भारत 1962 की लड़ाई को भुला दे: चीन

भारत 1962 की लड़ाई को भुला दे: चीन

भारत 1962 की लड़ाई को भुला दे: चीन नई दिल्ली: चीन चाहता है कि भारत 1962 की लड़ाई को अतीत की ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ चीज के रूप में बिसार दे और दोनों देश सैन्य संबंध मजबूत करे जिसमें सीमा प्रबंधन समझौता को औपचारिक रूप प्रदान किया जाए एवं उसके तहत दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे पर गोलीबारी नहीं करे।

दोनों देशों के बीच सालाना रक्षा वार्ता के तीसरे दौर के लिए 14-15 जनवरी को बीजिंग यात्रा पर गए भारतीय रक्षा मंत्रालय के एक दल से चीन ने यह बात कही।

उच्च पदस्थ सू़त्रों ने बताया कि बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल से चीनी पक्ष ने कहा कि भारत 1962 के युद्ध को अतीत की दुर्भाग्यपूर्ण चीज के रूप में भूल जाए, चीन दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध के लिए आशान्वित है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा कर रहे थे। सन 1962 की लड़ाई में भारत को अपमानजनक हार का मुंह देखना पड़ा था।

सूत्रों के अुनसार चीनी पक्ष ने वार्ता के तीसरे दौरान में असामान्य गर्मजोशी दिखाई और उसने 4000 किलोमीटर से भी अधिक लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर औपचारिक सीमा प्रबंधन समझौते की इच्छा प्रकट की।

सूत्रों ने बताया कि चीनी पक्ष शीघ्र ही इस संबंध में प्रस्ताव भेज सकता है जिसमें यह सुझाव हो सकता है कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हों कि उनके सैनिक किसी भी परिस्थिति में एक दूसरे पर गोलीबारी नहीं करेंगे। चीन एक ऐसी प्रणाली भी चाहता है जिसके तहत दोनों देशों के सैनिक रात में गश्ती नहीं करेंगे और यदि वे एक दूसरे के आमने सामने आ भी गए तो एक दूसरे का पीछा नहीं करेंगे।

हालांकि जब भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चीनी सैनिकों की मौजूदगी का मुद्दा उठाया तो चीन इनकार की मुद्रा में बना रहा।

भारत का मानना है कि पीओके में चीनी निर्माण परियोजना स्थलों के इर्द-गिर्द बड़ी संख्या में चीनी सैनिक हैं। चीनी पक्ष ने कोई नकारात्मक मुद्दा नहीं उठाया जैसा कि उसने पहले किया था जब उसने चीन और मीडिया कवरेज पर सेना प्रमुखों के बयानों पर सवाल उठाया था। भारतीय प्रतिनिधमंडल केन्द्री सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष से भी मिला जो चीन के रक्षा मंत्री से भी उपर हैं। (एजेंसी)

First Published: Friday, February 01, 2013, 21:54

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