है। विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने टैगोर के प्रसिद्ध यहूदी वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ संवाद का हवाला दिया। आइंस्टीन इस विश्वविद्यालय के संस्थापकों में से एक रहे हैं।
आइंस्टीन के साथ टैगोर की जर्मनी में हुई मुलाकात में प्रख्यात वैज्ञानिक ने गुरूदेव को ‘‘रबी टैगोर’’ कहकर संबोधित किया। इसके दो अर्थ हो सकते हैं.एक के अनुसार उन्होंने टैगोर को यहूदी रब्बी के रूप में संबोधित किया और दूसरा उन्होंने रवीन्द्रनाथ के नाम का संक्षिप्तीकरण किया। यह वाक्या विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष करमी गिलोन ने सुनाया।
उन्होंने टैगोर की कविताएं हिब्रू में सुनायी और इस बात का उल्लेख किया कि तेल अवीव विश्वविद्यालय के पास कैसे टैगोर स्ट्रीट आइंस्टीन स्ट्रीट को काटती है। (एजेंसी)