तेजी से वजन घटाने के लिए भूरी वसा पर नजर रखें

अगर आप तेजी से वजन घटाना चाहते हैं, तो सामान्य सफेद वसा के बदले भूरी वसा पर अपना ध्यान केंद्रित कीजिए। शोधकर्ताओं के मुताबिक, भूरी (ब्राउन) वसा उपापचय (मेटाबॉलिज्म) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अमेरिका के मैसाचुएट्स स्थित बेथ इजरायल डिकोनेस मेडिकल सेंटर (बीआईडीएमसी) के शोधार्थी इवान रोजेन ने कहा, ‘यदि हम इन वसा कोशिकाओं की संख्या या गतिविधि को नियंत्रित कर पाएं, तो हम शरीर से अतिरिक्त कैलोरी को कम कर सकते हैं।’

भाषा | अंतिम अपडेट: Jul 7, 2014, 12:50 PM IST
तेजी से वजन घटाने के लिए भूरी वसा पर नजर रखें

न्यूयॉर्क: अगर आप तेजी से वजन घटाना चाहते हैं, तो सामान्य सफेद वसा के बदले भूरी वसा पर अपना ध्यान केंद्रित कीजिए। शोधकर्ताओं के मुताबिक, भूरी (ब्राउन) वसा उपापचय (मेटाबॉलिज्म) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अमेरिका के मैसाचुएट्स स्थित बेथ इजरायल डिकोनेस मेडिकल सेंटर (बीआईडीएमसी) के शोधार्थी इवान रोजेन ने कहा, ‘यदि हम इन वसा कोशिकाओं की संख्या या गतिविधि को नियंत्रित कर पाएं, तो हम शरीर से अतिरिक्त कैलोरी को कम कर सकते हैं।’

शरीर में दो तरह की वसा कोशिकाएं होती हैं, सफेद और भूरी। इसे व्हाइट एडिपोज टिश्यू और ब्राउन एडिपोज टिश्यू के नाम से भी जाना जाता है। सफेद वसा कोशिकाएं शरीर में तबतक अतिरिक्त कैलोरी को जमा रखती हैं, जबतक शरीर को इसकी जरूरत न पड़े। वहीं भूरी एडिपोसाइट्स वसा को जलाकर उसे उष्मा के रूप में परिवर्तित कर देती है।

कम तापमान और कई तरह के हॉर्मोन तथा दवाओं के कारण जींस के एक समूह की क्रियाशीलता से भूरी वसा गर्मी उत्पन्न करती है। यह पूरी प्रक्रिया थर्मोजेनिक जीन अभिव्यक्ति कार्यक्रम के नाम से जानी जाती है, जो इनकोड अनकपलिंग प्रोटीन 1 (यूसीपीआई) द्वारा संचालित होती है। यूसीपीआई 1 भूरी वसा की कोशिकाओं के माइटोकॉन्ड्रिया में ऊर्जा पैदा करता है, जिसके प्रतिफल के रूप में गर्मी पैदा होती है।

अब शोधकर्ता यह प्रमाणित कर चुके हैं कि ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर आईआरएफ 4 (इंटरफेरॉन रेग्युलेटरी फैक्टर 4) ऊर्जा व्यय और ठंड के प्रति सहनशीलता के माध्यम से भूरी वसा की तापजनक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रोजेन कहते हैं, ‘आईआरएफ 4 के प्रतिलेखन (ट्रांसक्रिप्शन) की भूमिका की खोज से हम इस प्रक्रिया को सीधे प्रभावित करने वाली दवा का निर्माण कर सकते हैं।’ यह निष्कर्ष ‘सेल’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।