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SC ने दया याचिका निपटारे पर जताई चिंता


नई दिल्ली : मौत की सजा का सामना कर रहे दोषियों की दया याचिकाओं पर फैसला करने में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से हो रही देर पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए उनसे ऐसे सभी मामलों के रिकार्ड मांगे हैं। न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की एक पीठ ने कहा कि सभी राज्यों के गृह सचिव अपने-अपने प्रदेशों की सभी दया याचिकाओं के मामले केंद्र को तीन दिन के अंदर भेजें, जिसके बाद केंद्र उसे इसके समक्ष पेश करेगा। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि राज्य सरकार की ओर से रिकार्ड नहीं भेजे जाते हैं तो जो कुछ भी होगा उसके जिम्मेदार वो खुद होंगे।
 
पीठ ने यह भी कहा कि यह बात सामने आई है कि दया याचिकाएं 11 साल बाद निपटाई जाती है, जो बहुत लंबा समय है। पीठ ने केंद्र से पूछा कि जब से दया याचिकाएं सक्षम प्राधिकार के पास पहुंची है उसके बाद से क्या किया गया?
 
न्यायालय ने यह सवाल पूछते हुए इस बात का भी जिक्र किया कि दया याचिका पर फैसला करने के एक मामले में उसे 11 साल का वक्त लगा, जबकि दूसरे मामले में फैसला करने में आठ साल का वक्त लगा। पीठ ने केंद्र सकार की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया कि दोषी कैदियों की ओर से बार-बार याचिकाएं दायर करने के चलते फैसले में देर हुई। हालांकि पीठ ने कहा कि दोबारा याचिका दायर करने पर कोई रोक नहीं है।
 
न्यायालय ने पंजाब के आतंकवादी देवेंदर पाल सिंह भुल्लर की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह कहा। राष्ट्रीय राजधानी में रायसीना रोड पर युवक कांग्रेस के कार्यालय के बाहर सितंबर 1993 में बम विस्फोट करने के आरोप में भुल्लर को मौत की सजा सुनाई गई थी। इस विस्फोट में नौ लोगों की मौत हो गई थी। भुल्लर ने अपील की थी कि उसकी मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया जाए क्योंकि उसकी दया याचिका पर फैसले में अत्यधिक देर हो चुकी है और वह मानसिक रूप से भी स्वस्थ नहीं है।
(एजेंसी)

First Published: Wednesday, February 22, 2012, 10:41

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