कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस का नहीं खुला खाता

जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के लिए लोकसभा चुनाव के परिणाम गहरा सदमा पहुंचाने वाले साबित हुए हैं जहां उसके फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद जैसे कद्दावर नेता साफ हो गए।

श्रीनगर : जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के लिए लोकसभा चुनाव के परिणाम गहरा सदमा पहुंचाने वाले साबित हुए हैं जहां उसके फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद जैसे कद्दावर नेता साफ हो गए। भाजपा ने वर्ष 2009 के आम चुनाव के मुकाबले अपने मत प्रतिशत में इस बार 18.61 फीसदी के आंकड़े को लगभग दोगना करते हुए 32.4 फीसदी करने में सफलता हासिल की है जबकि नेशनल कांफ्रेंस का वोट प्रतिशत 19.11 फीसदी से गिरकर 11 फीसदी पर आ गया है उसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस 24. 67 फीसदी से 22. 9 फीसदी मत भागीदारी पर आ गयी है।
मुख्य विपक्षी दल पीडीपी ने अपने वोट प्रतिशत में मामूली सुधार किया है जो 2009 में 20 फीसदी से इस बार 21 फीसदी हो गया है। अपने 32 साल के राजनीतिक कैरियर में कभी कोई चुनाव नहीं हारने वाले 76 वर्षीय फारूक अब्दुल्ला इस बार श्रीनगर लोकसभा सीट पर पहले दौर से ही पीडीपी के अपने प्रतिद्वंद्वी तारिक हामिद कार्रा से पिछड़ने लगे थे। बटमालू से पूर्व विधायक कार्रा अब्दुल्ला को 35 हजार से अधिक मतों से हराकर छुपे रूस्तम साबित हुए हैं।
चुनाव परिणामों के साथ नेशनल कांफ्रेंस के खेमे में पूरी तरह सन्नाटा पसरा पड़ा है और पार्टी में जल्द ही व्यापक फेरबदल होने की संभावना है। प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में हार की जिम्मेदारी स्वीकार की।

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