दिल्ली में चुनावी मुद्दों की है लंबी फेहरिस्त

Last Updated: Monday, November 11, 2013 - 15:53

वैसे तो दिल्ली देश के विकसित राज्यों में से एक है। फिर भी इस प्रदेश में अनेक ऐसी समस्याएं हैं जो इस विधानसभा चुनाव के मुद्दे हैं। महंगाई और भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। इसके साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, दिल्ली के स्थानीय मुद्दे जैसे बिजली की बढ़ती दरें, पानी और आवास की कमी भी हावी हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर विपक्षी पार्टियां वर्तमान सरकार हमला बोलते हुए मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाने की कोशिश में लगी है। दूसरी और प्रदेश सरकार अपने कार्यकाल के दौरान किए गए विकास के कार्यों को लेकर जनता से वोट मांग रही है। दिल्ली में जब भी विकास की बात करते हैं तो विकास सिर्फ प्रदेश सिर्फ पॉश इलाके में नजर आता है यानी जहां अमीरजादे लोग या सरकारी महकमे के लोग निवास करते हैं। बाकी इलाकों में हालात बदतर है।
दिल्ली के विकास का दावा कर रही कांग्रेस की कोशिश है कि महंगाई चुनाव का मुद्दा न बने। लेकिन प्रदेश में रोजमर्रा की चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि लोगों को पेट भरने के लिए काफी जद्दोदजहद करना पड़ रहा है। प्याज और टमाटर कीमतें को रूला ही दिया है। इसको लेकर सरकार के खिलाफ जनता में काफी रोष है।
इसके आलावे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर शीला सरकार को भाजपा और आम आदमी पार्टी सरकार को घेर रही है। राष्ट्रमंडल खेलों में हुए घोटाले की सबसे पहले एफआइआर दर्ज कराने के लिए शिकायत करने वाले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल तो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा को भी लपेट रहे हैं। वह भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम में भी भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रहे हैं।
दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। 16 दिसंबर 2012 को वसंत विहार इलाके में गैंगरेप की घटना के बाद से यह मुद्दा बेहद अहम हो गया है। इस घटना ने न सिर्फ प्रदेश को हिलाकर रख दिया बल्कि यह मुद्दा देश भर में गुंजा। जिससे महिला सुरक्षा पर बने कानून को और कड़ा बनाया। फिर भी देश की राजधानी में बलात्कार और गैंगरेप जैसी धटनाओं को रोकने में सरकार नाकाम रही है। बसों और मेट्रो और सार्वजनकि स्थानों में महिलाओं से छेड़छाड़ बदस्तूर जारी है। इस मुद्दे पर भी विपक्षी दल सरकार को घेर रहे हैं।
इस चुनाव में बिजली की दरों का मुद्दा भी अहम है। क्योंकि शीला सरकार ने अपने कार्यकाल में कई बार बिजली की दरें बढ़ाई जिससे प्रदेश की जनता महंगी बिजली से परेशान हो चुकी है। इस मुद्दे पर आप पार्टी ने बिजली की दरें बार-बार बढ़ाने के लिए सरकार और बिजली कंपनियों में साठगांठ के आरोप लगाए। आप ने वादा किया कि हमारी सरकार बनेगी तो 30 प्रतिशत बिजली दरें कम कर देंगे। इसके बाद भाजपा ने भी 30 प्रतिशत कम करने का वादा कर दिया। अब आप ने 50 प्रतिशत कम करने का वादा कर दिया है।

बिजली के बाद दिल्ली में पानी भी बहुत बड़ा मुद्दा है। बाहरी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली की कम से कम 30 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां पानी आपूर्ति की समस्या है। इन विधानसभा क्षेत्रों में पानी कई-कई दिन तक नहीं आता, जहां आता भी है तो गंदा आता है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है। क्योंकि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है जबकि एमसीडी पर भाजपा का कब्जा है। इस पर कांग्रेस और भाजपा को घेरते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा, उसकी सरकार बनेगी तो हर माह 20 किलोलीटर पानी मुफ्त देगी।

इस विधानसभा चुनाव में भी अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण एक बड़ा मुद्दा है। सरकार के दावों के बावजूद सैकड़ों कॉलोनियां नियमित नहीं हो पाई हैं। जो कागजों में नियमित हो गई हैं, वहां अब तक रजिस्ट्री बंद है। ऐसे में भाजपा और आम आदमी पार्टी यहां के लोगों को समझाने की कोशिश कर रही है कि उन्हें बरगलाया जा रहा है। जबकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कागजों पर ही सही, नियमित होने के बाद इन इलाकों में जमीन की कीमत करोड़ों में पहुंच गई है।

दिल्ली में मेट्रो यातायात के मुख्य साधन बनने के बाद भी डीटीसी बसों स्थान महत्वपूर्ण है। क्योंकि सभी इलाकों में मेट्रो की पहुंच नहीं है। बसों से सफर करने वाले आम लोग होते हैं जिन्हें हर रोज कई समस्यों का सामना करना पड़ता है। जब लोग ऑफिस या दूसरे काम के लिए घर से निकलते हैं तो डीटीसी बस स्टॉप पर पहुंचते हैं। वहां बसों का इंतजार करते हैं। बस समय पर नहीं पहुंच है। काफी इंतजार के बाद जब बस आती है तो एक साथ एक ही रूट नंबर की कई बसें आती है। फिर काफी देर तक बस नहीं आती, उसके बाद फिर एक बस आती है उसमें काफी भीड़ होती है। जिसमें सफर करना काफी तकलीफ देह होता है। इसके अलावे कभी-कभी बस स्टॉप पर यात्री होने के बावजूद बस ड्राइवर बस नहीं रोकता है। इतना ही नहीं यात्रियों की सुविधा के अनुसार कई जगहों पर बस स्टॉप भी नहीं बनाए गए हैं। जहां बस स्टॉप होने चाहिए वहां नहीं है जहां नहीं होना चाहिए वहां बस स्टॉप है। बसों में सुरक्षा की बेहद कमी है। प्रत्येक दिन हर बस में आम लोगों को पाकेटमारों से जूझना पड़ता है। कहने के लिए दिल्ली से प्राइवेट बसों को हटा दिया गया है। उसके जगह क्लस्टर बसें चल रही है पर उस बसों में डीटीसी बसों के नियम लागू नहीं होते। उस बसों में पास मान्य नहीं है। जिससे लोगों को सफर में काफी परेशानी होती है क्योंकि किसी किसी रूट में ज्यादा क्लस्टर बसें ही चलती हैं। यह समस्या किसी भी पार्टियों के एजेंडे में नहीं है। इसे शामिल किया जाना चाहिए। इसके आलावे दिल्ली में पार्किंग और जाम की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसके साथ की प्रदूषण की भी समस्या है।



First Published: Monday, November 11, 2013 - 13:18


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