नीतीश के बाद यूपीए के मंत्रियों की भी मांग, 'अटल जी' को मिले भारत रत्न

Last Updated: Tuesday, November 19, 2013 - 00:48

ज़ी मीडिया ब्यूरो
नई दिल्ली/पटना : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग तेज हो गई है और सोमवार को भाजपा के पूर्व सहयोगी दल जदयू के नेता तथा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और यूपीए सरकार के मंत्रियों ने भी बीजेपी की इस मांग का समर्थन किया।
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान यानी भारत रत्न दिए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर सियासत शुरू हो गई है। नीतीश कुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि अटलजी को भारत रत्न मिलना चाहिए। नीतीश ने वाजपेयी के साथ ही बिहार के नेता कर्पूरी ठाकुर को भी भारत रत्न देने की मांग की है।
साथ ही अब केंद्रीय मंत्री पल्लम राजू ने भी अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने की मांग की है। इससे पहले रविवार को बीजेपी ने अटल बिहारी वाजयेपी को भारत रत्न नहीं देने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा था।
दूसरी तरफ नेशनल कांफ्रेस के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न की मांग का समर्थन किया। अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, मैं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सदस्य नहीं हूं, लेकिन एक भारतीय और कोई व्यक्ति यह नहीं भूल सकता कि वाजपेयी जी एक महान नेता हैं। मैं सरकार से अंतत: उन्हें भारत रत्न दिए जाने का अनुरोध करता हूं। गौर हो कि बीजेपी ने कल अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। रायपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सवाल किया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न देने के बारे में विचार क्यों नहीं किया गया।
देश के सर्वोच्च सम्मान के लिए क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और जानेमाने वैज्ञानिक सीएनआर राव के नाम की घोषणा के दो दिन बाद वाजपेयी के साथ ही हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यानचंद, समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को यह सम्मान दिये जाने की मांग उठने लगी हैं। वाजपेयी को यह सम्मान देने के लिए उठ रहीं मांगों पर सरकार का रख व्यक्त करते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि 2002 के गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी सरकार को लेकर वाजपेयी के रख के बारे में सवाल अब भी खड़े हैं, ऐसे में भारत रत्न के बारे में गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
भाजपा के साथ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहने के बावजूद नीतीश ने कहा कि वह (वाजपेयी) इसके हकदार हैं। उन्हें यह सम्मान क्यों नहीं दिया जाना चाहिए? वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री रहे नीतीश ने इस बारे में सवाल पूछे जाने पर सकारात्मक जवाब दिया। पटना में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित जनता दरबार के बाद संवाददताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए अटल जी के अलावा समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भी भारत रत्न दिया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई ले चुके सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा पर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी द्वारा प्रश्न उठाए जाने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपना विचार रखने का अधिकार है। नीतीश ने कहा कि खेल के क्षेत्र में सचिन तेंदुलकर के योगदान के लिए उन्हें भारत रत्न दिया जाना स्वागत योग्य है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि वाजपेयी का कद इस सम्मान से भी बड़ा है। अब्दुल्ला ने यहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर से इतर संवाददाताओं से कहा कि मैं भाजपा का आदमी नहीं हूं लेकिन मैं एक भारतीय हूं और मुझे लगता है कि कोई भी यह नहीं भूल सकता कि वह (वाजपेयी) बहुत अच्छे नेता हैं।
उन्होंने कहा कि मैं आपको अवश्य बताना चाहूंगा कि जब उन्होंने (वाजपेयी ने) पहली बार लोकसभा में भाषण दिया था तब जवाहरलाल नेहरू उनके पास गए थे और उनसे कहा था कि एक दिन आप जरूर देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। नेहरू ने ये बात तब कही जब कोई भी यह नहीं सोच सकता था कि वाजपेयी एक दिन सच में प्रधानमंत्री बनेंगे। अब्दुल्ला ने कहा कि मैं व्यक्तिगत आग्रह करूंगा कि ऐसी बड़ी शख्सियत, जो ‘भारत रत्न’ से भी बड़ी है, उन्हें उनका उचित सम्मान दिया जाना चाहिए और अभी दिया जाना चाहिए। अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस :एनसी: भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार का हिस्सा थी, लेकिन गुजरात दंगों के बाद उसने राजग का साथ छोड़ दिया था।
केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने नई दिल्ली में एक संवाददाता के सवाल पर कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी ने एक मुख्यमंत्री को राजधर्म निभाने की सलाह दी थी। लेकिन शायद वह खुद कहीं न कहीं राजधर्म नहीं निभा सके। राजधर्म की मांग थी कि उस वक्त उस राज्य सरकार को बर्खास्‍त कर दिया जाना चाहिए था।



First Published: Monday, November 18, 2013 - 15:30


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