ममता नहीं चाहतीं स्कूली कोर्स में मार्क्स चैप्टर

Last Updated: Friday, April 6, 2012 - 13:40

ज़ी न्यूज ब्यूरो/एजेंसी
कोलकाता : जर्मन दार्शनिक व मार्क्सवाद के संस्थापक कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स को स्कूल शिक्षा पाठयक्रम समिति ने हायर सेकंडरी के इतिहास के पाठयक्रम से बाहर करने का निर्णय किया है।

 

पश्चिम बंगाल में स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम समिति की सिफारिशों के बाद सरकारी स्कूलों में इतिहास के पाठ्यक्रम से मार्क्‍सवाद के संस्थापकों कार्ल मार्क्‍स एवं फ्रेडरिक एंगेल्स को हटाया जा सकता है। प्रदेश में 34 साल के वामपंथी शासन को हटाने के कुछ महीने बाद ममता बनर्जी सरकार के इस कदम की आज कम्युनिस्ट पार्टियों ने निंदा की और इसे इतिहास फिर से लिखने की कोशिश करार दिया। लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह कोशिश उस असंतुलन को सुधारने की है जो प्रदेश के स्कूलों में इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में है।

 

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओब्रायन ने सफाई दी कि सरकार इतिहास से छेड़छाड़ का प्रयास नहीं कर रही। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि मार्क्‍स को ऐतिहासिक विषय के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए लेकिन महात्मा और मंडेला की कीमत पर नहीं।’ उन्होंने कहा, ‘बंगाल संतुलन पर ध्यान दे रहा है और इतिहास से छेड़छाड़ नहीं कर रहा।’ तृणमूल नेता ने कहा, ‘इतिहास बोल्शेविक्स से शुरू होकर बसु तथा भट्टाचार्यों पर खत्म नहीं हो जाता।’ प्रदेश के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम समिति को पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने और छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करने का काम सौंपा गया था और समिति ने पाठ्यपुस्तकों में से मार्क्‍स तथा एंगेल्स और 1917 की बोल्शेविक क्रांति को हटाने की सिफारिश की है।

 

खबरों के अनुसार समिति के प्रमुख अवीक मजूमदार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इतिहास के पाठ्यक्रम में एक विचारधारा विशेष को अहमियत दी गयी है और अब इसे संतुलित करने का प्रयास किया जा रहा है। मजूमदार ने कहा कि यदि किसी चीज की अधिकता है तो उसे हटाया जाएगा। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने पाठ्यक्रम से रूसी क्रांति, मार्क्‍स, एंगेल्स को हटाए जाने की संभावना पर राज्य सरकार की आलोचना की और कहा, ‘मुझे नहीं मालूम कि इतिहास के पाठ्यक्रम से विश्व इतिहास के अध्यायों को हटाने की सलाह मुख्यमंत्री को कौन दे रहा है लेकिन यह निश्चित तौर पर एक गलत और विवादास्पद फैसला है।’

 

प्रख्यात वाम नेता ने कहा कि यदि छात्र मार्क्‍स, एंगेल्स और रूसी क्रांति के बारे में पढ़ते हैं तो यह नहीं माना जाना चाहिए कि वे कम्युनिस्ट बन जाएंगे। भाकपा सांसद गुरूदास दासगुप्ता ने इस कदम को भद्दा कहा। नए पाठ्यक्रम का अंतिम मसौदा अगले सप्ताह पश्चिम बंगाल उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद को सौंपा जा सकता है। दासगुप्ता ने कहा कि यह कदम केवल राजनीति से प्रेरित नहीं बल्कि इतिहास को खराब करने की भी कोशिश है।



First Published: Sunday, April 8, 2012 - 14:12


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