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कश्मीर का सर्व स्वीकार्य हल नहीं: कसूरी

कोलकाता : पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) द्वारा गठित कश्मीर पर कार्यबल के प्रमुख और पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा कि कश्मीर मुद्दे का कोई ‘संपूर्ण’ समाधान नहीं हो सकता जो सभी को स्वीकार्य हो।
 
भारत-पाक संबंधों पर एक चर्चा में कसूरी ने कहा, ‘कोई भी ऐसा समाधान नहीं हो सकता जो कश्मीर और पाकिस्तान में सौ फीसदी लोगों को स्वीकार्य हो। कोई भी समाधान संपूर्ण नहीं हो सकता।’ पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ और भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच शांति वार्ता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान केवल राजनेता कर सकते हैं राजनीतिज्ञ नहीं।
 
उन्होंने कहा, ‘राजनीतिज्ञ केवल अगले चुनाव के बारे में सोचते हैं।’ उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच युद्ध कोई विकल्प नहीं है। कसूरी ने कहा, ‘हमारे पास केवल यही रास्ता है कि गलतफहमी दूर की जाए और खुला संवाद स्थापित किया जाए। आगे केवल यही रास्ता है।’ वर्ष 2002 से 2007 के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री रहे कसूरी अब क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पार्टी पीटीआई में हैं और कश्मीर विवाद को लेकर बने कार्यबल के प्रमुख हैं।
 
भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान मिसाइल होड़ के बारे में कसूरी ने कहा कि कभी-कभी भाईयों के बीच भी लड़ाई होती है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन जीवन चलता रहता है। हो सकता है बाद में प्रतियोगिता कम हो।’ उन्होंने कोई भी निर्णय करने से पहले दोनों देशों के नेतृत्व से विचार करने को कहा।
 
कसूरी ने कहा कि गांधी और जिन्ना दोनों भारत-पाकिस्तान के बीच दोस्ताना संबंध चाहते थे ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका और कनाडा के बीच है। उन्होंने कहा, ‘लेकिन विभाजन और कश्मीर मुद्दे पर कड़वे अनुभवों के कारण इसे पूरा नहीं किया जा सका।’ उन्होंने दोनों देशों के नेताओं को अपने रूख पर अड़े रहने की सलाह दी भले ही वे विपक्ष में रहें। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपना रुख कभी नहीं बदला। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस खतरे से सर्वाधिक प्रभावित पाकिस्तान रहा है। (एजेंसी)


First Published: Sunday, April 29, 2012, 20:46

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