शरद पवार

आम चुनाव 2014 की सरगर्मियों के बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार का रुख अस्‍पष्‍ट रहा है। कभी कांग्रेस को लताड़ने वाले पवार कुछ दिनों पहले मोदी का भी गुणगान भी कर चुके हैं। इन सबके बीच उनकी निगाहें प्रधानमंत्री पद पर भी टिकी हुई है। तीसरे मोर्चे की स्थिति उभरने पर यदि स्थितियां करवट लेती हैं तो पवार की निगाहें उस घटनाक्रम पर टिकी होंगी।

अंतिम अपडेट: मंगलवार अप्रैल 1, 2014 - 03:33 PM IST

आम चुनाव 2014 की सरगर्मियों के बीच एनसीपी प्रमुख शरद पवार का रुख अस्‍पष्‍ट रहा है। कभी कांग्रेस को लताड़ने वाले पवार कुछ दिनों पहले मोदी का भी गुणगान भी कर चुके हैं। इन सबके बीच उनकी निगाहें प्रधानमंत्री पद पर भी टिकी हुई है। तीसरे मोर्चे की स्थिति उभरने पर यदि स्थितियां करवट लेती हैं तो पवार की निगाहें उस घटनाक्रम पर टिकी होंगी।
कृषि मंत्री शरद पवार का जन्‍म 12 दिसंबर 1940 को हुआ था। महाराष्‍ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री पवार राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वर्तमान अध्‍यक्ष हैं। शरद पवार, तारिक अनवर और पीए संगमा ने इस पार्टी की स्‍थापना की थी, ये तीनों राजनीतिज्ञ पहले कांग्रेस पार्टी से संबंधित थे।
राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के निर्माण का मुख्‍य कारण यह था कि पवार, अनवर और संगमा इटली मूल की सोनिया गांधी द्वारा कांग्रेस पार्टी का नेतृत्‍व किए जाने के विरुद्ध थे और इस आधार पर 20 मई 1999 को वे कांग्रेस से अलग हो गए और 25 मई 1999 को राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्‍थापना की। पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री पवार लोकसभा में महाराष्‍ट्र के माधा क्षेत्र का नेतृत्‍व करते हैं। पवार 2005 से 2008 तक बीसीसीआई के चेयरमैन रहे और 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्‍यक्ष बने। अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत पवार ने कांग्रेस के साथ 1967 में की।
यशवंतराव चव्‍हाण को उनका राजनीतिक गुरु माना जाता है। 1978 में जनता पार्टी के गठबंधन से सरकार बनाने के लिए उन्‍हें कांग्रेस से पहले भी निष्‍कासित किया जा चुका था। इस गठबंधन के फलस्‍वरूप वे महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री बने थे। 1984 में बारामती से वह पहली बार लोकसभा चुनाव जीते। 1987 में शिवसेना के बढ़ते प्रभाव के चलते उन्‍होंने कांग्रेस में वापसी की। 1993 में उन्‍होंने चौथी बार मुख्‍यमंत्री के पद शपथ ली थी और यह उनका सबसे विवादास्‍पद कार्यकाल रहा। 2001-2002 के दौरान उन पर माफि़या से संबंध होने के आरोप लगे। उन पर गेंहू निर्यात और 2जी स्‍पेक्‍ट्रम घोटालों के आरोप लगते रहे हैं।