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‘सिद्दीकी मामले में अगला कदम चुनाव बाद’

Wednesday, February 29, 2012, 14:12
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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के विरूद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच कराए जाने की उनकी संस्तुति को ठुकरा दिए जाने के मामले में अपना अगला कदम छह मार्च को विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाने के बाद ही उठाएंगे।
 
लोकायुक्त मेहरोत्रा ने सिद्दीकी के खिलाफ सीबीआई जांच की संस्तुति को अपने क्षेत्राधिकार में बताते हुए कहा कि मैंने इस संबंध में राज्य सरकार से मिले पत्र का अध्ययन करके आगे की कार्रवाई के लिए अपना मन बना लिया है। तय सिर्फ यह करना है कि मामले को पुनर्विचार के लिए मुख्यमंत्री को भेजा जाए अथवा इस संबंध में राज्यपाल को विशेष प्रतिवेदन भेजा जाय और कब भेजा जाए। उन्होंने कहा कि हालांकि उन्हें चुनाव से नहीं बल्कि अपने काम से मतलब है, उन्हें कोई जल्दी नहीं है और वे चुनाव समाप्त हो जाने तथा नई सरकार के गठन की प्रतीक्षा कर सकते हैं।
 
सिद्दीकी के खिलाफ सीबीआई अथवा प्रवर्तन निदेशालय से जांच की संस्तुति का आशय कहीं यह तो नहीं कि उन्हें राज्य सरकार की जांच एजेंसियों पर भरोसा नहीं है, इस पर मेहरोत्रा ने कहा कि उन्होंने सीबीआई जांच की संस्तुति जनभावनाओं को ध्यान में रख कर की है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के बर्खास्‍त मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के विरूद्ध सतर्कता विभाग से जांच की संस्तुति करने पर आम जनों की ओर से ऐसी प्रतिक्रियाएं आई थी कि राज्य सरकार की एजेंसी शायद निष्पक्ष जांच नहीं करेगी। लोकायुक्त ने कहा कि कुशवाहा के मामले में मिली जन प्रतिक्रिया और सिद्दीकी के विरूद्ध लगे आरोप की गंभीरता को देखते हुए ही उन्होंने मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की संस्तुति की है और इसे राज्य सरकार पर अविश्वास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
 
उल्लेखनीय है कि प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने अपने करीबी मंत्री सिद्दीकी के खिलाफ लगे करोड़ों रुपये की हेराफेरी और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के बाद उनके विरूद्ध सीबीआई जांच करवाने के बारे में लोकायुक्त की सिफारिश को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि जिन मामलों में जांच की सिफारिश की गई है, वे लोकायुक्त के दायरे में नहीं आते हैं। मेहरोत्रा ने कहा कि उन्होंने जो भी संस्तुति की है, वह उनके अधिकार क्षेत्र के अंदर है और वे अपनी संस्तुतियों पर अब भी कायम हैं।
 
उन्होंने कहा कि उनकी सिफारिशें मानना अथवा न मानना मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में वे नियमानुसार मामले को मुख्यमंत्री के पास पुनर्विचार के लिए भेज सकते हैं और उनकी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने पर राज्यपाल को विशेष प्रतिवेदन भी भेज सकते हैं। मेहरोत्रा ने कहा कि वे इस मामले में अपना मन बना चुके हैं अब केवल उचित समय की प्रतीक्षा है।


First Published: Wednesday, February 29, 2012, 19:42

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