SIT रिपोर्ट में मोदी को क्‍लीन चिट

Last Updated: Tuesday, April 10, 2012 - 13:00

अहमदाबाद : सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल ने वर्ष 2002 में गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों से जुड़े गुलबर्ग सोसायटी मामले में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी और मामले को बंद करने की मांग की क्योंकि उसे मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एमएस भट्ट ने दंगो के मामले में जाकिया जाफरी की ओर से मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तथा 57 अन्य आरोपियों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर अपने आदेश में कहा कि एसआईटी के मुताबिक जाकिया की शिकायत में सूचीबद्ध 58 लोगों में से किसी के खिलाफ कोई अपराध साबित नहीं हुआ है।

 

अदालत ने दिवंगत कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया को एसआईटी रिपोर्ट तथा सभी संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां 30 दिन के भीतर दिये जाने के लिए भी कहा। सांसद जाफरी की गुलबर्ग सोसायटी दंगे के दौरान मौत हो गई थी। अदालत ने कहा कि शिकायती का पक्ष सुनने के बाद यह फैसला करना होगा कि क्लोजर रिपोर्ट कीे स्वीकार किया जाए या नामंजूर कर दिया जाए।

 

अदालत ने कहा कि इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार फरियादी को रिपोर्ट तथा संबंधित दस्तावेजों की प्रति दी जानी है। उन्होंने कहा कि जाकिया को कोई नोटिस देने की जरूरत नहीं क्योंकि उन्होंने पहले ही अदालत से रिपोर्ट की प्रति के लिए गुहार लगाई है। अदालत ने कहा कि इसलिए आदेश दिया जाता है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जाकिया को जांच रिपोर्ट, गवाहों के बयानों और सभी संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां इस आदेश के 30 दिन के भीतर दी जाएंगी। एहसान जाफरी की विधवा जाकिया ने मोदी, सरकार में उनके कुछ सहयोगी मंत्रियों, कुछ आला पुलिस अधिकारियों और भाजपा पदाधिकारियों पर 2002 के दंगों के दौरान व्यापक तौर पर साजिश रचने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। दंगों में एक हजार से अधिक लोग मारे गये थे, जिनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के थे।

 

शीर्ष अदालत ने जाकिया की शिकायत पर जांच का आदेश दिया था और आर के राघवन की अध्यक्षता में विशेष जांच दल का गठन तफ्तीश के लिए किया। एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जाकिया ने कहा कि वह दुखी हैं और न्याय के लिए संघर्ष करती रहेंगी। वहीं भाजपा ने कहा कि 2002 के दंगों को मोदी के खिलाफ अभियान जारी रखने के लिहाज से ‘हौआ’ नहीं बनने दिया जा सकता। राघवन ने कहा कि फरियादी को एसआईटी रिपोर्ट के नतीजों को चुनौती देने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमने एक रिपोर्ट दाखिल कर कहा है कि याचिका विशेष के तथ्यों के संबंध में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है और हमने इसे बंद करने की सिफारिश की है। राघवन ने कहा कि हमने अपनी क्षमताओं के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ तरीके से काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि दल के नतीजों पर पहुंचने में उसकी निष्ठा पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता।

 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायमित्र के तौर पर नियुक्त राजू रामचंद्रन ने उम्मीद जताई कि एसआईटी रिपोर्ट पर उनकी स्वतंत्र पड़ताल की रिपोर्ट भी फरियादी को दी जाएगी, जिसे अदालत में एक ‘विरोध याचिका’ दाखिल करने का हक है। रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट के बारे में कोई खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने एसआईटी रिपोर्ट पर निष्पक्ष आकलन किया है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी रिपोर्ट को देखने के बाद न्यायमित्र राजू रामचंद्रन से एसआईटी के निष्‍कर्षों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने को कहा था। रामचंद्रन ने भी अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत में जमा कर दी।

 

शीर्ष अदालत ने दोनों रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद एसआईटी को फाइनल रिपोर्ट मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट को सौंपने का निर्देश दिया, जिसमें उसके द्वारा एकत्रित सभी सामग्री भी होने का निर्देश दिया गया। एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट 28 फरवरी को सौंप दी। सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर, 2011 के अपने आदेश में कहा था कि यदि एसआईटी को लगता है कि शिकायत में दर्ज किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिहाज से कोई जायज आधार या पर्याप्त साक्ष्य नहीं है तो अदालत इस तरह की क्लोजर रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लेने से पहले फरियादी को नोटिस जारी करेगी और उन्हें गवाहों के बयानों, अन्य संबंधित दस्तावेजों तथा जांच रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराएगी।


जाकिया ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उपर अल्लाह की अदालत में इंसाफ में देरी हो सकती है लेकिन नाइंसाफी नहीं। मुझे भरोसा है कि सचाई सामने आएगी और मुझे इंसाफ मिलेगा। जाकिया ने कहा कि आगे का रास्ता कठिन है लेकिन मुझे अदालत पर पूरा भरोसा है। अदालत ने कहा कि इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार फरियादी को रिपोर्ट तथा संबंधित दस्तावेजों की प्रति दी जानी है। उन्होंने कहा कि जाकिया को कोई नोटिस देने की जरूरत नहीं क्योंकि उन्होंने पहले ही अदालत से रिपोर्ट की प्रति के लिए गुहार लगाई है।

(एजेंसी)



First Published: Wednesday, April 11, 2012 - 12:17


comments powered by Disqus