हैपेटाइटिस बी पीड़ितों की संख्या में भारत दूसरे पायदान पर

भारत में चार करोड़ से अधिक हैपेटाइटिस बी के रोगी हैं और इनमें से ज्यादातर हैपेटाइटिस बी या सी के पुराने रोगी हैं जिन्हें इस संक्रमण की जानकारी नहीं। इससे उनके लीवर कैंसर या सिरोसिस से पीड़ित होने की आशंका बढ़ जाती है जो कि जीवन संकट में डालने वाली बीमारी है।

भाषा | अंतिम अपडेट: Jul 28, 2014, 12:47 AM IST
हैपेटाइटिस बी पीड़ितों की संख्या में भारत दूसरे पायदान पर

नई दिल्ली : भारत में चार करोड़ से अधिक हैपेटाइटिस बी के रोगी हैं और इनमें से ज्यादातर हैपेटाइटिस बी या सी के पुराने रोगी हैं जिन्हें इस संक्रमण की जानकारी नहीं। इससे उनके लीवर कैंसर या सिरोसिस से पीड़ित होने की आशंका बढ़ जाती है जो कि जीवन संकट में डालने वाली बीमारी है।

विश्व हैपेटाइटिस दिवस की पूर्व संध्या पर दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलिएरी साइंसेज (आईएलबीएस) ने देश में इस रोग के प्रति जागरूकता तथा इस पर काबू पाने के प्रयासों की धुंधली तस्वीर पेश की है।

आईएलबीएस के अनुसार हैपेटाइटिस बी संक्रमित रोगियों की संख्या के लिहाज से भारत, चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। इसके अनुसार भारत में हैपेटाइटिस बी (एचबीवी) पीड़ितों की संख्या चार करोड़ है जो कि दुनिया भर में इस रोग से पीड़ित कुल लोगों की संख्या का 15 प्रतिशत है।

इसमें कहा गया है कि हर साल क्षेत्र में लगभग 600000 एचबीवी संक्रमित रोगियों की मृत्यु हो जाती है लेकिन सरकार के पास इस बारे में न तो कोई राष्ट्रीय नीति है और न ही हैपेटाइटिस बी या हैपेटाइटिस सी के रेफरल की कोई व्यवस्था। इसके अनुसार हैपेटाइटिस बी एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है और हर साल 14 लाख लोग इसके कारण मारे जाते हैं। जबकि एचआईवी एड्स से होने वाली मौतों की संख्या 15 लाख है।