नई दिल्ली : संसद के दोनों सदनों की बैठकों की निरंतर कम होती संख्या पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए लोकसभा में आज एक बेहद महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जिसमें एक कैलेंडर वर्ष में लोकसभा और राज्यसभा की कम से कम 150 बैठकें आयोजित किए जाने का प्रावधान किया गया है।
कांग्रेस सदस्य दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने इस संबंध में गैर सरकारी ‘संविधान संशोधन विधेयक 2012’ पेश किया। विधेयक के कारणों और उद्देश्यों में कहा गया है कि भारत के संविधान में संसद के प्रत्येक सदन की बैठकों की संख्या निर्धारित नहीं है। उसमें केवल यही उल्लेख है कि संसद के एक सत्र की अंतिम बैठक और आगामी सत्र की पहली बैठक के लिए नियत तारीख के बीच छह महीने का अंतर नहीं होगा।
विधेयक में कहा गया है कि हाल ही में सदनों की बैठकों की संख्या कम करने की प्रवृति बढ़ रही है। विधेयक में आगे कहा गया है कि भारत जटिल समस्याओं वाला एक ऐसा देश है जिनका तत्काल और पक्का समाधान किए जाने की जरूरत है। संसद विधि निर्माण करने वाली सर्वोच्च निकाय है। यदि वह केवल सीमित दिनों के लिए बैठक करती है तो वह लोगों को अपनी शिकायतें प्रस्तुत करने और उनका समाधान करने के एक प्रभावी मंच के रूप में नहीं रह पाएगी।
(एजेंसी)
First Published: Friday, April 27, 2012, 19:35