लव-जिहाद : समझो तो अमृत वरना जहर

By Pravin Kumar | Last Updated: Sunday, August 24, 2014 - 17:29
 
Pravin Kumar  

लव जिहाद को लेकर देश का सियासी पारा उफान पर है। उत्तर प्रदेश भाजपा की मथुरा के बृंदावन में दो दिवसीय बैठक में लव-जिहाद पर प्रस्ताव पारित करने की घोषणा और फिर उसपर यू-टर्न ने विपक्षी पार्टियों और मीडिया को बहस का एक विषय थमा दिया है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि लव-जिहाद शब्द को तूल देकर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में सियासी फायदा उठाना चाहती है। चूंकि इसका सीधा नुकसान समाजवादी पार्टी को होगा इसलिए मुलायम और अखिलेश परेशान हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तो उल्टे पत्रकारों से सवाल कर दिया कि जिस नगरी से लव-जिहाद का मुद्दा भाजपा ने उठाया है वहां की सांसद कौन हैं और उन्होंने फिल्म 'धर्मात्मा' में जो गाना गाया है उससे लव-जिहाद कम होगा या फिर और बढ़ेगा?

लव-जिहाद एक वास्तविकता है, लेकिन साथ ही लव और जिहाद दोनों विरोधाभासी भी हैं। लव कभी जिहाद नहीं हो सकता और जिहाद कभी लव नहीं हो सकता है। दरअसल लव-जिहाद कोई ऐसा शब्द नहीं जिसको सियासी जामा पहनाया जाए। यह बेहद गंभीर शब्द है और इसको कायदे से समझने की जरूरत है। जिसने इसका गूढ़ अर्थ समझ लिया उसके लिए यह अमृत और जिसने नहीं समझा उसके लिए जहर। जिस तरह से हम सब अपने बच्चों को सुरक्षित तरीके से सड़क पर चलना सिखाते हैं, उसी तरह से हमें अपने बच्चों को लव-जिहाद के यथार्थ से परिचित कराना होगा। लव-जिहाद में दो शब्द हैं। लव का मतलब होता है प्यार और जिहाद का मतलब होता है संघर्ष, जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद करना। भाजपा को इन शब्दों के अर्थ में शायद कोई रूचि नहीं है और सियासी ध्रुवीकरण में लगी है। निश्चित रूप से इसका स्याह पक्ष भी है, लेकिन उसको गंभीरता से समझकर उसका शांतिपूर्ण समाधान करने की जरूरत है।

दूसरा पक्ष यह कि जिस लव-जिहाद को लेकर केरल हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केरल के पुलिस महानिदेशक से प्रदेश में तेजी से हिन्दू लड़कियों के धर्म परिवर्तन और मुसलमानों के द्वारा हिन्दू लड़कियों के साथ निकाह के मामले की जांच के आदेश दिए हों, जिस लव जिहाद पर केरल के पूर्व वामपंथी मुख्यमंत्री अच्युतानंद ने विधानसभा में कहा हो कि सऊदी अरब से मुस्लिम युवकों को हिन्दू लड़कियों को वश में करने के लिए खूब पैसे आ रहे हैं, जिस लव जिहाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज राकेश वर्मा ने चिंता जताई हो, यूपी के डीजीपी को लव जिहाद के 22 मामले की जांच करके रिपोर्ट देने को कहा हो और उस लव जिहाद का अगर कोई समर्थन करता हो तो कहीं न कहीं यह जरूर लगने लगता है कि दाल में कुछ काला जरूर है।

लव-जिहाद की वास्तविकता से इनकार नहीं किया जा सकता है। कहते हैं कि यह केरल से आरंभ हुई है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि धार्मिक मामलों में केरल हिन्दुस्तान का सबसे सहिष्णू प्रदेश है। इस सहिष्णुता का फायदा उठाकर ईसाई और हिन्दू लड़कियों को मुस्लिम बनाने का जो तरीका अपनाया जा रहा है उसे लव-जिहाद की संज्ञा दी गई है। तरीका यह है कि मुस्लिम लड़के हिन्दू और ईसाई लड़कियों को जान बूझकर प्रेम-पाश में फंसाते हैं और शादी से पहले या फिर शादी के बाद उन लड़कियों का धर्म परिवर्तित करा दिया जाता है।

विश्व हिन्दू परिषद के नेता पिछले साल सितम्बर में हुए मुजफ्फरनगर दंगों के पीछे लव-जिहाद का हाथ होने की रट लगा रहे हैं। महाराष्ट्र में भी संघ से जुड़े संगठनों ने लव-जिहाद का मुकाबला करना शुरू किया है। यहां इसी साल विधानसभी के चुनाव होने हैं। भाजपा और हिन्दूवादी संगठनों की राय में लव-जिहाद का मतलब मुस्लिम लड़के हिन्दू लड़कियों को बहला-फुसलाकर पहले शादी करते हैं, फिर धर्म परिवर्तन कराकर लड़की को आतंकवादियों के हवाले कर देते हैं या फिर किसी और को बेच देते हैं। इस तरह की घटनाएं देश के कई राज्यों में घटित हो रही हैं, लेकिन इसको लव-जिहाद की संज्ञा नहीं दी जा सकती है। इस तरह की घटना तो हिन्दू लड़के और लड़की की शादी से भी तो पनप सकती हैं और घटनाएं हो भी रही हैं। जरूरत इस बात की है कि किसी भी संगठन को या फिर राज्य सरकारों के संज्ञान में ऐसी घटनाएं आती हैं तो उसे चिह्नित कर उसका सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया जाना चाहिए और उसका स्थायी हल ढूंढा जाना चाहिए।

यहां बड़ा सवाल यह भी उठता है कि आखिर मुस्लिम लड़कों में ऐसा क्या होता है जो हिन्दू लड़कियां उसके मोहपाश में फंस जाती हैं और शादी करने व धर्म परिवर्तन तक का फैसला कर लेती हैं। कुछ समाज विज्ञानियों का मानना है कि हिन्दू लड़कियां जानती हैं कि दुनिया में सिर्फ मुस्लिम कौम ही ऐसी है जो सबसे कम शराब पीती हैं क्योंकि धार्मिक रूप से उनपर सख्त पाबन्दी है, वे जानती हैं कि मुस्लिम कौम ही ऐसी कौम है जो सबसे कम मक्कारी करती है क्योंकि धार्मिक रूप से उन पर सख्त पाबन्दी है, वे यह भी जानती हैं कि मुस्लिम कौम ही ऐसी कौम है जो सच्चाई की खातिर अपनी जान भी कुर्बान कर सकती है। कहने का मतलब यह कि मुस्लिमों में धार्मिक कट्टरता ज्यादा होती है और धर्म के प्रति निष्ठा भी। हिन्दू धर्म उसके मुकाबले उदार है और हिन्दुओं में धर्म के प्रति निष्ठा भी उतनी नहीं होती जितना मुस्लिमों में। इसलिए मेरी दृष्टि में दुनियाभर में फैले हिन्दू संगठनों को हिन्दुओं में धर्म के प्रति कट्टरता का भाव जगाना होगा। यह कहने से काम नहीं चलेगा कि हिन्दुत्व जीवन जीने का एक तरीका है।

एक बात और, दक्षिण पंथियों की लव-जिहाद की बात सैद्धांतिक रूप से अपनी जगह सही हो सकती है, मगर लव-जिहाद के बाद जो कुछ होगा या हो सकता है उसकी कल्पना तो कीजिए। मुस्लिम लड़के का ससुराल हिन्दू होगा और पत्नी की तरफ के सारे रिश्तेदार भी हिन्दू होंगे। थोड़ी देर के लिए लड़की को यदि मुसलमान बना भी दिया जाता है तो जो बच्चे पैदा होंगे क्या वे जिहादी मानसिकता के हो सकते हैं? बच्चे के चाचा, ताऊ, दादा-दादी मुस्लिम हैं और मामा, मामी, मौसी, नाना-नानी, ममेरे-मौसेरे भाई हिन्दू। क्या ऐसा बच्चा किसी भी समुदाय से नफरत कर सकता है? इसके बाद तो खुद लव-जिहाद करने वाला की दिल परिवर्तित हो जाएगा।

एक्सक्लूसिव

First Published: Sunday, August 24, 2014 - 17:29


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