'भ्रष्टाचार के खिलाफ अगस्त से जेल भरो आंदोलन'

समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बड़े आंदोलन की हुंकार भरते हुए रविवार को एक बार फिर जंतर-मंतर पर केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से कहा कि वर्ष 2014 तक जनलोकपाल विधेयक लाओ या जाओ।

अंतिम अपडेट: Mar 25, 2012, 01:48 PM IST

दिल्ली : सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों का सामना कर रहे केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं के खिलाफ अगस्त तक प्राथमिकी नहीं दर्ज करने पर अगस्त से जेल भरो आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है।

 

जंतर मंतर पर अपने एक दिवसीय उपवास की समाप्ति पर हजारे ने कहा, जिन मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार या अपराध के मामले हैं, उनके खिलाफ अगर अगस्त तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी, तो एक नियत तिथि से जेल भरो आंदोलन शुरू किया जायेगा। उन्होंने कहा,  इस विषय पर पहले विभिन्न पक्षों और जनता से विचार विमर्श किया जायेगा। टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि संप्रग सरकार के कुछ प्रमुख मंत्रियों के खिलाफ मामले हैं और अगर लोकपाल विधेयक अमल में आ जाता है तो सरकार के 14 मंत्रियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।

 

केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के सिलसिले में शरद पवार, एस एम कृष्णा, पी चिदंबरम, प्रफुल पटेल, कपिल सिब्बल, कमलनाथ, फारूक अब्दुल्ला, अजित सिंह, श्री प्रकाश जायसवाल, सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख, एम के अलागिरि, जी के वासन समेत 25 राजनीतिज्ञों का नाम लिया। उन्होंने कहा कि देश में 4,120 विधायक है जिनमें से 1176 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं। इनमें से 513 के खिलाफ संगीन आरोप है।

 

उन्होंने कहा, फास्ट ट्रैक कोट बनाकर छह महीने में इन मामलों की सुनवाई की जानी चाहिए। बहरहाल, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए प्रभावी लोकपाल कानून बनाने के संबंध में सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का आरोप लगाते हुए हजारे ने कहा कि जनता की शक्ति के आगे एक दिन केंद्र को मजबूत लोकपाल विधेयक लाने को मजबूर होना होगा।

 

समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार मिटाने के लिए बड़े आंदोलन की हुंकार भरते हुए रविवार को एक बार फिर जंतर-मंतर पर केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से कहा कि वर्ष 2014 तक जनलोकपाल विधेयक लाओ या जाओ।

 

अन्ना हजारे ने आरोप लगाया कि देश से भ्रष्टाचार मिटाने को लेकर संप्रग सरकार की नीयत साफ नहीं है। इसलिए वह जनलोकपाल विधेयक पारित नहीं कर रही। लेकिन उन्होंने जनता का आह्वान किया कि यदि वे जाग जाएं तो सरकार को यह विधेयक जल्दी ही पारित करना होगा। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई लोकशाही के लिए है, जिसमें सत्ता जनता के हाथों में हो। उन्होंने ग्राम सभाओं को भी मजबूत करने पर बल दिया।

 

चुनाव में भ्रष्ट व दागी उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार मतदाताओं को देने की वकालत करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि संसद एवं राज्यों की विधानसभाओं में बड़ी संख्या में दागी लोग चुनकर पहुंच गए हैं। यदि उम्मीदवारों को नकारने का अधिकार मतदाताओं को मिल जाए तो इस पर रोक लगेगी।

 

उन्होंने कहा कि उनकी पहली लड़ाई जनलोकपाल विधेयक को लेकर है। बाद में उम्मीदवारों को नकारने के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी और फिर किसानों के हक में आवाज उठाई जाएगी। इसके बाद जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार के लिए भी लड़ाई लड़ी जाएगी।  (एजेंसी)