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MCD: भाजपा फिर से लौटी सत्‍ता में

Tuesday, April 17, 2012, 02:41
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ज़ी न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली : दिल्ली नगर निगम चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस पर जीत दर्ज की है, जहां पार्टी को नवगठित तीन निगमों में से दो पर निर्णायक जीत हासिल हुई है वहीं दक्षिणी निगम में वह सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आई है। राज्य चुनाव आयोग से मिली जानकारी के मुताबिक, एमसीडी चुनाव में भाजपा ने 272 वार्डों में 138 पर जीत दर्ज की । कांग्रेस को 78 वार्ड में जीत हासिल हुई जबकि बसपा को 15 सीट तथा राकांपा को छह वार्ड में जीत मिली। भाजपा ने पूर्वी और उत्तरी निगम में निर्णायक जीत दर्ज की जबकि दक्षिणी निगम सें वह सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। अन्‍य को कुल 24 सीटें मिलीं।
 
इस तरह भाजपा नवगठित तीनों निगमों पर कबिज हो गई है। उत्तर और पूर्वी नगर निगम में भाजपा को बहुमत मिल गया है, वहीं दक्षिणी निगम में वह सबसे बड़ी पार्टी बनी है। हालांकि दक्षिणी निगम में भाजपा को अन्य सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। और उसे निर्दलीयों के समर्थन से जरूरी संख्या हासिल करने की उम्मीद है।
 
साल 2007 में हुए एमसीडी चुनाव में भाजपा को 164 वार्डों में जीत हासिल हुई थी, जबकि कांग्रेस को 67 सीट मिली थी। बसपा को 17 वार्ड में तथा लोजपा, झामुमो, इनेलोद, राकांपा को दो-दो तथा 15 सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार एमसीडी चुनाव में भाजपा ने हालांकि एक बार फिर कांग्रेस को पराजित किया है, लेकिन इस बार पार्टी को 26 सीटें कम मिली हैं। वहीं, कांग्रेस को इस बार 11 सीटें अधिक मिली हैं। बसपा को भी इस बार दो सीटें कम मिली जबकि राकांपा की सीटों में वृद्धि हुई है। उत्तर और पूर्वी नगर निगम में भाजपा ने अपने दम पर जीत हासिल की है वहीं दक्षिणी निगम में उसे निर्दलियों के समर्थन से जरूरी संख्या हासिल करने की उम्मीद है। रविवार को नगर निगम के 272 वार्डों के लिए मतदान हुआ था।
 
प्राप्त परिणामों के मुताबिक, दक्षिण दिल्ली नगर निगम में भाजपा ने 104 वार्डों में 44 वार्डों में जीत दर्ज की है और उसे बहुमत के जादुई अंक के नौ सीटें कम मिली है। पार्टी को निर्दलीयों के समर्थन की उम्मीद है। इस क्षेत्र में 14 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 30 सीटें मिली। बसपा को पांच सीट, राकांपा को पांच सीट, इनेलोद को तीन सीट तथा जदयू, रालोद को एक-एक सीट पर जीत मिली।
 
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 104 वार्डों में भाजपा ने 59 वार्डों में जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस 29 सीटें जीती। बसपा को सात सीटें मिली, रालोद को चार, लोजपा को एक तथा चार सीटें निर्दलीयों के खाते में गई। कांग्रेस को सबसे अधिक झटका पूर्वी दिल्ली निगम में लगा जहां 64 वार्डों में से भाजपा ने 35 वार्डों में जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस को 19 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस क्षेत्र में इनेलोद को छह सीटें मिली जबकि सपा को एक सीट तथा तीन सीट निर्दलीयों के खाते में गई।
 
गौरतलब है कि पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्र के तीन निगमों के 272 वार्डों में रविवार को हुए मतदान में कुल 1.15 करोड़ मतदाताओं में से 55 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ये चुनाव स्थानीय मुद्दों के आधार पर लड़े गए और चुनाव में किसी की जीत तो किसी की हार होती है और इसे उसी भावना से स्वीकार किया जाना चाहिए।
 
दूसरी ओर, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि ये परिणाम कांग्रेस विरोधी जन भावना का पक्का सुबूत हैं और उनका दल आगामी दिल्ली विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों में भी विजयी होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में होने वाले किसी भी चुनाव का राष्ट्रीय महत्व होता है, क्योंकि यह देश की जनता के मूड को दर्शाता है।
 
आज पहला चुनाव परिणाम पूर्वी क्षेत्र के शाहदरा (एससी) सीट का घोषित किया गया जहां से भाजपा के बलबीर सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस के जगदीश को 128 मतों के अंतर से पराजित किया। अविभाजित एमसीडी के नेता भाजपा के सुभाष आर्य ने अपने निकटतम प्रतिन्द्विी कांग्रेस के मनमोहन सिंह कोचर को पराजित किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजेन्दर गुप्ता की पत्नी शोभा ने कांग्रेस की डॉ. मोनिका पुरी को हराया। एमसीडी में विपक्ष के नेता जय किशन शर्मा (कांग्रेस) नजफगढ़ वार्ड से चुनाव हार गए हैं।
 
कांग्रेस ने हालांकि चुनाव परिणाम को कोई खास तवज्जो नहीं दिया और पार्टी प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि एमसीडी चुनाव को नगर निकाय चुनाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता एम वेंकैया नायडू ने कहा कि एमसीडी में भाजपा के अच्छे कार्यों और कांग्रेस के भ्रष्टाचार के कारण उनकी पार्टी को अच्छा परिणाम देखने को मिला है। दोनों राष्ट्रीय दलों कांग्रेस और भाजपा के लिए यह चुनाव परिणाम बेहद अहम है क्योंकि इस चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है।
 
दक्षिणी और उत्तरी दिल्ली के निकायों में से हर एक में 104 वार्ड हैं जबकि पूर्वी दिल्ली के नगर निगम में 64 वार्ड हैं। कुल 272 सीटों में से 138 सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं। सबसे ज्यादा 904 उम्मीदवार दक्षिण से खड़े हुए हैं जबकि उत्तर से 885 और पूर्वी दिल्ली में 634 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। अविभाजित एमसीडी में भाजपा के 164 पार्षद हैं जबकि कांग्रेस के 67 और बसपा के 17 हैं। भाजपा ने इस चुनाव में शीला सरकार के कथित भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया जबकि कांग्रेस ने भगवा पार्टी पर एमसीडी में नाकाबिल और भ्रष्ट प्रशासन देने का आरोप लगाया था।
 
दिल्ली नगर निगम के लिए रविवार को हुए मतदान में कुल मिलाकर 55 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। पिछले 15 सालों में यह रिकार्ड मतदान माना जा रहा है। निगम चुनावों में भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा को इसलिए भी दांव पर माना जा रहा है क्योंकि इसे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के सेमी.फाइनल के तौर पर देखा जा रहा है।
 
2007 में हुए एमसीडी चुनाव में कुल करीब 42.35 मतदाताओं ने वोड डाले थे जिनमें भाजपा को 36.17 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन मिला था वहीं कांग्रेस को 29.17 फीसदी दिल्लीवासियों के वोट मिले। बसपा को 9.87 प्रतिशत वोट मिले थे। आज घोषित कुछ चुनाव परिणामों में अविभाजित एमसीडी के नेता भाजपा के सुभाष आर्य ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस के मनमोहन सिंह कोचर को पराजित किया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजेन्दर गुप्ता की पत्नी शोभा ने कांग्रेस की डा मोनिका पुरी को हराया। एमसीडी में विपक्ष के नेता जय किशन शर्मा (कांग्रेस) नजफगढ़ वार्ड से चुनाव हार गए हैं।
 


First Published: Wednesday, April 18, 2012, 12:00

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