घोर पराजय के बाद भी कांग्रेस वोट-बैंक की राजनीति नहीं छोड़ पाई: मोदी

Last Updated: Sunday, August 10, 2014 - 12:19
घोर पराजय के बाद भी कांग्रेस वोट-बैंक की राजनीति नहीं छोड़ पाई: मोदी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कांग्रेस को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में घोर पराजय के बाद भी वह वोट-बैंक की राजनीति नहीं छोड़ पाई है और समाज के तानेबाने को तोड़ने में लगी है।

मोदी ने लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की पहली राष्ट्रीय परिषद की बैठक के अपने समापन भाषण में कहा, ‘हिंदुस्तान में कुछ छोटी-मोटी घटनाएं घट रहीं हैं। हिंसा की घटनाओं को भाजपा कभी स्वीकार नहीं कर सकती। शांति, प्रगति और भाईचारा विकास की पूर्व शर्त है और उससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। सबका साथ, सबका विकास इसलिए हमारा मूल मंत्र है और इसे लेकर हम चल रहे हैं।’

उन्होंने कांग्रेस का नाम लिये बिना कहा, ‘लेकिन वे लोग इतनी घोर पराजय के बाद भी वोट-बैंक की राजनीति नहीं छोड़ पाये हैं और समाज के तानेबाने को तोड़ने में लगे हैं।’ गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक अखबार से बातचीत में कथित तौर पर कहा है कि गैर-बराबरी, गरीबी जैसे असली दुश्मनों से लड़ने में लोगों को एकजुट होने से रोकने और गरीबों को आपस में बांटने की रणनीति के तहत देश में खासतौर से उत्तर प्रदेश में बनावटी और जानबूझकर सांप्रदायिक विवाद पैदा किये जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने अपना कर्तव्य निभा दिया और अब अपना कर्तव्य निभाने की बारी हमारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार अपने कर्तव्यों को निभाने और किसी भी कठोर से कठोर मानदंड पर खरा उतरने में सफल रहेगी।

मोदी ने कहा कि और सब पार्टियों की तुलना में भाजपा को परखने और देखने की कसौटी और तराजू अलग हैं। हम इस चुनौती को स्वीकार करते हैं और विश्वास जताते हैं कि पार्टी कठोर से कठोर मानदंड और कसौटी पर खरा उतरेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा और उनके लिए कठोर मानदंड और कसौटियां तय किये जाने का उन्हें न तो भय है और न कोई शिकायत। उन्होंने कहा, ‘मैं तो 14 साल से तपकर निकला हुआ इंसान हूं।’ उन्होंने कहा, ‘हम गरीबों को आगे रखकर निर्णय करें तो कठोर से कठोर मानदंडों पर खरे उतरेंगे।’

मोदी ने कहा कि हम तो उन लोगों में हैं जो आपातकाल के समय लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी पार्टी (जनसंघ) तक की बलि दे चुके हैं। हमारे लिए दल से बड़ा देश है। कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए मोदी ने इस पार्टी का नाम लिये बिना कहा कि जो लोग पूरे चुनाव में खाद्य सुरक्षा के नाम पर वोट मांगते रहे, उन्होंने सत्ता में रहते गरीबों को खाना न मिले, इसके लिए डब्ल्यूटीओ में हस्ताक्षर कर दिये।

उन्होंने हाल की डब्ल्यूटीओ की बैठक में अपनी सरकार के रुख की सराहना करते हुए कहा कि हम भी चाहते तो ऐसा नजरिया अपना सकते थे जिससे दुनिया में हमारी वाहवाही होती और हमारे बारे में अच्छे-अच्छे लेख लिखे जाते। लेकिन हमने इसके बजाय गरीबों के हितों को साधने वाला रास्ता चुना।

मोदी ने कहा कि हमारे इस रुख को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। दुनिया में भारत को अलग-थलग करने का भी प्रयास हो रहा है। लेकिन हमें फैसला करना था कि हम गरीबों के हितों को साधने वाले रास्ते को चुनें या अपने लिए अच्छे अच्छे लेख छपवाएं।

लोकसभा चुनाव में मिली जीत का श्रेय भाजपा के नये अध्यक्ष को देते हुए मोदी ने कहा कि इस चुनाव के मैन ऑफ द मैच अमित शाह हैं। पार्टी के शीर्ष पद के लिए शाह के नाम को आज ही राष्ट्रीय परिषद ने अपनी मंजूरी दी है। शाह की तारीफ करते हुए मोदी ने कहा कि अगर वह लोकसभा चुनाव के प्रचार की टीम में शामिल नहीं होते और अगर उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभार नहीं मिला होता तो शायद देश को उनकी क्षमता का परिचय नहीं हुआ होता।

उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी ने शाह को जो नया दायित्व सौंपा है, वह उसे भलीभांति निभाएंगे। इससे दल और देश दोनों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन चुनाव नतीजों के बाद एक नया पहलू सामने आया है और वह यह है कि सरकार बदलने के बाद दुनिया का भारत के प्रति नजरिया एकदम बदल गया है और पूरे विश्व में भारत के प्रति लोगों का व्यवहार बदल गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यह सरकार पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई है और दुनिया पर इसका बहुत प्रभाव पड़ा है। मिलीजुली सरकार के प्रति उनका नजरिया अलग हुआ करता था। उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत के बल पर न केवल संसद सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलती है बल्कि पूरे विश्व में भी इसका निर्णायक असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि दिशा और दृष्टि साफ हो तो हम इस स्थिति का भरपूर लाभ उठा सकते हैं। मोदी ने कहा कि इस माहौल में विश्व में अब हिंदुस्तान का डंका बजेगा और जनता ने जो महत्वपूर्ण जनादेश दिया है, उसके कारण ऐसा हुआ है। देश में सैकड़ों राजनीतिक दलों के बीच भाजपा की अलग पहचान बनाने का सुझाव देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी को इसके लिए कुछ हटकर करना होगा।

उन्होंने कहा कि इसके लिए पार्टी को हर वर्ष को एक विशेष वर्ष के रूप में घोषित करना चाहिए जो राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं होकर राष्ट्र और समाज के व्यापक हित से जुड़ा हो। मोदी ने कहा कि जो वर्ष जिस विषय के लिए घोषित किया जाए, उसके लिए पूरे साल योजना बने, जनजागरण कार्यक्रम हों और जनता यह समझे कि यह राजनीतिक और चुनावी कार्यक्रम नहीं है बल्कि राष्ट्रहित और उनसे जुड़ा कार्यक्रम है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मान लीजिए कि एक साल ऊर्जा बचत के लिए तय किया जाए और उस पूरे साल पार्टी स्कूलों, कॉलेजों और घरों में जा-जाकर लोगों को बताए कि देश अरबों-खरबों रुपए का तेल और कोयला आयात करता है और हमसब ऊर्जा की थोड़ी थोड़ी भी बचत करें तो देश के हित में एक बहुत बड़ा कार्य होगा।

मोदी ने कहा कि किसी वर्ष को हम शौचालय के लिए समर्पित करें और गांव-गांव, कस्बे-कस्बे में अभियान चलाएं कि बिना शौचालय के कोई घर नहीं रहे। उन्होंने कहा कि पार्टी के ऐसे विशेष अभियानों में वे काम नहीं लिये जाएंगे जो सरकारी होंगे क्योंकि गैर सरकारी काम कभी-कभी ज्यादा प्रभावी होते हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय परिषद में उपस्थित पार्टी जनों से सवाल किया कि क्या संगठन यह आदत डाल सकता है कि हर साल वह एक विशेष विषय के लिए समर्पित करके जनता के बीच रहे। मोदी ने कहा कि इसी तरह हम कोई साल बच्चियों की शिक्षा के लिए समर्पित कर सकते हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी की नयी टीम उनके इस सुझाव पर ध्यान देगी और इस बारे में उसका जो भी निर्णय होगा, वह उन्हें शिरोधार्य होगा। पार्टी की शानदार जीत के बारे में मोदी ने कहा कि इस बार चुनाव परिणामों ने राजनीतिक पंडितों को भी मुश्किल में डाल दिया था। उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में ये राजनीतिक पंडित कहा करते थे कि मोदी को गुजरात के बाहर कौन जानता है। घटनाक्रम बहुत तेजी से बदल रहे थे और उन्हें समझना, स्वीकार करना या पहचानना बहुत कठिन काम होता है।’ उन्होंने कहा कि देश की जनता ‘देने के मूड’ में थी।

मोदी ने कहा, ‘आपको ध्यान हो या ना हो, 2013 में हुई पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में मुझे जब बोलने का अवसर मिला तो मैंने कहा था ‘हम चलें या न चलें, देश चल पड़ा है’। सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले को जनता के मूड का एहसास होता है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनाव घोषित होने के एक हफ्ते बाद उन्होंने कहा था कि पार्टी को 300 सीटें मिलनी चाहिए। तब उनके साथियों ने कहा था कि वह इतनी सीटें क्यों बोल रहे हैं।

मोदी ने कहा, ‘मुझे लगा कि जनता चाहती थी कि कोई मांगने वाला तो आये, वह देखना चाहती थी कि मांगने वाले में क्या दम है। और मैंने मांगा तो उन्होंने दिया। देश की जनता ने चुनाव में बहुत अच्छे ढंग से अपना कर्तव्य निभाया और अब ऐसा करने की बारी हमारी है।’ उन्होंने कहा कि 60 दिन के बाद उन्हें पूरा विश्वास हो गया है कि वह पार्टी को मिले जनादेश को बहुत भलीभांति पूरा करेंगे। 60 दिनों में इतनी तेजी से चीजें बदलना शुरू हो गयी हैं कि वह खुद हैरान हैं।

मोदी ने कहा कि सत्ता में आते ही उनका काफी समय ‘सफाई में गया, कार्य संस्कृति बदलने में गया।’ लोगों को आश्चर्य हो रहा है कि चुनाव में किये गये वायदे सरकार के पहले ही बजट में आ गये। मोदी ने देशवासियों को विश्वास दिलाया कि वह सरकार की दिशा और दशा सही रखते हुए जनता से किये गये वायदों को पूरा करने में सफल होंगे।

 

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो



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