मोदी सरकार के बजट से होगा ‘अच्छे दिन ’ का दीदार !

By Ramanuj Singh | Last Updated: Monday, July 7, 2014 - 18:19
मोदी सरकार के बजट से होगा ‘अच्छे दिन ’ का दीदार !

रामानुज सिंह
 
मोदी सरकार के ‘अच्छे दिन’ वाला बजट संसद में पेश होने वाला है। ऐसा माना जा रहा है कि इस बजट से लोगों की उम्मीदों में चार चांद लगेंगे, देश में चारों ओर खुशहाली और तरक्की का दीदार होगा! मोदी के वित्तमंत्री अरूण जेटली से देश के हर तबके को काफी आशाएं हैं। उद्योगों और वेतनभोगियों के लिए टैक्स में छूट, ट्रांसपोर्ट भत्ते में बढ़ोतरी, होम लोन में छूट, छात्रों को आसान लोन, किसानों की सब्सिटी में बढ़ोतरी, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स छूट में वृद्धि। इन सभी उम्मीदों को लेकर वित्त मंत्री के बजट पर लोगों का ध्यान लगा हुआ है।

बेतहाशा बढ़ती महंगाई को देखते हुए मौजूदा कर मुक्त आय स्लैब नाकाफी है। वर्तमान में 2 लाख रुपए की आय पर छूट है जो कम से कम 3 लाख तक किया जाना चाहिए। महिलाओं के लिए यह स्लैब 3.5 लाख तक होना चाहिए। इससे आम लोगों की क्रयशक्ति बढ़ेगी।

वर्तमान में धारा 80(सी) के तहत कटौती, जो बचत पर टैक्स छूट अधिकतम एक लाख रूपए तक देता है। इस सीमा को बढ़ाकर तीन लाख रुपए तक किया जाना चाहिए ताकि बचत को और प्रोत्साहान मिल सके।

फिछली सरकार ने घोषणा की थी कि बैंक बचत खाते (पोस्ट ऑफिस, कोपरेटिव बैंक, बैंक खाता) पर 10 हजार रुपए तक टैक्स नहीं लगेगा। बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह सीमा बढ़ाकर 20 हजार रुपए किया जाना चाहिए।

कर्मचारियों के कंपनियों द्वारा घर से ऑफिस जाने के लिए वाहन भत्ता के रूप में अब तक 800 रूपए प्रति माह टैक्स फ्री दिया जाता है। यह सीमा करीब एक दशक पहले तय की गई थी। अब इसमें सुधार की आवश्यकता है इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 3000 रूपए किया जाना चाहिए।

मेडिकल खर्च में कटौती, जो वर्तमान में 15000 रुपए प्रति वर्ष के स्तर पर बना हुआ है। जिसे बढ़ाकर 50000 रूपए किया जाना चाहिए। जिसमें 15 साल से संशोधन नहीं किया गया है। तब से मेडिकल पर खर्च कई गुना बढ़ गया है।

कर्मचारियों को प्रतिमाह दिया जाने वाला प्रति बच्चा शिक्षा भत्ता में बढ़ा जाना चाहिए। वर्तमान में प्रति बच्चा 100 रुपए दिया जाता है। महंगाई को देखते हुए इसे कम से कम 1000 रुपए किया जाना चाहिए।

कुछ समय से रियल्टी क्षेत्र बेहतर नहीं कर रहा है इसलिए सरकार को इस सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश करना चाहिए। जो अर्थव्यवस्था को और मजबूती देगा। वर्तमान में ब्याज भुगतान में 1.5 लाख रूपए तक छूट है। जिस बढ़ाकर 3 लाख रूपए किया जाना चाहिए।

प्रमुख लोन राशि के लिए अभी बहुत व्यापक सेक्शन है जिसके लिए एक अलग प्रावधान किया जाना चाहिए। जिसे वर्तमान धारा 80 सी में शामिल किया जाना चाहिए। (जिसके अंतर्गत समावेशी अधिकतम सीमा एक लाख रुपए है)

सरकार को राजीव गांधी बचत योजना को संशोधित करना चाहिए और आगामी बजट में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए बेहतर इक्विटी बचत योजना लाना चाहिए। राजीव गांधी बचत योजाना 2012-13 में घोषणा की गई थी। उसमें पहली बार शेयर बाजार में निवेश करने वालों को टैक्स लाभ दिया जाना चाहिए।
 
टैक्स छूट में महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को और अधिक टैक्स छूट देना चाहिए। कर्मचारियों के पीएफ फंड पर ब्याज बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया जाना चाहिए। वर्तमान में वरिष्ठ नागरिकों की 2,50,000 की आय टैक्स के दायरे में नहीं आता है। इस में बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

उसी तरह, 80 साल के अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए जिनकी 5 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं लगता है। उसे सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। वर्तमान में महिलाओं की दो लाख तक की आय पर टैक्स नहीं लगता है। सामान्य कटैगरी में यह सीमा कम से कम 50,000 रुपए और बढ़ाए जाने चाहिए।

वित्त मंत्री की घोषणाओं पर सबसे अधिक निगाहें गृहणियों की हैं। अरूण जेटली के महत्वपूर्ण घोषणाओं से जो भी सस्ता या महंगा होगा उसका साधा असर भारतीय गृहणियों पर पड़ेगा। जो किचन के बजट बनती हैं। आवश्यक वस्तुओं की कीमत बढ़ने से गृहणियों के किचन का बजट बिगड़ गया है। सरकार के बजट घोषणाओं से खद्य पदार्थों की कीमत कम होने से किचन का बजट पुन: पटरी पर लौट सकता है।

छात्रों को उच्च व्याज दर पर लोन लेना पड़ता है। भारत में शिक्षा लोन से कार लोन लेना ज्यादा आसान है। इतना ही नहीं, शिक्षा लोन पर ब्याज दर भी अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग होता है। उच्च ब्याज दर पर शिक्षा लोन छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में रोड़ा का काम करता है। सरकार को छात्रों के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि छात्र देश का भविष्य है। इसलिए शिक्षा लोन पर ब्याज दर कम किया जाना चाहिए।  

वित्त मंत्री अरूण जेटली के बजट से किसानों काफी उम्मीदें हैं। किसानों को उम्मीद है कि वित्त मंत्री फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य की इतनी वृद्धि करेंगे जो उत्पादन लागत से ज्यादा हो, जिससे बचत भी हासिल किया जा सके। इसके अलावे किसान चाहते हैं कि सरकारी संस्थानों और बैंको से क्रेडिट आसान हो।

बुनियादी ढ़ाचों का विकास, मुफ्त या अधिक रियायती बिजली, बेहतर सिंचाई सुविधा, अपव्यय को रोकने के लिए कोल्ड स्टोरेज की बेहतर प्रणाली और ग्रमीण परिवहण में सुधार। इसके अलावे किसान वर्ग को उम्मीद है. वित्त मंत्री आधुनिक कृषि को और मजबूत करने के लिए अत्यधिक धन का आवंटन करेंगे।  

 

एक्सक्लूसिव

First Published: Monday, July 7, 2014 - 16:26


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