धरती को आसमान में घूमते-घूमते मिल गया उसका बड़ा भाई!

यह चर्चा हमेशा से होती है कि धरती जैसा आसमान में कोई दूसरा ग्रह है या नहीं। लेकिन अब नए शोध इस बात की तरफ संकेत दे रहे हैं धरती जैसा ग्रह भी आसमान में है।

Updated: Jan 9, 2014, 12:11 AM IST

ज़ी मीडिया ब्यूरो
नई दिल्ली: यह चर्चा हमेशा से होती है कि धरती जैसा आसमान में कोई दूसरा ग्रह है या नहीं। लेकिन अब नए शोध इस बात की तरफ संकेत दे रहे हैं धरती जैसा ग्रह भी आसमान में है। केओआई 314सी को आसमान में देखकर बस ऐसा लगता है कि जैसा वह धरती का बड़ा भाई हो। इसका आकार धरती से बड़ा है। धरती से 200 प्रकाश वर्ष दूर धरती की ही तरह हीलियम और हाइड्रोजन की चादर में लिपटा इस ग्रह को वैज्ञानिकों ने ढ़ूंड निकाला है।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के समान द्रव्यमान वाले एक ग्रह का पता लगया है। इससे पृथ्वी के सदृश अन्य ग्रहों की खोज को बल मिला है। एक अध्ययन में कहा गया है कि खोजे गए ग्रह का नाम केओआई-314सी है जो भार में पृथ्वी के ही बराबर है, लेकिन इसका व्यास पृथ्वी से 60 प्रतिशत बड़ा है। अनुमान है कि वहां अत्यंत घना गैसीय वायुमंडल होगा।हावर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफीजिक्स (सीएफए) के डेविड किप्पिंग ने कहा कि नए ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी के बरारबर है, लेकिन निश्चित रूप से यह पृथ्वी के जैसा नहीं है।
खगोल भौतिकी पर केंद्रित एक पत्रिका में प्रकाशित अपने अध्ययन में उन्होंने आगे कहा है कि इससे साबित होता है कि खोजे गए ग्रह पर पृथ्वी के जैसी चट्टानी दुनिया और नरम ग्रहों के जैसी पानी की दुनिया या गैस भंडार के बीच कोई विभाजक रेखा मौजूद नहीं है। केओआई-314सी द्रव्यमान और भौतिक आकार की माप में सबसे हल्का ग्रह है। अध्ययन में कहा गया है कि पूर्व के अभिलेख में एक ग्रह का द्रव्यमान आकलन (केपलर-78बी) पृथ्वी के मुकाबले 70 प्रतिशत अधिक किया गया था।
अनुसंधान दल ने ग्रह की प्रकृति का अध्ययन नेशनल एयरोनेटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) के केपलर अंतरिक्ष यान से प्राप्त आंकड़ों से किया है। अत्यंत क्षीण लाल रंग के छोटे से तारे की परिक्रमा करने वाला यह नया ग्रह अनुमानत: 200 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। यह अपने तारे की परिक्रमा हर 23 दिनों में पूरी कर लेता है। अध्ययन दल ने यहां का तापमान 220 डिग्री फॉरनहाइट होने का अनुमान लगाया है। यह तापमान जीवन के पनपने के लिए अनुकूल नहीं है। इस अध्ययन के लिए वित्तीय सहयोग नासा और नेशनल साइंस फाउंडेशन ने किया है।