मोदी के 'मिशन विधानसभा' को पूरा करेंगे अमित शाह!

By Alok Kumar Rao | Last Updated: Saturday, August 9, 2014 - 14:42
 
Alok Kumar Rao  

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अमित शाह के नाम पर औपचारिक मुहर पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की 9 अगस्त को हुई बैठक में लग गई। पार्टी प्रमुख के तौर पर अपने पहले संबोधन में अमित शाह ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए। लोकसभा चुनावों में पार्टी को प्रचंड बहुमत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले शाह का अगला निशाना आगामी कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं।

चार राज्यों हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू एवं कश्मीर में चुनावी हलचल शुरू हो गई है। शाह का लक्ष्य गैर-भाजपा शासित इन चार राज्यों में अपनी पार्टी की सरकारें बनानी है। शाह जानते हैं कि लोकसभा चुनावों की सफलता में कार्यकर्ताओं का उत्साह, लगन, कर्मठता एवं जोश का काफी योगदान रहा है। शाह चाहते हैं कि कार्यकर्ता विधानसभा चुनावों में फिर उसी उत्साह से जुटें और नरेंद्र मोदी के अगले लक्ष्य 'मिशन विधानसभा' को पूरा करें।

भाजपा को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने और भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद इन चार राज्यों के चुनाव शाह के लिए पहली चुनौती हैं। लोकसभा चुनाव जीतने में बूथ स्तर तक किए गए अपने प्रबंधन कौशल को शाह विधानसभा में भी आजमाएंगे। शाह अच्छी तरह जानते हैं कि लोकसभा में मिली जबर्दस्त जीत से उत्साहित कार्यकर्ताओं को प्रेरित कर वह इन चार राज्यों में भाजपा की सरकार बनाने की राह आसान कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने साफ कर दिया है कि चुनावचाहे संसद के लिए हों अथवा पंचायत के लिए, कार्यकर्ताओं किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेना होगा।    

शाह को इन चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत पक्की दिख रही है। इन राज्यों में भाजपा की जीत की संभावनाओं का शाह ने जिक्र भी किया। हरियाणा की बात करते हुए शाह ने कहा कि यहां सबसे पहले चुनाव होना है और हो सकता है कि यहां पार्टी का किसी दल से गठबंधन हो लेकिन कार्यकर्ता इस काम में जुट जाएं कि पार्टी को 45 से ज्यादा सीटें मिले। जबकि झारखंड के बारे में शाह ने कहा कि यहां की जनता ने कभी किसी को पूर्ण बहुमत नहीं दिया। उन्होंने झारखंड की जनता से इस बार भाजपा को पूर्ण बहुमत देने का आह्वान किया। इस मौके पर शाह ने महाराष्ट्र और जम्मू-एवं कश्मीर के कार्यकर्ताओं में नया उत्साह एवं जोश भरा।

महाराष्ट्र में बीते 15 सालों से कांग्रेस एवं एनसीपी गठबंधन सत्ता में है। हरियाणा में कांग्रेस की सरकार है। जम्मू एवं कश्मीर में कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन सत्ता में है तो झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से झामुमो की सरकार है। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को 71 सीटें दिलाने वाले शाह इस नई जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए जी-जान से जुटेंगे। शाह की जो कार्यशैली है उसे देखा जाए तो वह इन चुनावों को लेकर अपना ब्लू प्रिंट तैयार भी कर चुके होंगे और इन राज्यों में सरकार विरोधी लहर एवं मोदी की लोकप्रियता को कैसे भुनाना है, इसका नक्शा भी वह तैयार कर चुके होंगे।

पार्टी और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पैठ बना चुके शाह के समक्ष अपनी पिछली कामयाबी दोहराने की चुनौती है। चुनावी विश्लेषक मानते हैं कि चुनौतियों और अवसरों को पहचानने में शाह का जवाब नहीं है। विरोधियों के पांव कैसे उखाड़ने और अपने कैसे जमाने हैं शाह इसे बखूबी जानते हैं। नई जिम्मेदारी से लैस शाह अपनी इस नई चुनौती से कैसे निपटते हैं, इस पर सबकी नजरें बनी रहेंगी।



First Published: Saturday, August 9, 2014 - 14:42


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