जयललिता जयराम

Last Updated: Tuesday, April 1, 2014 - 15:41

प्रवीण कुमार
जीवन के हर संघर्ष को ताकत बनाकर आगे बढ़ने वालों की बात करें तो जुबां पर एक नाम सबसे पहले आता है और वह नाम है जयललिता। जी हां! अपने जीवन में जयाललिता ने हर कदम पर मुसीबतों का मुंहतोड़ जवाब देकर जबरदस्त कामयाबी हासिल की है। पार्टी के अंदर और सरकार में रहते हुए मुश्किल और कठोर फ़ैसलों के लिए मशहूर जयललिता को तमिलनाडु में `आयरन लेडी` और तमिलनाडु की `मारग्रेट थैचर` भी कहा जाता है। जयललिता जयराम जिन्हें जे. जयललिता के नाम से जाना जाता है, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री हैं और लोकसभा-2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री बनने के लिए जोर आजमाइश कर रही हैं।
राजनीति में आने से पहले जयललिता एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं और उन्होंने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ की फिल्मों के अलावा एक हिंदी फिल्म ‘इज्जत’ में भी काम किया है। वे ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कजगम (एआईएडीएमके) की वर्तमान महासचिव हैं। उनके समर्थक उन्हें अम्मा (मां) और कभी-कभी पुरातची तलाईवी (क्रांतिकारी नेता) कहकर बुलाते हैं। कहते हैं कि एमजी रामचंद्रन ने जयललिता को राजनीति से परिचित कराया था, लेकिन जयललिता इन दावों को सही नहीं मानती हैं। 1984-1989 के दौरान जयललिता ने तमिलनाडु से राज्यसभा के लिए राज्य का प्रतिनिधित्व किया। पर रामचंद्रन की मौत के बाद उन्होंने खुद को रामचंद्रन की राजनीतिक विरासत का वारिस घोषित कर दिया। वे राज्य की दूसरी महिला मुख्‍यमंत्री हैं।
जयललिता का जन्म एक ‍तमिल परिवार में 24 फरवरी, 1948 को हुआ था। जयललिता पुरानी मैसूर स्टेट (जो अब कर्नाटक का हिस्सा है) के मांडया जिले के पांडवपुरा ताल्लुक के मेलुरकोट गांव में पैदा हुई थीं। जयललिता के पिता जयराम का तब निधन हो गया था जब वे केवल दो वर्ष की थीं। उनकी मां जयललिता को साथ लेकर बेंगलुरू चली गई थीं जहां उनके माता-पिता रहते थे। बाद में उनकी मां ने तमिल सिनेमा में काम करना शुरू कर दिया और अपना फिल्मी नाम संध्या रख लिया। बचपन से ही गरीबी में घिरी जयललिता को परिस्थितियों ने मजबूती प्रदान की। विषम परिस्थितियों में भी जयललिता ने खुद को तमिलनाडु की राजनीति और तमिल सिनेमा में स्थापित किया।
बेंगलुरु में पढ़ाई करने के बाद जयललिता अपनी मां के साथ मद्रास लौट कर आ गई थीं। मद्रास से ही उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। 1961 में पहली बार जयललिता ने एक अंग्रेजी फिल्म में काम करके अपने करियर की शुरुआत की थी। जयललिता का फिल्मी करियर बेहद शानदार था।
जयललिता ने इज्जत नामक हिन्दी फिल्म में धर्मेंद्र के साथ भी काम किया है। अपने शानदार फिल्मी करियर के बाद जयललिता ने अपना ध्यान राजनीति में लगा दिया। वर्ष 1982 में एआईएडीएमके (AIADMK) की सदस्यता लेने के बाद पहली बार जयललिता राजनीति में आईं। उनका राजनीति में आगमन फिल्मों में उनके साथी कलाकार, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके के संस्थापक एम.जी. रामचंद्रन के कारण हुआ। रामचंद्रन के साथ उनकी नजदीकियों ने उन्हें राजनीति में स्थापित होने में काफी मदद की। वर्ष 1983 में जयललिता की नियुक्ति पार्टी के प्रचार सचिव के रूप में हुई। वर्ष 1984 में जयललिता राज्य सभा सांसद बनीं।
पार्टी के संस्थापक रामचंद्रन के बीमार पड़ने के बाद जब वह इलाज कराने के लिए देश से बाहर चले गए तो जयललिता ने पार्टी में उनका स्थान ले लिया। उन्होंने कांग्रेस गठबंधन वाली एआईएडीएमके की अध्यक्षता की। वर्ष 1987 में रामचंद्रन की मृत्यु के पश्चात उनकी पार्टी दो भागों में बंट गई। पार्टी महासचिव होने के नाते वह वर्ष 1989 में तमिलनाडु के बोदिनायकनूर से राज्य विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव मैदान में उतरीं। इन चुनावों में जीतने के बाद वह राज्य विधानसभा की पहली नेता विपक्ष बनीं। वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सांत्वना के तौर पर पूरे भारत में कांग्रेस गठबंधन सरकार ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। जयललिता ने भी भारी अंतर के साथ जीत दर्ज की। इन चुनावों के बाद वह राज्य की मुख्यमंत्री बनाई गईं। तमिलनाडु की अब तक की सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का खिताब भी जयललिता के ही नाम है। जयललिता चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बन चुकी हैं। उनका चौथा कार्यकाल 16 मई, 2011 से शुरू हुआ जो अभी जारी है।

जयललिता ने लगभग 300 तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिन्दी फिल्मों में काम किया। हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में धर्मेंद्र के साथ इनकी जोड़ी खूब जमी थी। जाने माने निर्देशक श्रीधर की फिल्म वेन्नीरादई से जयललिता ने करियर की शुरूआत की थी। जया को साड़ियों और गहनों का बहुत शौक है। अविवाहित जया एक खास रंग की साड़ी ही ज्यादातर पहनती हैं। जानकार कहते हैं कि जयललिता और एमजी रामचंद्रन एक-दूसरे को बहुत चाहते थे। रामचंद्रन शादी-शुदा थे, इसलिए दोनों का प्यार परवान नहीं चढ़ पाया। अपने दत्तक पुत्र की शादी में खुले हाथों से खर्च करने कारण पहली बार जयललिता सुर्खियों में आई थीं। यह शादी उस समय तक देश की सबसे महंगी शादी थी।
मुख्यमंत्री के अपने पहले कार्यकाल के दौरान जयललिता पर भूमि घोटाले और आय से अधिक संपत्ति रखने जैसे गंभीर आरोप लगे। मुख्यमंत्री पद के दूसरे कार्यकाल के दौरान वर्ष 2001 में जयललिता को अवैध तरीके से सरकारी जमीन हथियाने के चलते पांच वर्ष के कारावास की सजा भी सुनाई गई थी। इस सजा के विरोध में जयललिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, कोई ऐसा व्यक्ति जिसके खिलाफ किसी भी कोर्ट में आपराधिक मामला चल रहा हो और जिसे दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई जा चुकी हो, वह मुख्यमंत्री पद के लिए योग्य नहीं होता है। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार जयललिता ने किस अधिकार से रिट जारी किया गया। परिणामस्वरूप जयललिता को अपना पद छोड़ना पड़ा। मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दिए जाने के बाद उन्हीं की पार्टी के ओ. पनीरसेल्वम को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनाया गया जिन पर जयललिता के इशारों पर ही काम करने जैसे आरोप लगते रहे। 2003 में जयललिता को कोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया।
सके बाद जयललिता के लिए मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया। अंदिपत्ति के मध्यावधि चुनावों में जयललिता भारी अंतर से चुनाव जीत गईं और तीसरी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। साथ ही कोर्ट ने उन्हें पहले कार्यकाल से चलते आ रहे आरोपों से भी वर्ष 2011 में बरी कर दिया।

वर्ष 1972 में तमिलनाडु सरकार द्वारा जयललिता को कलईममानी अवॉर्ड दिया गया। वर्ष 1991 में मद्रास यूनिवर्सिटी द्वारा जयललिता को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। 1992 में डॉ.एम.जी.आर यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस द्वारा जयललिता को डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। जयललिता को मोहिनी अट्टम, कथकली जैसे नृत्यों का भी अच्छा ज्ञान है। वह अंग्रेजी समेत दक्षिण भारत की लगभग हर भाषा को बोलती और समझी हैं। राजनीति और फिल्मों में अभिनय करने के अलावा जयललिता को लिखने, तैराकी, घुड़सवारी का भी शौक है। जयललिता द्वारा अंग्रेजी और तमिल भाषा में लिखे गए कई लेख और उपन्यास अब तक प्रकाशित हो चुके हैं।



First Published: Monday, March 31, 2014 - 18:37


comments powered by Disqus