झारखंड में आतंकी मॉड्यूल का सुराग

Last Updated: Friday, November 1, 2013 - 23:53

क्राइम रिपोर्टर/ज़ी मीडिया
पटना में हुए सीरियल धमाके ने इंडियन मुजाहिदीन के उस मॉड्यूल को अचानक ही चर्चित कर दिया जिसके बारे में अब तक खुफिया एजेंसियों को थोड़ा भी सुराग नहीं था। दहशतगर्दों ने गुपचुप तरीके से झारखंड में अपना स्लीपर सेल तैयार कर लिया था और इन स्लीपर सेल्स की संख्या भी कोई एक या दो नहीं थी। धमाके के बाद सिर्फ छह दिनों में ही इंडियन मुजाहिदीन के पांच ठिकानों का पता चल चुका है।
मजहबी प्रचार के नाम पर इन ठिकानों में भोले-भाले और मासूम युवकों के दिलो दिमाग में नफरत और जिहाद का जहर भरने का काम होता था। झारखंड के अनजान समझे जाने वाले कस्बों और छोटे से शहरों में आतंक के आकाओं की मीटिंग होती थी और इनमें देश को दहलाने का प्लान बनता था। यहां तैयार किया जाता था इंडियन मुजाहिदीन का नया टेरर प्लान और यहीं आत्मघाती दस्ते तैयार करने की भी होती थी तैयारी, लेकिन दहशतगर्दों के इन ठिकानों की अब सुरक्षा एजेंसियों को भी जानकारी मिल गई है।
धमाकों के मास्टरमाइंड की एक छोटी सी चूक से सुरक्षा एजेंसियों को पता चल गया है झारखंड मॉड्यूल का पूरा सच और वो चूक थी सिर्फ ढाई घंटे में 52 कॉल करने की। इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी और पटना धमाके का मास्टर माइंड तहसीन अख्तर फरार जरूर हो गया है लेकिन एनआईए को पता चला है कि उसने अपने साथी हैदर के साथ मिलकर झारखंड में कम से कम छह जगहों पर स्लीपर सेल तैयार कर लिया था। पटना धमाकों का लिंक इन सभी जगहों से मिल रहा है। पटना में धमाके के बाद सामने आया झारखंड में इंडियन मुजाहिदीन के ठिकानों का पता।
रांची, जमशेदपुर, लोहरदगा, सिमडेगा, हजारीबाग और लोहरदगा इन छह शहरों में से सिर्फ रांची और जमशेदपुर झारखंड के प्रमुख शहर हैं लेकिन अब देश की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां पटना ब्लास्ट केस के सिलसिले में इन सभी जगहों पर तलाश रही हैं इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों का ठिकाना। रांची में पकड़े गये इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी उजैर अहमद से जो जानकारियां जांच एजेंसियों को मिल रही हैं उसके मुताबिक झारखंड के इन शहरों में दहशतगर्दों की अलग-अलग एजेंसियां लंबे समय से सक्रिय रही हैं।
बताते हैं कि दहशतगर्दों ने यहां पर काम की शुरुआत मजहबी तौर तरीके का पाठ सिखाने से की और फिर धीरे-धीरे युवकों का ब्रेन वाश कर उन्हें दहशतगर्दी की ओर मोड़ दिया। बताया जा रहा है कि यासीन भटकल ने अपनी गिरफ्तारी के पहले ही तहसीन को झारखंड और छत्तीसगढ़ में स्लीपर सेल्स तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। तहसीन को इस काम में हैदर नाम के आतंकी का साथ मिल रहा था। पटना ब्लास्ट के सिलसिले में भी जांच एजेंसियां हैदर नाम के इस आतंकी की तलाश कर रही हैं और फिलहाल ये फरार बताया जा रहा है कि धर्म के नाम पर आतंक की ट्रेनिंग हो रही थी।
जानकारों के मुताबिक तहसीन के कहने पर हैदर झारखंड के अलग अलग शहरों में धर्म प्रचार के नाम पर जाता था और लोगों को दीन का पाठ पढ़ाने के नाम पर युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाता था। बताया जा रहा है कि पटना धमाके के सिलसिले में पकड़े गये इम्तियाज ने भी पूछताछ के दौरान इस बात की तस्दीक की है कि मजहबी शिक्षा देने के बहाने ही उसे दहशतगर्दी का पाठ पढ़ाया गया था। यहां तक कि पटना ब्लास्ट के सिलसिले में पकड़े गये उजैर अहमद की पत्नी का भी यही कहना है कि हैदर नाम का आतंकी उसके घर पढ़ाने के लिए आया करता था। साफ है कि इंडियन मुजाहिदीन ने लंबी तैयारी करने के बाद बड़े ही शातिर अंदाज में झारखंड के इन इलाकों में अपना स्लीपर सेल तैयार किया है।
खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पकड़े गये आतंकियों से पूछताछ के बाद सूबे के कुछ और जगहों पर भी आतंकियों का ठिकाना होने की बात सामने आ सकती है। रांची में इंडियन मुजाहिदीन का ठिकाना तैयार करने की जिम्मेदारी तहसीन ने हैदर को सौंपी थी। लोगों को मजहबी तौर तरीकों का पाठ पढ़ाने के नाम पर इस आतंकी ने पहले लोगों के घर तक पहुंच बनाई और फिर कुछ ही दिनों में इसने कई लोगों को आतंक का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया।
पटना धमाके के सिलसिले में गिरफ्तार उजैर अहमद रांची में डोरंडा का मनिटोला मोहल्ला स्थित अपने घर में रहता था। मोहल्ले में उजैर की पहचान एक ऐसे शख्स की थी जिसे अपने काम के अलावा मजहब की सेवा के अलावा और किसी चीज से मतलब नहीं था। लेकिन पटना में हुए धमाके के बाद जांच एजेंसियों ने जब धमाके के मास्टरमाइंड तहसीन के फोन कॉल की जांच शुरू की तो पता चला कि उसने ढ़ाई घंटे में सिर्फ एक ही शख्स को 52 कॉल किये थे यानी करीब-करीब हर तीन मिनट के अंतराल पर ये कॉल किये गये थे। जब जांच एजेंसियों ने उस शख्स के बारे में पता किया तो पता चला कि वो रांची के एक अखबार में काम करने वाला इलेक्ट्रिकल इजीनियर उजैर अहमद था।
ये जानकारी मिलने के बाद एनआईए के हाथ उजैर तक आसानी से पहुंच गये और एक बार उजैर पर शिकंजा कसने के साथ ही सामने आने लगा आतंकी साजिश का एक-एक राज़। उजैर के मुताबिक वह इंडियन मुजाहिदीन के संपर्क में हैदर नाम के एक शख्स के जरिये आया था। उजैर मनिटोला मोहल्ले में बनी उर्दू लाइब्रेरी में हमेशा ही जाया करता था। वहीं पर हैदर के बच्चों को दीनी शिक्षा दिया करता था। अपने मजहबी रुझान की वजह से उजैर भी हैदर का करीबी बन गया और फिर शुरू हुई उसकी जेहादी शिक्षा। हालांकि उसके घरवालों का अभी भी यही कहना है कि उजैर पूरी तरह से निर्दोष है और अगर उसका हाथ धमाके में मिलता है तो उसे फांसी पर चढ़ा देना चाहिए।
जानकारों का मानना है कि खुफिया एजेंसियों ने कुछ दिन पहले ही नक्सलियों के साथ आतंकवादियों के गठजोड़ की बात का खुलासा किया था। खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों की मानें तो इंडियन मुजाहिदीन पूरे झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों में गरीब युवकों को जोड़ने का काम कर रहा है। उसे झारखंड में सक्रिय नक्सली संगठनों से मदद मिलने की बात का भी खुलासा हो चुका है। ये गठजोड़ आने वाले खतरों का साफ संकेत देता है।
बताया जा रहा है कि यासीन भटकल गिरफ्तारी के बाद कराची में किसी सुरक्षित जगह पर बैठा रियाज भटकल ज्यादा सक्रिय हो गया है और उसके इशारे पर ही पूर्वांचल के इलाकों में इंडियन मुजाहिदीन का नेटवर्क अब तेजी से टेरर प्लान को अंजाम देने की कोशिश में जुट गया है। बताया जा रहा है कि रियाज की पहल पर ही तहसीन ने पटना ब्लास्ट की पूरी साजिश तैयार की थी। माना जाता है कि पूर्वांचल से सटी भारत-नेपाल की 1751 किलोमीटर खुली सीमा आतंकवादियों के भारत में दाखिल होने के लिए सबसे सुरक्षित है। यही वजह है कि इंडियन मुजाहिदीन दक्षिण भारत के बजाय फिलहाल इस इलाके को तरजीह देने में लगा है ताकि एक बार भारत की सीमा में दाखिल होने के बाद आतंकी आसानी से किसी सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच जाएं।



First Published: Friday, November 1, 2013 - 23:51


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