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प्यार का बाजारीकरण

Monday, February 13, 2012, 23:21

रामानुज सिंह
 
वैलेंटाइंन डे प्रति वर्ष 14 फरवरी को प्रेम दिवस से रुप में मनाया जाता है। यह दिन खासकर उस युवक और युवती के लिए होता है जो एक दूसरे से प्यार करते हैं। आज हर जवां धड़कन अपनी दिल की बात अपनी मासूका या प्रेमी से कहना चाहता है। लेकिन इजहार-ए-इश्क अब इतना आसान नहीं रह गया है। इस पर बाजार हावी हो गया है। अब प्रेमी या प्रेमिका को भावाना नहीं हैसियत के हिसाब से गिफ्ट देना होता है। पहले प्यार जताने के लिए कोई दिन तय नहीं होता था पर जब से वैश्वीकरण हुआ तब से प्यार जताने के लिए भी यह दिन फिक्स हो गया। क्योंकि यहां भी बाजार आ गया है। बाजार अपने हिसाब से सब कुछ तय करता है।
 
जब दो जवां दिल मिलते हैं। दोनों की भावनाएं मिलती हैं। दोनों के विचार मिलते हैं। दोनों धीरे-धीरे करीब आते हैं। एक-दूसरे के सुख-दुख समझते है और आपस में शेयर करते हैं। एक-दूसरे के लिए दिल रोता है। दूर होकर भी पास नजर आता है। ना काल- गोरे का फर्क होता है और ना ही अमीर और गरीब का। प्यार इसी को कहते हैं। इस तरह का प्यार अब बीते जमाने की बात हो गई।
 
आज के दौर का प्यार बिल्कुल अलग है। आजकल जेब देखा जाता है। स्टेटस देखा जाता है। गाड़ी, बंगला और तमाम एशो आराम की सुविधाएं। तब इजहार-ए-इश्क होता है। इसमें भावना का कहीं कोई स्थान नहीं होता है। यह मानो विलुप्त प्राणी की तरह गायब हो गई है। इसमें कॉन्ट्रैक्ट होता है। आगे खर्च वहन किया गया तो ठीक नहीं तो साहिल आने से पहले ही प्यार की कश्ती डूब जाती है।
 
जैसे-जैसे जीवन में बाजार आया यानी विलासिता संबंधी वस्तुओं से सामना हुआ वैसे-वैसे जीवन से प्यार का अंत होने लगा। आज हर किसी को वेल फर्निस्ड घर, लग्जरी गाड़ी चाहिए। इतना ही नहीं घर में तमाम सुविधाएं चाहिए जो फाइव स्टार होटल में हो। ऐसा इसलिए हुआ कि बाजार ने लोगों को इसे प्राप्त करने के लिए उकसाया। जिसके चलते लोग इस प्राप्त करने के लिए हर मुमकीन कोशिश करने लगा। इस दरम्यान वह अपने जीवन के बहुमूल्य रिश्तों को भुला दिया। अपेक्षाएं इतनी बढ़ गई कि उसकी पूर्ति नहीं होने से जीवन तनाव से भर गया। जीवन से मोहब्बत गायब हो गया।
 
वैलेंटाइन डे मनाइए, जरूर मनाइए। दिल का रिश्ता जोड़िए, जरूर जोड़िए। जो टिकाऊ हो, नाकि अगले वैलेंटाइन डे पर किसी और से रिश्ता जोड़ना पड़े। आज लोगों के पास अगर किसी चीज की कमी है तो वह है प्यार। इसकी भूख हर किसी को है। हर कोई इसे पाना चाहता है। जब से बाजार ने इसका अस्तित्व मिटा दिया, तब से इसकी बहुत कमी हो गई है। हर कोई मोहब्बत के लिए लालायित है। प्रेमी-प्रेमिका, पति-पत्नी, पिता-पुत्र, हर रिश्ते में मोहब्बत की कमी देखी गई है।

First Published: Monday, February 13, 2012, 17:37

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