`बेसहारा` हुआ सहारा!

Last Updated: Saturday, March 1, 2014 - 15:07

प्रवीण कुमार
सुब्रत रॉय सहारा। एक ऐसा नाम जिसने वाकई `सहारा` शब्द की सार्थकता को साबित किया, किस कीमत पर यह अलग बहस का विषय है। लेकिन आज सुब्रत रॉय पुलिस कस्टडी में हैं और सहारा `बेसराहा` हो गया है। जी हां! डेढ़ लाख करोड़ का सहारा `बेसहारा` हो गया है। निवेशकों को 20 हजार करोड़ रुपए का भुगतान न करने के आरोप में सहारा इंडिया परिवार के चेयरमैन सुब्रत रॉय सहारा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने हाल में गैर जमानती वारंट जारी किया था और उसके बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया। उन्हें लखनऊ के सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया और फिर पुलिस कस्टडी। चार मार्च को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा और फिर आगे क्या होगा, भगवान जानें।
गोरखपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स करने वाला 30 साल का शख्स 1978 में महज हजार-डेढ़ हजार रुपये से शुरुआत कर 36 सालों में डेढ़ लाख करोड़ का बिजनेस एंपायर खड़ा कर देता हो, 12 लाख लोगों को अपने विभिन्न कंपनियों में रोजगार दे रखा हो, कुछ तो खास जरूर है इस हस्ती में। लेकिन तमाम खासियतों से इतर कुछ ऐसी खामियां भी सहारा ग्रुप में रही जिसकी वजह से सुब्रत रॉय को ये दिन देखने पड़े हैं। साल 1978 में सुब्रत रॉय ने सहारा ग्रुप बनाया था।
गोरखपुर से कारोबार की शुरूआत की थी। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी इस कामयाबी की वजह से ही टाइम मैग्जीन समेत कई पत्र-पत्रिकाओं के कवर पेज पर जगह पाने वाले सुब्रत रॉय का सहारा इंडिया करीब 12 लाख लोगों को रोजगार देने वाली निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने सहारा इंडिया से 20 हजार करोड़ से ज्यादा की रकम निवेशकों को लौटाने के लिए कहा था।
सहारा समूह के प्रमुख होने के नाते सुब्रत रॉय दलील देते रहे कि वह ज्यादातर पैसे लौटा चुके हैं। सिर्फ 5 हजार करोड़ की देनदारी बनती है जो वह सेबी को सौंप चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2012 में ही सहारा के खिलाफ फैसला लिया था, लेकिन 2 साल से ये कंपनी अदालत और निवेशकों को गुमराह करती रही। 2012 के बाद से कंपनी एक अदालत से दूसरी अदालत के चक्कर काटती रही और सेबी से बचने की कोशिश करती रही।
सेबी से जब सहारा कानूनी लड़ाई लड़ रहा था तो उस वक्त उसने मार्केट रेगुलेटर की नीयत पर सवाल उठाते हुए अखबारों में विज्ञापन की जंग शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब सुप्रीम कोर्ट के गैर जमानती वारंट के बाद भी अखबार में पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ। विज्ञापन पर गौर करें तो सहारा प्रमुख को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट भी उनके साथ नाइंसाफी कर रहा है।
एक आंकलन के मुताबिक सहारा समूह का अनुमानित नेट वर्थ 70,000 करोड़ रुपये का है। इसके पास करीब 120 कंपनियां हैं। इनके 8 करोड़ निवेशक हैं और 12 लाख कर्मचारी हैं। सहारा समूह के पास 37,000 एकड़ जमीन है। सहारा पैराबैंकिंग, रियल इस्टेट, होटल, मीडिया, हेल्थकेयर, डेयरी, रिटेल और खेल कारोबार में है। सहारा ने 4400 करोड़ रुपये में न्यूयॉर्क प्लाजा और ड्रीम न्यूयॉर्क खरीदा था और लंदन का मशहूर होटल ग्रॉसवेनर हाउस भी सहारा का ही है।
सहारा प्रमुख के बारे में कहा जाता है कि वह बड़े ही राजसी ठाठ बाट से जीते हैं। सत्ता, समाज, बॉलीवुड और खेलों की दुनिया पर समान दखल रखने वाले सहारा प्रमुख का घर अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस की तरह बना है। एक निजी शहर में बना उनका एक घर लाखों डॉलर की लागत से तैयार हुआ है जो ब्रिटेन के शाही निवास बकिंघम पैलेस का डुप्लीकेट है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास रोल्स रॉयस, बेनटली और बीएमडब्लू जैसी महंगी कारों का बेड़ा है। उनके पास निजी विमानों और हेलिकॉप्टरों का भी अपना बेड़ा है।
बहरहाल, आज देश में सुब्रत रॉय पर कसते कानूनी फंदे के बीच अहम सवाल यह है कि डेढ़ लाख करोड़ की परिसंपत्ति वाले सहारा इंडिया परिवार का अस्तित्व मिट जाएगा? अगर इस कानूनी फंदे से सहारा इंडिया पर संकट आता है तो फिर उन 12 लाख सहारा कर्मचारियों के भविष्य की फिक्र कौन करेगा? यह बड़ा सवाल है और सुब्रत रॉय या फिर सहारा इंडिया समूह पर कोई कार्रवाई किए जाने से पहले देश की न्यायपालिका को भी इसपर सोचना होगा।



First Published: Saturday, March 1, 2014 - 12:55


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