भारत में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर अमेरिका चिंतित

Last Updated: Friday, February 28, 2014 - 14:33

वॉशिंगटन : भारत में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर अमेरिका द्वारा लगातार चिंता जताए जाने की बात कहते हुए ओबामा प्रशासन ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया कि वर्ष 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों तथा इनमें मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित भूमिका को लेकर उसका रवैया नर्म हो गया है।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जेन साकी ने संवाददाताओं से कहा, ‘मेरे विचार से भारत में सांप्रदायिक हिंसा के कई मामलों को लेकर हमारा रूख बिल्कुल साफ है और अगर आप इसकी समीक्षा करेंगे तो यह आपके सामने स्पष्ट भी हो जाएगा।’ जेन साकी से मानवाधिकारों पर सालाना रिपोर्ट ‘कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेज’ को लेकर सवाल पूछा गया था। यह नवीनतम रिपोर्ट हाल ही में विदेश मंत्री जॉन केरी ने रिलीज की है।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता से पूछा गया था ‘भारत में मानवाधिकारों पर पिछली रिपोर्ट्स में मोदी के नाम का जिक्र था और इस रिपोर्ट में उनका जिक्र क्यों नहीं है।’’ साकी ने कहा कि करीब एक दशक पहले गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों पर अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वर्ष 2011 और 2012 की सालाना रिपोर्टों में मोदी का जिक्र था लेकिन सांप्रदायिक दंगे में उनकी भूमिका के बारे में नहीं कहा गया था।
भारत में मानवाधिकार का उल्लंघन
अमेरिकी कांग्रेस समर्थित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मानवाधिकारों का सर्वाधिक उल्लंघन पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा किया जाता है लेकिन सरकार ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुई हत्याओं के लिए अधिकारियों को दंडित करने संबंधी मामलों में कुछ प्रगति की है। विदेश मंत्री जॉन कैरी द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट (कंट्री रिपोर्ट ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेज) में कहा गया है, ‘मानवाधिकारों की सबसे महत्वपूर्ण समस्या पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा उल्लंघन है जिनमें हत्याएं, प्रताड़ना और बलात्कार , सरकार के सभी स्तरों पर फैला भ्रष्टाचार , न्याय से इनकार , अलगाववादी , उग्रवादी और सामाजिक हिंसा है।’ रिपोर्ट में मानवाधिकार से जुड़ी अन्य समस्याओं में लोगों का लापता होना, जेलों में खराब परिस्थितियां, मनमानी गिरफ्तारी, हिरासत और बिना सुनवाई के हिरासत में रखना आदि शामिल बताई गयी हैं।

भारत में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार
अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में न्यायपालिका समेत सरकार के हर स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार है। अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी द्वारा कल जारी इस वार्षिक रिपोर्ट (कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स प्रेक्टिसेज) में कहा गया, ‘भ्रष्टाचार व्यापक स्तर पर है।’ इस रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि आधिकारिक स्तर पर भ्रष्टाचार होने पर कानून आपराधिक दंड देता है लेकिन भारत सरकार ने कानून को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया और अधिकारी छूट का फायदा उठा कर भ्रष्ट कामों में लिप्त हो जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘सरकार के हर स्तर पर भ्रष्टाचार मौजूद है। सीबीआई ने जनवरी से नवंबर माह के बीच में भ्रष्टाचार के 583 मामले दर्ज किए हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग को वर्ष 2012 में 7,224 मामले मिले। 5,528 मामले वर्ष 2012 के थे और बाकी 1,696 मामले 2011 से बचे थे। आयोग ने 5,720 मामलों पर कार्रवाई की सिफारिश की थी।’ (एजेंसी)



First Published: Friday, February 28, 2014 - 14:33


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