नवाज के लिए चुनौती है सीमा पर शांति

By Alok Kumar Rao | Last Updated: Saturday, June 14, 2014 - 19:57
 
Alok Kumar Rao  

पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार सुबह एक बार फिर संघर्षविराम का उल्लंघन किया। पाकिस्तान सेना नहीं चाहती कि दोनों देशों के संबंध सुधरे। इसलिए जब कभी भी पाकिस्तानी सेना को लगता है कि दोनों देश करीब आ सकते हैं या बातचीत के लिए सद्भावनापूर्ण माहौल बनता दिख रहा है तो वह उस माहौल को दूषित करने के लिए संघर्षविराम उल्लंघन अथवा ऐसी घटनाओं को अंजाम देती है जिससे तनाव का माहौल पनपे और सार्थक पहल की संभावना क्षीण हो जाए।

पाकिस्तानी सेना नहीं चाहती थी कि नवाज शरीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ-ग्रहण समारोह में शरीक हों। नवाज के भारत दौरे का पाकिस्तानी सेना ने विरोध भी किया लेकिन नवाज ने साहस का परिचय देते हुए सेना की राय नहीं मानी और भारत आने का फैसला किया। भारत आने का नवाज का यह साहसिक फैसला था। भारत भविष्य में नवाज से कुछ इसी तरह के फैसले की उम्मीद करेगा। नवाज हमेशा से यह कहते आए हैं कि वह भारत के साथ दोस्ताना संबंध रखना चाहते हैं। ऐसे में नवाज को उन सभी ताकतों पर नियंत्रण रखना होगी जो दोनों देशों के संबंधों को बिगाड़ने के लिए व्याकुल रहते हैं। द्विपक्षीय रिश्ता निभाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर ज्यादा है क्योंकि बातचीत के लिए इस्लामाबाद के एक कदम की तुलना में भारत हमेशा चार कदम आगे बढ़ते आया है।
 
यह भी ध्यान रखना होगा कि अप्रैल के अंत से लेकर मध्य मई तक नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन की 19 घटनाएं हो चुकी हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सीमा पर संघर्षविराम और घुसपैठ की घटनाएं और बढ़ेंगी। अफगानिस्तान से नाटो बलों की पूरी तरह वापसी के बाद वहां के जेहादी तत्वों को संभालना पाकिस्तानी सेना के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। पाकिस्तानी सेना जेहादी तत्वों की पूरी खेप कश्मीर घाटी की ओर मोड़ सकती है। इस पर भारत को पैनी नजर रखनी होगी। हेरात में भारतीय उच्चायोग के समीप हुआ हमला यह बताता है कि जेहादी तत्वों के निशाने पर भारतीय प्रतिष्ठान और भारतीय नागरिक हैं।

भारत की तरफ से पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि सीमा पार से घुसपैठ और संघर्षविराम उल्लंघन की घटनाएं पूरी तरह से बंद होनी चाहिए। तभी जाकर बातचीत का कोई मतलब होगा। भारती विरोधी गतिविधियां और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। नवाज शरीफ यह काम सेना, आईएसआई और कट्टरपंथी ताकतों पर नियंत्रण रखकर ही कर सकते हैं। क्योंकि भारत विरोधी गतिविधियों का सारा कुचक्र पाकिस्तानी सेना, खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां की कट्टरपंथी ताकतों की मिलीभगत से रचा जाता है। नवाज यदि वास्तव में भारत के साथ बेहतर रिश्ते चाहते हैं तो उन्हें इन ताकतों पर लगाम लगाना होगा। पाकिस्तानी पीएम को सीमा पर शांति का माहौल पैदा करना होगा कि जिससे भारत को यह लगे कि वह बातचीत के लिए गंभीर हैं।     

एक्सक्लूसिव

First Published: Saturday, June 14, 2014 - 19:55


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