अंतरिक्ष में भारत की लंबी 'उड़ान'

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की दुनिया में भारत के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। इस विशेष उपलब्धि पर पूरे देशवासियों को नाज है। नाज होना भी चाहिए क्‍योंकि भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी23 को सफलतापूर्वक लॉन्‍च कर समूचे दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया है। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में कुछ गिने चुने की ही बादशाहत अब तक कायम थी, लेकिन इस बार के प्रक्षेपण में दुनिया के पांच प्रमुख देशों के उपग्रहों को भी इस यान के साथ सफलतापूर्वक रवाना कर भारतीय वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया कि वे भी दुनिया में किसी से कम नहीं हैं।

| अंतिम अपडेट: Jun 30, 2014, 09:30 PM IST

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की दुनिया में भारत के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। इस विशेष उपलब्धि पर पूरे देशवासियों को नाज है। नाज होना भी चाहिए क्‍योंकि भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी23 को सफलतापूर्वक लॉन्‍च कर समूचे दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया है। अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में कुछ गिने चुने की ही बादशाहत अब तक कायम थी, लेकिन इस बार के प्रक्षेपण में दुनिया के पांच प्रमुख देशों के उपग्रहों को भी इस यान के साथ सफलतापूर्वक रवाना कर भारतीय वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया कि वे भी दुनिया में किसी से कम नहीं हैं। इस अभूतपूर्व सफलता के बाद वैश्विक बिरादरी में भारत का कद निश्चित तौर पर बढ़ा है। साथ ही कुछ साल पहले तक इस क्षेत्र में विदेशों के ऊपर निर्भरता को लगभग खत्‍म करके वह कीर्तिमान स्‍थापित किया है, जिसका हर देशवासियों को बेसब्री से इंतजार था।  

भारत ने अपने नाम एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए एक स्वदेशी रॉकेट के जरिए पांच विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया। इस उपलब्धि से उत्‍साहित होकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भारतीय वैज्ञानिकों से दक्षेस उपग्रह का विकास करने को लेकर कह बैठे। पीएम के इस वक्‍तव्‍य के पीछे आशय यह था कि पड़ोसी राष्ट्रों को ‘उपहार’ के तौर पर इसे आने वाले समय में समर्पित किया जा सके। साथ ही यह मंतव्‍य भी हो सकता है कि क्षेत्रीय एकता को बनाए रखने के लिए दक्षेस के देशों को वह तकनीक और प्रौद्योगिकी मुहैया करवाना है, जिससे वह अब तक वंचित हैं। यह प्रधानमंत्री की दूरगामी सोच को प्रदर्शित करता है, जिसका भविष्‍य में काफी सकारात्‍मक परिणाम सामने आएंगे।  

श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक रॉकेट को छोड़े जाने के महत्वपूर्ण क्षण का गवाह लगभग हर देशवासी बना। इन्‍हें मानों वह खुशियां मिली जो उनके लिए किसी व्‍यक्तिगत उपलब्धि से कम नहीं था। इसरो के वैज्ञानिकों ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी23 के साथ पांच देशों के उपग्रहों को प्रक्षेपण के कुछ ही समय के भीतर एक-एक करके उन कक्षाओं में स्थापित कर दिया जहां इन्हें भेजे जाने का लक्ष्य रखा गया था। इस घटना से यह साबित होता है कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत अब दुनिया के कुछ नामचीन देशों के साथ बराबरी पर आ खड़ा हुआ है।

अंतरिक्ष में पीएसएलवी-सी23 के साथ जो पांच उपग्रह भेजे गए हैं, उनमें फ्रांस का 714 किलोग्राम का भू अवलोकन उपग्रह स्पोत-7 प्रमुख है। इसके अलावा जर्मनी का ‘एसैट’, कनाडा के एनएलएस7.1 और एनएलएस 7.2 और सिंगापुर के उपग्रह वेलोक्स-1 को प्रक्षेपित किया गया।

इस महत्‍वपूर्ण क्षण के गवाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बने। उन्‍होंने इसरो के अभियान नियंत्रण कक्ष से प्रक्षेपण के पूरे घटनाक्रम को बारीकी से देखा। बाद में मोदी ने उत्‍साहित होकर वैज्ञानिकों से उपग्रह कूटनीति का आह्वान किया। दक्षेस उपग्रह के विकास की अपील के पीछे भारत के पड़ोसी देशों के हित की भी बात छिपी थी।

अंतरिक्ष कार्यक्रम और इससे जुड़े वैज्ञानिक भूरि-भूरि प्रशंसा के पात्र हैं। इस महान उपलब्धि और निरंतर आगे बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम के बाद भारत 5-6 देशों के विशिष्ठ वैश्विक समूह में आ पहुंचा है। वैज्ञानिकों की टीम की बदौलत अंतरिक्ष विज्ञान में यह असाधारण प्रदर्शन है जो उत्कृष्टता हासिल कर भारत को अंतरराष्ट्रीय जगत में प्रतिस्पर्धा में ला खड़ा किया है।

इस अंतरिक्ष कार्यक्रम के चलते भारत कुलीन वैश्विक समूह में पहुंच गया है। इसरो और वैज्ञानिकों की टीम को अब इससे आगे देखना चाहिए ताकि भारी उपग्रहों की दिशा में हम सफलतापूर्वक और आगे बढ़ सकें। भविष्‍य की पीढि़यों के लिए आज का यह वैज्ञानिक देन सफलता का वह अवसर मुहैया करवाएगा जो अभी तक केवल कुछ विकसित देशों में ही उपलब्‍ध है। इसमें अब कोई संशय नहीं है कि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने आधुनिक प्रौद्योगिकी के सर्वाधिक जटिल क्षेत्रों में से एक में हमें वैश्विक दिग्गजों में से एक बना दिया है। हर भारतवासी को इस पर गर्व होना चाहिए।

इसरो के खाते में तो पहले भी कई उपलब्धियां जुड़ी हैं। इसरो ने अब तक 19 देशों के 35 उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है। इस कदम से देश के पास काफी विदेशी मुद्रा आई है, जो भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के लिए काफी सकारात्‍मक संदेश है। अभी तक जिन देशों के उपग्रहों को इसरो ने अपने बलबूते भेजा है, उसमें अल्जीरिया, अर्जेंटीना, आस्ट्रिया, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इजरायल, इटली, जापान, कोरिया, लक्जमबर्ग, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, तुर्की, ब्रिटेन आदि शामिल हैं।

पांच देशों के यह उपग्रह इसरो की वाणिज्यिक व्यवस्था के तहत प्रक्षेपित किए गए। इस विशेष प्रक्षेपण के बाद इसरो की साख बढ़ी है। अभी से ही यह संभावना बनने लगी है कि दुनिया के और देश भविष्‍य में भारत के साथ अपने अंतरिक्ष अभियान को गति देंगे। भारत की अंतरिक्ष क्षमता में इजाफा होने के साथ साथ इस क्षेत्र में साख भी बढ़ी है। गौर करें कि किसी भी मामले में साख बड़ी बात होती है।

इस सफल प्रक्षेपण के लिए अंतरिक्ष वैज्ञानिक बधाई के पात्र हैं और इससे हर भारतीय आनंदित और गौरवान्वित हुआ। इस सफलता ने हर भारतीय का दिल गर्व से भर दिया। पीएसएलवी सी-23 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो की पूरी टीम को फिर से बधाई।