पृथक तेलंगाना के गठन पर लगी मुहर, हैदराबाद होगी साझा राजधानी

पृथक तेलंगाना राज्य के गठन का रास्ता साफ हो गया है। यूपीए की समन्वय समिति की मंजूरी के बाद कांग्रेस कार्य समिति ने भी पृथक तेलंगाना के गठन पर मंगलवार को अपनी मुहर लगा दी।

नई दिल्ली : कांग्रेस और केन्द्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने अलग तेलंगाना राज्य के गठन पर सर्वसम्मति से अपने समर्थन की मंगलवार को मुहर लगा दी।
कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई ‘कांग्रेस कार्य समिति’ ने यहां अपनी बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर निश्चित समय सीमा के भीतर अलग तेलंगाना राज्य गठित करने की दिशा में कदम उठाने का केन्द्र से आग्रह करने का निर्णय किया।
कांग्रेस ने केन्द्र सरकार से हैदराबाद को 10 साल के लिए आंध्रप्रदेश और प्रस्तावित तेलंगाना राज्य की साझा राजधानी बनाने की सिफारिश करने का भी निर्णय किया।
पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के बारे में कांग्रेस कार्य समिति और संप्रग का यह महत्वपूर्ण फैसला करीब एक सप्ताह के गहरे विचार विमर्श के बाद सामने आया है । यह देश का 29वां राज्य होगा। इसमें एकीकृत आंध्र प्रदेश के 23 में से 10 जिले शामिल होंगे।
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव और पार्टी के आंध्र प्रदेश मामलों के प्रभारी दिग्विजय सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि फिलहाल तेलंगाना में दस जिलो को रखने का विचार है लेकिन और क्षेत्रों को शामिल करने के बारे में अंतिम फैसला मंत्री समूह करेगा।
आंध्र प्रदेश की लोकसभा की 42 और विधानसभा की 294 सीटों में से प्रस्तावित तेलंगाना में लोकसभा की 17 और विधानसभा की 119 सीटें होने की संभावना है।
सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी उपध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हिस्सा लिया। बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के फैसले से पूरे आंध्र क्षेत्र को मदद मिलेगी। बैठक में सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर ऐतिहासिक परिपेक्ष्य पेश किया। दिग्विजय सिंह ने प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
प्रस्तावित तेलंगाना राज्य में हैदराबाद, मेडक, आदिलाबाद, खम्माम करीमनगर, महबूबनगर, नलगोंडा, निजामाबाद, रंगारेड्डी और वारंगल शामिल होंगे।
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में इस बात का उल्लेख किया गया है कि संप्रग-1 सरकार के साझा न्यूनतम कार्यक्रम में मई 2004 और उसी साल संसद के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के अभिभाषण में विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से अलग तेलंगाना राज्य के गठन की बात कही गई थी।
इसके बाद संप्रग दो के कार्यकाल के दौरान नौ दिसम्बर 2009 को तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने तेलंगाना राज्य बनाने के बारे में एक बयान जारी किया था।
कांग्रेस कार्य समिति में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि दस साल के भीतर आंध्र प्रदेश के लिए नयी राजधानी का निर्माण करने में सहयोग किया जायेगा। इसमें यह भी कहा गया कि कोलावरम सिंचाई परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया जायेगा और इसके पूरा होने के लिए उचित कोष उपलब्ध कराया जायेगा।
प्रस्ताव के अनुसार आंध्र प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों अथवा जिलों की पहचान करके उनकी विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उनके विकास के लिए उचित कोष दिया जायेगा। अलग तेलंगाना राज्य बनने के बाद आंध्र प्रदेश सहित दोनों राज्य सरकारों को अपने अपने क्षेत्रों और जिलों में शांति और सौहार्द तथा कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सहयोग किया जायेगा।
कांग्रेस कार्य समिति ने सभी कांग्रेसजनों और आंध्र प्रदेश के तेलगू भाषी लोगों से अपील की कि वे अपना पूर्ण सहयोग दे जिससे कि इस प्रस्ताव को इस तरह लागू किया जा सके जिससे दोनों राज्यों में शांति, सौहार्द, प्रगति और खुशहाली सुनिश्चित हो सके। दिग्विजय सिंह ने संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में कहा कि अलग तेलंगाना राज्य बनाने का फैसला किसी राजनीतिक आवश्यकता या राजनीतिक मजबूरी के तहत नहीं किया गया है।
दोनों राज्यों के बीच संसाधनों के बंटवारे के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि इस विषय पर मंत्री समूह का गठन होगा जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच भूमि, जल, राजस्व, परिसंपत्तियों तथा देनदारियों के मसले को देखेगा।
दिग्विजय सिंह ने सवालों के जवाब में इस बात को गलत बताया कि किन्ही राजनीतिक कारणों से तेलंगाना राज्य बनाने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि यह लंबे समय से चली आ रही मांग थी और इसका चुनावों से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि केन्द्र आंध्र प्रदेश विधान सभा से आग्रह करेगा कि वह तेलंगाना राज्य बनाने के बारे में प्रस्ताव पारित करे।
तेलंगाना राष्ट्र समिति की चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि इसके अध्यक्ष के चन्द्र शेखर राव ने कहा है कि तेलंगाना राज्य बन जाने पर उनकी पार्टी कांग्रेस में विलय कर लेगी। हमें उनकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। हम इस मुद्दे पर चर्चा करने के पक्ष में हैं।
सोनिया गांधी के निवास दस जनपथ पर हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के पहले सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के नेताओं की बैठक में तेलंगाना के गठन के प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन किया गया।
रालोद नेता एवं केन्द्रीय मंत्री अजीत सिंह ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर संप्रग घटक दलों के नेताओं की बैठक के बाद संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘संप्रग ने तेलंगाना के पक्ष में एकमत से निर्णय किया है।’
राकांपा प्रमुख शरद यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई तथा संप्रग घटक दल तेलंगाना राज्य के गठन को सहमति देने के मामले में ‘पूरी तरह से एकमत थे।’ सिंह और पवार के अलावा नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, वित्त मंत्री पी चिदंबरम और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाग लिया।
केन्द्रीय मंत्री एवं कांग्रेस में आंध्र प्रदेश के पूर्व प्रभारी गुलाम नबी आजाद, पार्टी में आंध्र प्रदेश के वर्तमान प्रभारी दिग्विजय सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी बैठक में मौजूद थे। यह बैठक करीब एक घंटे तक चली।
तेलंगाना के गठन को लेकर कांग्रेस के अंदर विरोध के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी कार्य समिति में लिये गये फैसले के साथ पूरी तरह खड़ी है। सिंह ने पृथक राज्य के गठन को लेकर विभिन्न राज्यों से उठ रही मांगों के बारे में पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि सिर्फ आंदोलन के आधार पर राज्यों का गठन नहीं होता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ध्ययन करना होता है। (एजेंसी)

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