नई दिल्ली : भाजपा सीबीआई की स्वतंत्रता सुनिश्चित न कराने वाले संशोधित लोकपाल विधेयक को स्वीकार नहीं कर सकती है। पार्टी सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। सरकार ने लोकपाल विधेयक में जहां कई बदलाव किए हैं और जहां इसे कैबिनेट की आज मंजूरी मिलने की सम्भावना है। इन सबके बीच भाजपा के एक नेता ने संकेत दिया कि लोकपाल एवं सीबीआई की स्थिति पर पार्टी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
भाजपा सीबीआई को जहां सरकार से स्वतंत्र करने पर जोर दे रही है, वहीं सामाजिक संगठन द्वारा तैयार जन लोकपाल विधेयक में जांच एजेंसी की भ्रष्टाचार-निरोधक इकाई को लोकपाल के तहत रखने की मांग की गई है। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई की स्वतंत्रता पर एक समझौते पर पहुंचने के लिए प्रस्तावों में से एक है कि जांच एजेंसी के निदेशक की नियुक्ति एक स्वतंत्र अधिकार प्राप्त समिति करे।
प्रस्ताव यह भी है कि आरोप पत्र की मंजूरी सरकार से लेने के बजाय सीबीआई इसकी मंजूरी लोकपाल से प्राप्त कर सकती है। इस प्रस्ताव से हालांकि, सीबीआई के अधिकारी खुश नहीं हैं। भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर विधेयक पर देरी कर रही है ताकि विधेयक संसद के मौजूदा सत्र में पारित न हो सके।
हुसैन ने पत्रकारों से कहा, 'सरकार जानबूझकर लोकपाल विधेयक में देरी कर रही है। यह न तो सरकार के लिए और न ही देश के लिए अच्छा है।' उन्होंने कहा, 'राज्यसभा में हमारे विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सत्र के पहले दिन इस मसले को उठाया। हम चाहते है कि इस विधेयक को इस सत्र में पारित कर दिया जाए।' सरकार मौजूदा सत्र के अवसान से एक दिन पहले 21 मई को संशोधित लोकपाल विधेयक को राज्यसभा में पेश कर सकती है।
(एजेंसी)
First Published: Thursday, May 17, 2012, 21:21