ग्रामीण मजदूरों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में घटी

खेतिहर और ग्रामीण मजदूरों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति इस बार फरवरी में घटकर क्रमश: 8.14 प्रतिशत और 8.27 प्रतिशत रह गई।

अंतिम अपडेट: Mar 21, 2014, 02:55 PM IST

नई दिल्ली : खेतिहर और ग्रामीण मजदूरों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति इस बार फरवरी में घटकर क्रमश: 8.14 प्रतिशत और 8.27 प्रतिशत रह गई। जनवरी में यह क्रमश: 9.08 प्रतिशत और 9.21 प्रतिशत थी। इस दौरान खास कर खाद्य उत्पादों की कीमत घटी है।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘ सीपीआई-एलएल (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-खेतिहर मजदूर) और सीपीआई-आरएल (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-ग्रामीण कामगार) पर आधारित मुद्रास्फीति फरवरी 2014 में घटकर क्रमश: 8.14 प्रतिशत और 8.27 प्रतिशत रह गई जो जनवरी 2014 में 9.08 प्रतिशत और 9.21 प्रतिशत थी। विज्ञप्ति में कहा गया कि खुदरा मूल्य सूचकांक-खेतिहर मजदूर (सीपीआई-एएल) और खुदरा मूल्य सूचकांक-ग्रामीण कामगार (सीपीआई-आरएल) के आधार पर खाद्य मुद्रास्फीतिर फरवरी के दौरान मुद्रास्फीति कृषि और ग्रामीण मजदूरों के लिए क्रमश 6.85 6.99 प्रतिशत थी।
फरवरी 2014 के दौरान अखिल भारतीय सीपीआई-एएल और सीपीआई-आरएल सूचकांक क्रमश: 757 अंक और 759 अंक पर स्थिर बने रहे। खेतिहर मजदूरों के लिए खुदरा मूल्य सूचकांक में 11 राज्यों में 2 से 9 अंकों की वृद्धि हुई । आठ राज्यों में इसमें एक से नौ अंकों के बीच गिरावट दर्ज हुई। हरियाणा में यह सूचकांक सबसे अधिक 843 अंक रहा जबकि हिमाचल प्रदेश में मूल्य सूचकांक 623 अंक था।
ग्रामीण कामगारों के मामले में सूचकांक 12 राज्यों में 1 से 7 अंक बढ़ा जबकि आठ राज्यों में 1 से 8 अंकों की गिरा। इसमें भी हरियाणा 836 अंकों के साथ सबसे उपर और हिमाचल प्रदेश 656 अंक के साथ निम्नतम स्तर पर रहा। खेतिहर और ग्रामीण मजदूरों के सूचकांक में राजस्थान में सबसे अधिक क्रमश: 9 अंक और 7 अंक की बढ़ोतरी दर्ज हुई।
ऐसा मुख्य तौर पर गेहूं, बाजरा, दाल, दूध, तिल का तेल, दूध, घी, सब्जी-फल, चीनी, कपास मिल, प्लास्टिक के जूते और साबुन की कीमत बढ़ोतरी के कारण हुआ। (एजेंसी )