100 दिन बाद लाल ग्रह पर पहुंचेगा भारत का मंगलयान

आज से ठीक 100 दिन बाद भारत का मंगलयान लाल ग्रह पर पहुंचने वाला है क्योंकि यह तकरीबन अपनी 70 फीसदी यात्रा पूरी करके अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

अंतिम अपडेट: Jun 16, 2014, 07:13 PM IST
100 दिन बाद लाल ग्रह पर पहुंचेगा भारत का मंगलयान

बेंगलूर : आज से ठीक 100 दिन बाद भारत का मंगलयान लाल ग्रह पर पहुंचने वाला है क्योंकि यह तकरीबन अपनी 70 फीसदी यात्रा पूरी करके अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

बेंगलूर स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कहा कि 24 सितंबर को मंगलयान मिशन (एमओएम) की एक बेहद महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकीय उपलब्धि मार्स ऑर्बिट इन्सर्शन की योजना है।

एमओएम बेहद तेजी से गहरे अंतरिक्ष में 300 दिन की अपनी यात्रा के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। एक सिग्नल एमओएम से धरती तक पहुंचने में छह मिनट का समय लेता है।

इसरो ने मार्स ऑर्बिट मिशन के अपने फेसबुक पन्ने पर एक पोस्ट में कहा कि अंतरिक्ष यान और उसके पांच पेलोड अच्छी दशा में हैं। अहम उपलब्धि के तहत इसरो ने 11 जून को शाम साढ़े चार बजे अपने मार्स ऑर्बिटर अंतरिक्ष यान पर दूसरा प्रक्षेप पथ सुधार कौशल (टीसीएम-2) को अंजाम दिया। उसने 16 सेकेंड के लिए अंतरिक्ष यान के 22 न्यूटन थ्रस्टर्स को दागा। बीच रास्ते में सुधार इसलिए किया जाता है ताकि अंतरिक्ष यान को सही पथ पर रखा जाए।

एक अन्य प्रक्षेप पथ सुधार कौशल की योजना अगस्त में है। उसके बाद अंतरिक्ष एजेंसी सितंबर में मार्स ऑर्बिट इन्सर्शन (मंगल की कक्षा में प्रविष्ट कराने) को अंजाम देगी। महत्वाकांक्षी मंगल मिशन को पिछले साल पांच नवंबर को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान के जरिए आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था। इसे इस साल 24 सितंबर को मंगल ग्रह के वातावरण में पहुंचाने के लक्ष्य से प्रक्षेपित किया गया था।

450 करोड़ रुपए की इस परियोजना से वैज्ञानिक समुदाय को ग्रहों के शोध में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। अंतरिक्ष यान को मंगल के भौतिक गुणों और मंगल के वातावरण के सीमित अध्ययन के लिए पांच पेलोड के साथ निरीक्षण करने के लिए ढाला गया है। इसरो ने आपात स्थिति से निपटने के लिए एमओएम अंतरिक्ष यान में स्वायत्त पहलुओं को शामिल किया है।