सियासत का `आम आदमी` अरविंद केजरीवाल

Last Updated: Monday, March 31, 2014 - 18:53

रामानुज सिंह
इंजीनियर से नौकरशाह और नौकरशाह से सामाजिक कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता से राजनीतिज्ञ बने अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी को दिल्ली प्रदेश में सत्ता में लाकर राजनीतिक सोच बदल दी। इस 45 वर्षीय नेता ने सामने से मोर्चा संभालकर गैर परंपरागत तरीके से अपनी मुहिम शुरू की और उनकी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर कांग्रेस के 15 साल के शासन को समाप्त किया और सरकार बनाई। लेकिन 49 दिनों की केजरीवाल सरकार ने अपने फैसले और मंत्रियों के व्यवहार के चलते खुब सुर्खियां बटोरीं। अब केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति में बेहतर विकल्प देने की कोशिश कर रहें। वे लोकसभा चुनावों में कमर कस कर कूद चुके हैं। उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी करीब 400 लोकसभा सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी।
परिवर्तन का सपना लेकर राजनीति में उतरे केजरीवाल अपनी विनम्र वाणी और सहज व्यक्तित्व से राजधानी के लोगों को एक बेहतर कल का सपना दिखाया था और नएपन की उम्मीद जगाने में कामयाब रहे। महंगाई, भ्रष्टाचार, लाल फीताशाही और नौकरशाही से आजिज मतदाताओं को विधानसभा चुनावों में तो रिझाने में कामयाब रहे। सरकार बनने के बाद अपनी जिम्मेदारियों से 49 दिन बाद ही भागने वाले को जनता कितना स्वीकार करेगी आने वाल लोकसभा चुनाव में पता चल जाएगा।
केजरीवाल ने भारतीय राजनीति के खेल के पुराने नियम-कायदों को हटाते हुए इस खेल के नए मापदंड तय किए। भ्रष्टाचार विरोधी पार्टी के रूप में शुरू हुए इस सामाजिक आंदोलन ने पूरे भारत में मौजूद छात्रों, किसानों, नागरिक अधिकार समूहों, गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला समूहों और शहरी युवाओं की असीमित उर्जा अपने साथ ले ली।
16 अगस्त 1968 को हरियाणा के हिसार में गोबिंद राम केजरीवाल और गीता देवी के घर पैदा हुए अरविंद ने भ्रष्टाचार, बिजली दरों और पानी के बिलों में वृद्धि, महिला सुरक्षा के मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों पर हमला बोलकर पूरे राजनैतिक परिदृश्य में घबराहट पैदा कर दी थी। जनता के मुद्दों को मुखरता के साथ उठाने वाले केजरीवाल इन दोनों ही दलों के वोट बैंकों में सेंध लगाने में कामयाब रहे। दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और भाजपा की ओर से नगण्य माने जा रहे केजरीवाल मुख्य रूप से वर्ष 2011 में जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में 75 वर्षीय अन्ना हजारे द्वारा किए गए आंदोलन में सामने आए थे।

रेमन मेगसेसे पुरस्कार प्राप्त केजरीवाल की वाणी में बेहद कोमलता है लेकिन उनके इरादे फौलाद से भी ज्यादा मजबूत हैं। केजरीवाल किरण बेदी, प्रशांत भूषण और अन्य लोगों के साथ टीम अन्ना के सदस्य रह चुके हैं। जनलोकपाल विधेयक को लागू करने के अभियान के तहत केजरीवाल इस विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए सरकार द्वारा गठित समिति में नागरिक समाज के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल थे।
भारत के गरीब नागरिकों को आरटीआई कानून की मदद से सशक्त बनाने की केजरीवाल की कोशिश ने उन्हें वर्ष 2006 में रेमन मेगसेसे पुरस्कार (इमर्जेंट लीडरशिप) दिलवाया। फरवरी 2006 में आयकर विभाग के संयुक्त सचिव पद से इस्तीफा देने के बाद केजरीवाल पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए और उन्होंने एक एनजीओ शुरू कर लिया। पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन नामक इस संस्था को उन्होंने पुरस्कार में मिली राशि से शुरू किया था। केजरीवाल सिर्फ शाकाहारी भोजन करते हैं और घर पर बना भोजन ही करना पसंद करते हैं। उनका विवाह सुनीता से हुआ है। सुनीता खुद भी भारतीय राजस्व सेवा में एक अधिकारी हैं। ये दोनों मसूरी में राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में एक ही बैच में थे। इस दंपति के दो बच्चे हैं। उनकी बेटी का नाम हर्षिता और बेटे का नाम पुलकित है। केजरीवाल को एक छोटी बहन और एक भाई है।



First Published: Monday, March 31, 2014 - 16:17


comments powered by Disqus