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NCTC पर केंद्र का साथ दे राज्य: पीएम

Saturday, May 05, 2012, 03:28
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ज़ी न्यूज ब्यूरो/एजेंसी
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रस्तावित राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (एनसीटीसी) का बचाव करते हुए शनिवार को कहा कि आतंकवाद निरोधी यह केंद्र राज्यों की आतंकवाद निरोधी क्षमताओं को बढ़ाएगा न कि उन्हें कमजोर करेगा। मनमोहन सिंह ने विवादास्पद एनसीटीसी पर मुख्यमंत्रियों की एक बैठक में कहा, राज्यों और केंद्र सरकार के बीच अधिकारों के वितरण को प्रभावित करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।
 
सिंह ने कहा, एनसीटीसी की स्थापना का मकसद देशभर में आतंकवाद निरोधी प्रयासों को समन्वित करना है। एनसीटीसी राज्यों की आतंकवाद निरोधी क्षमताओं को बढ़ाएगा, उन्हें कमजोर नहीं करेगा।
 
मनमोहन सिंह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई मुख्यमंत्रियों की आशंकाओं को दूर करने की कोशिश करते हुए कहा, यह राज्य बनाम केंद्र का मुद्दा नहीं है।
 
प्रधानमंत्री ने दिनभर चलने वाली इस बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा, एनसीटीसी को आतंकवाद के खात्मे की हमारी सामूहिक कोशिशों का एक वाहक होना चाहिए। आतंकवाद हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक खतरा है। इस काम को न तो अकेले केंद्र पूरा कर सकता है और न राज्य ही।
 
राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र (एनसीटीसी) के गठन की वकालत करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आज कहा कि आतंकवादी सीमाओं को नहीं मानते। देश को सुरक्षित बनाने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा।
 
प्रस्तावित एनसीटीसी को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में चिदंबरम ने कहा कि आतंकवादी देशों या राज्यों की सीमाओं को नहीं मानते और आतंकवादी खतरा अब भौगोलिक सीमाओं से आगे नये आयाम बना रहा है।
 
उन्होंने कहा, हमें मिलकर काम करना होगा। साथ मिलकर। राज्य सरकारें और केन्द्र सरकार को मिलकर काम करना होगा। विपक्ष और सत्तापक्ष को मिलकर काम करना होगा। सामाजिक संगठनों और सरकारी संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा। मुझे यकीन है कि हम देश को सुरक्षित बना सकते हैं। गृहमंत्री ने कहा कि एनसीटीसी सुरक्षा के नये स्वरूप का महत्वपूर्ण स्तंभ होगा। संविधान के तहत आतंकवाद से मुकाबला केन्द्र और राज्य सरकारों की साझा जिम्मेदारी है।
 
उन्होंने कहा, कई आतंकवादी संगठनों की उपस्थिति कई देशों में है और वे सीमाओं से परे आतंकवादी वारदात करने में सक्षम हैं। आतंकवाद से निपटने के लिए मानव संसाधन ही काफी नहीं होगा बल्कि इस लडाई में प्रौद्योगिकी महत्वपूर्ण हथियार है।
 
गृह मंत्री ने कहा कि देश की 7516 किलोमीटर की तटीय सीमा है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, चीन, बांग्लादेश और म्यांमार के साथ लगभग 15106 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा है। उन्होंने कहा कि राज्य की आतंकवाद रोधी ताकतों को अनिवार्य रूप से केन्द्र सरकार की एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना होगा। विशेष तौर पर तब, जब खतरा हवाई, समुद्र और अंतरिक्ष के रास्ते हो।
 
आतंकवाद के खतरे के नये आयाम का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा कि सुरक्षाबलों ने अब तक केवल भौगोलिक क्षेत्रों में आतंकवाद के खतरों का मुकाबला किया है लेकिन अब आतंकवादी खतरा साइबर जगत में भी है जो समुद्र, हवाई, अंतरिक्ष और भूमि की ओर से होने वाले खतरों के बाद पांचवा आयाम है।
 
उन्होंने कहा कि हमारे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का अधिकांश हिस्सा साइबर जगत में है। हैकिंग, वित्तीय धोखाधडी, आंकडों की चोरी, जासूसी जैसे साइबर अपराध कुछ मामलों में आतंकवादी वारदात की तरह होंगे। गृह मंत्री ने कहा, हमारी आतंकवाद रोधी क्षमता साइबर जगत के खतरों से निपटने में सक्षम होनी चाहिए। साइबर जगत में चूंकि सीमाएं नहीं हैं, ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकारों को साइबर जगत में खतरों से निपटने की जिम्मेदारी साझा करनी होगी। उन्होंने अमेरिका सहित अन्य देशों को एनसीटीसी के जरिए हुए अनुभवों और फायदों का जिक्र किया।


First Published: Saturday, May 05, 2012, 19:23

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