मलाला को नहीं, OPCW को मिला शांति का नोबेल पुरस्कार

Last Updated: Friday, October 11, 2013 - 17:09

ओस्लो : सीरियाई संकट को लेकर हाल ही में चर्चा में रहे संयुक्त राष्ट्र समर्थित ‘रासायनिक हथियार निषेध संगठन’ (ओपीसीडब्ल्यू) को इन हथियारों से दुनिया को निजात दिलाने में योगदान देने को लेकर शुक्रवार को शांति का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई।
नोबेल समिति के अध्यक्ष तोरबजोर्न जागलैंड ने सब को चौंका देने वाले इस नाम की घोषणा करते हुए कहा, ‘ओपीसीडब्ल्यू को रासायनिक हथियार खत्म करने की व्यापक कोशिशों के चलते इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।’
पुरस्कारों के लिये चयन करने वाली जूरी ने अपने बयान में कहा है, ‘रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल वाली सीरिया की हालिया घटनाओं ने इन हथियारों को हटाने की कोशिशें बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।’
नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा की पूर्व संध्या तक इस रासायनिक हथियार निगरानी संगठन को इस पुरस्कार के लिए प्रबल दावेदार नहीं समझा जा रहा था। पाकिस्तान में बालिका शिक्षा की हिमायत करने वाली किशोरी मलाला यूसुफजई और कांगो के चिकित्सक डेनिस मुकवेग को इस साल के पुरस्कार के लिए प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
इस तरह, यह दूसरा साल है जब किसी संगठन को यह पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। बीते साल यह पुरस्कार यूरोपीय संघ को दिया गया था।
13 जनवरी 1993 को हस्ताक्षर किए गए रासायनिक हथियार संधि को लागू करने के लिए हेग आधारित ओपीसीडब्ल्यू की स्थापना 1997 में की गयी थी।
हाल के समय तक गुमनामी के साये में संचालित हो रहा यह संगठन सीरिया के रासायनिक हथियारों को नष्ट किए जाने के कार्य की निगरानी करने के अपने कार्य के चलते अचानक विश्व पटल पर प्रसिद्ध हो गया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत सीरिया में रासायनिक हथियारों की निगरानी का कार्य 2014 के मध्य तक पूरा किया जाना है।
ओपीसीडब्ल्यू के करीब 30 हथियार विशेषज्ञों की एक टीम सीरिया में मौजूद है तथा उन्होंने इन हथियारों का निर्माण करने वाले प्रतिष्ठानों को नष्ट करना शुरू कर दिया है।
ओपीसीडब्ल्यू ने मंगलवार को कहा था कि वह युद्ध ग्रस्त देश में निरस्त्रीकरण अभियान को मजबूती देने के लिए अपने निरीक्षकों के एक अन्य दल को भेज रहा है। (एजेंसी)



First Published: Friday, October 11, 2013 - 14:52


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