वाशिंगटन: शिकागो में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तथा उनके पाकिस्तानी समकक्ष आसिफ अली जरदारी के बीच द्विपक्षीय बैठक की कोई योजना नहीं है। सम्मेलन शनिवार को शुरू हो रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार टाम डोनिलोन ने कल व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ‘अभी की जानकारी के मुताबिक सम्मेलन में 61 देश उपस्थिति रहेंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति उन सभी के साथ द्विपक्षीय बैठक नहीं करने जा रहे हैं। फिलहाल राष्ट्रपति जरदारी के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक की कोई योजना नहीं है।’
दोनिलोन ने कहा कि हालांकि शिकागो सम्मेलन के दौरान ओबामा का अफानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई के साथ द्विपक्षीय बैठक की योजना है। इसका कारण सबको पता है क्योंकि इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक का फोकस अफगानिस्तान है।
उन्होंने कहा कि नाटो ने शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिये पाकिस्तानी राष्ट्रपति को न्यौता दिया है जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। अपने विदेश मंत्री तथा विदेश सचिव के साथ जरदारी रविवार को बैठक में शामिल होंगे। डॉनीलोन ने कहा, ‘ इस समय अफगानिस्तान की क्षमता तीन लाख 30 हजार सैनिकों की है। आगे चलकर यह तीन लाख 52 हजार तक हो जायेगी। हम इस दिशा में काम कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि ऐसी सेना को चलाने के लिये प्रतिवर्ष चार सौ करोड़ डॉलर का खर्चा आयेगा। इस दिशा में 30 देश अपना समर्थन जता चुके हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिका समेत ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों ने भी सहयोग राशि मुहैया कराने का वादा किया है। नाटो सम्मेलन के दौरान अन्य देश भी इसकी घोषणा कर सकते हैं। डॉनीलोन ने कहा कि सम्मेलन में 2014 के बाद नाटो की रणनीति पर भी विचार किया जायेगा। साथ ही अफगानिस्तान में नाटो प्रशिक्षण एवं सहायता मिशन पर भी विमर्श होगा। उन्होंने कहा कि इस समय प्रमुख लक्ष्य अल कायदा को हराना है जिससे वह अमेरिका और अन्य देशों के लिये खतरा न बने।
(एजेंसी)
First Published: Friday, May 18, 2012, 12:48