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Thursday, May 24, 2012 
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‘जीओएम ने नहीं की आचार संहिता पर चर्चा’


नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि भ्रष्टाचार पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की बैठक में निर्वाचन आयोग के दायरे से आदर्श चुनाव आचार संहिता को बाहर करने के प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई। जीओएम की बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी. नारायणसामी ने पत्रकारों से कहा कि मंत्रियों के समूह ने आदर्श चुनाव आचार संहिता पर चर्चा नहीं की क्योंकि यह उनसे संबंधित नहीं है।
 
गौर हो कि मीडिया में मंगलवार को आई रिपोर्टों में कहा गया कि सरकार दबे पांव निर्वाचन आयोग की कार्यकारी शक्तियों को वैधानिक दर्जा देने की तैयारी में है। इन रपटों के बाद विपक्ष ने सरकार के इस कदम का विरोध किया। वहीं, सरकार का बचाव करते हुए नारायणसामी ने कहा कि फिर भी चुनाव सुधारों पर सलाह जीओएम के समक्ष आएंगे लेकिन आयोग को उसकी कार्यकारी शक्तियों से अलग करना जीओएम से संबंधित नहीं है।
 
चुनाव आयोग के अधिकारों में कटौती किए जाने के कथित कदम से उठे विवाद के बीच हुई बैठक में सार्वजनिक खरीद विधेयक और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर एक समिति की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद कार्मिक राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि आचार संहिता को लेकर कुछ विवाद पैदा हो गया और उनके मंत्रालय द्वारा इनकार किए जाने के बाद भी कुछ भ्रम बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहूंगा कि भ्रष्टाचार संबंधी मंत्रियों के समूह के कार्यक्षेत्र में आदर्श आचार संहिता नहीं है। ऐसे में आज हुई बैठक में इस पर चर्चा नहीं की गई।
 
नारायणसामी ने कहा कि इसलिए, आचार संहिता पर आज चर्चा हुई, इसका सवाल ही नहीं उठता, यह मीडिया की उपज है। उन्होंने कहा कि बैठक में खरीदारी विधेयक सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार पर जीओएम के अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी हैं। समूह में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम, केंद्रीय संचार मंत्री कपिल सिब्बल और केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद सदस्य के रूप में शामिल हैं। नारायणसामी ने कहा कि ऐसे में मंत्रियों के समूह की बैठक में आदर्श आचार संहिता के मुद्दे पर चर्चा होने का सवाल ही नहीं उठता। यह पूछे जाने पर कि मंत्रियों के समूह के सदस्यों के बीच वितरित नोट में स्पष्ट रूप से आदर्श आचार संहिता का जिक्र किया गया था, मंत्री ने कहा कि विचार विमर्श के समय सुझाव आते हैं।
 
उन्होंने कहा कि सुझाव आए होंगे। लेकिन यह कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं है। कई सुझाव आएंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। चुनाव आयोग के अधिकारों में कटौती की रिपोर्ट को लेकर नया विवाद शुरू हो गया हालांकि सरकार ने इसे पूरी तरह शरारतपूर्ण बताया। हालांकि सरकार ने कहा कि अगर राजनीतिक दल चाहेंगे तो चुनाव सुधारों के हिस्से के रूप में इस पर चर्चा हो सकती है। भ्रष्टाचार पर गठित मंत्रियों के समूह में शामिल प्रणब मुखर्जी, कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद के साथ ही कार्मिक विभाग ने भी इस बात से इनकार किया था कि आदर्श आचार संहिता को वैधानिक दर्जा देकर चुनाव आयोग के अधिकारों में कटौती का कोई प्रस्ताव है। कार्मिक विभाग ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा था कि रिपोर्ट की सामग्री पूरी तरह शरारतपूर्ण है और सरकार या मंत्रियों का समूह ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा।
 
मंत्रियों के समूह के लिए कार्मिक विभाग के एक नोट में हालांकि इस मुद्दे का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि विधायी विभाग उन पहलुओं पर विचार कर सकता है जहां चुनाव आयोग के कार्यकारी निर्देशों को वैधानिक रूप देने की जरूरत है। इसमें कहा गया कि मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष वित्त मंत्री मुखर्जी का मानना था कि विकास परियोजनाओं में व्यवधान डालने के लिए आदर्श आचार संहिता भी एक प्रमुख बहाना है। इसके साथ ही मुखर्जी मुद्दे को एजेंडा पत्र में शामिल करने और इस मुद्दे को उठाने के कानून मंत्रालय के अनुरोध पर सहमत थे।
(एजेंसी)

First Published: Wednesday, February 22, 2012, 12:48

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