समीक्षा : `तलाश` में ट्रिक, रहस्‍य, रोमांच का भरपूर तड़का

किसी थ्रिलर फिल्‍म की पटकथा लिखना और उसे रुपहले पर्दे पर मूर्त रूप देना कभी आसान काम नहीं रहा है। रीमा काग्‍जी के निर्देशन में बनी फिल्‍म तलाश की कहानी में ट्रिक, रहस्‍य, रोमांच आदि का भरपूर तड़का है। कहानी सशक्‍त होने के साथ-साथ फिल्‍म के आगे बढ़ने पर कोई अनुमान लगाना काफी कठिन होता है। इसमें कोई शक नहीं है कि इस फिल्‍म को देखने समय दर्शक काफी थ्रील महसूस करेंगे।

अंतिम अपडेट: Dec 1, 2012, 01:16 PM IST

ज़ी न्‍यूज ब्‍यूरो
किसी थ्रिलर फिल्‍म की पटकथा लिखना और उसे रुपहले पर्दे पर मूर्त रूप देना कभी आसान काम नहीं रहा है। रीमा काग्‍जी के निर्देशन में बनी फिल्‍म तलाश की कहानी में ट्रिक, रहस्‍य, रोमांच आदि का भरपूर तड़का है। कहानी सशक्‍त होने के साथ-साथ फिल्‍म के आगे बढ़ने पर कोई अनुमान लगाना काफी कठिन होता है। इसमें कोई शक नहीं है कि इस फिल्‍म को देखने समय दर्शक काफी थ्रील महसूस करेंगे। मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान की ‘तलाश’ ने इस हफ्ते सिनेमाघरों में दस्तक दी है।
रीमा और जोया अख्‍तर द्वारा लिखित इस फिल्‍म की शुरुआत से ही दर्शक बंध जाएंगे और अंत तक इसकी कहानी में खोये रहेंगे। नुकसान, धोखा और बदले की कहानी से युक्‍त फिल्‍म तलाश सच्‍चाई के कई मायनों से रूबरू करवाती है और कई सवालों को भी जन्‍म देती है। हालांकि दर्शकों को इस फिल्‍म की कई चीजें गहराई से सोचने पर भी मजबूर करती है।
आमिर खान की फिल्म ‘तलाश’ एक मर्डर मिस्ट्री है। इस फिल्म में आप एक उलझे हुए केस की कड़ी लगातार बनते और बिगड़ते हुए देखेंगे। रीमा काग्ती की इस फिल्म की पटकथा मजबूत है। इसके अलावा मुख्य किरदारों ने काफी दमदार अभिनय किया है। हालांकि फिल्म की रफ्तार कभी-कभी धीमी मालूम पड़ती है।
इस फिल्‍म आमिर खान एक इंस्पेक्टर सुरजन सिंह शेखावत के किरदार में है। एक होशियार और ईमानदार आमिर को हाई प्रोफाइल एक्सीडेंट के केस को सुलझाना होता है। इस केस की तफतीश करने में आमिर को लगातार उलझनों और मुश्किलों से गुजरना पड़ता है।
मुंबई में एक रात समुद्र की गहराइयों में एक कार गिर जाती है। कुछ शुरुआती रिपोर्ट में इसे एक हादसा बताया जाता है। इंसपेक्‍टर सुर्जन सिंह शेखावत (आमिर खान) इस केस की जांच करते हैं और इसमें ब्‍लैकमेलिंग का मामला पता चलता है। जिसका इस हादसे कोई जुड़ाव हो सकता है। इस केस की जांच करते समय वह तेहनुर (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) और वेश्‍या रोजी (करीना कपूर) के संपर्क में आते हैं। इस केस में कॉल गर्ल करीना कपूर उनकी मदद करती है। हत्यारे तक पहुंचने की कहानी इतनी दिलचस्प है कि आपका हर किरदार की तरफ शक करने को मजबूर होंगे।
पिछली फिल्मों की तरह आमिर खान ने इस फिल्म में भी अपने किरदार को बखूबी निभाया है। उन्होंने एक इंस्पेक्टर और दुखी बाप के भाव को बारीकी से दर्शाया है। करीना कपूर एक खूबसूरत कॉलगर्ल की भूमिका में हैं। फिल्म में उनके आने से सस्पेंस और बढ़ जाता है। वहीं रानी मुखर्जी ने आमिर की पत्नी रोशनी शेखावत का किरदार निभाया है। अभिनय की बात करें तो रानी भी आमिर से कहीं पीछे नहीं दिखाई दी हैं। रानी ने अपनी आंखो में बेटे की मौत का गम और उससे पनपी जिंदगी के अधूरेपरन को दर्शाया है।
शुरुआत में तलाश फिल्म की गति तेज़ रहती है। पहले आधे घंटे में फिल्म दर्शकों को बांधे रखती है। लेकिन इसके बाद के भाग के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता। इंटरवल से पहले एक अनोखे मोड़ से फिल्म वापस दर्शकों को हैरत में डाल देती है। दर्शक इस फिल्‍म का क्लाइमेक्स को देखकर हैरान रह जाएंगे। रीमा काग्ती की यह फिल्म वाकई में देखने लायक है और फिल्म आपको अंत तक बांधकर रखती है।
फिल्म तलाश के मुख्‍य किरदार हैं आमिर खान, करीना कपूर और रानी मुखर्जी। इस फिल्‍म की निर्देशक हैं रीमा काग्ती।