MCI में भ्रष्टाचार जड़ से खत्म करूंगा : डॉ. हर्षवर्धन

Last Updated: Wednesday, June 11, 2014 - 21:10
MCI में भ्रष्टाचार जड़ से खत्म करूंगा : डॉ. हर्षवर्धन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) में फैले भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने को लेकर काफी प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। उनका कहना है. 'ये मेरा सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री ने मुझे इस योग्य समझा कि मैं देश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की जिम्मेदारी संभालूं और मुझे पूरा विश्वास है कि देश के सभी स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ मिलकर अपने स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम और स्वयंसेवी संस्थाओं को साथ लेकर हम स्वास्थ्य को एक बड़ा जन आंदोलन बनाएंगे। ये मेरा कमिटमेंट है। सियासत की बात में इस बार ज़ी रीजनल चैनल्स के संपादक वासिंद्र मिश्र ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से हैल्थ सेक्टर को लेकर लंबी बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश--

वासिंद्र मिश्र - डॉ. हर्षवर्धन देश का जो सबसे महत्वपूर्ण विभाग है हेल्थ... वो कभी भी प्रायोरिटी सेक्टर में नहीं रहा चाहे कोई भी सरकार रही हो...आप किस तरह से हेल्थ को प्रयोरिटी सेक्टर में लाने की कोशिश करेंगे ?

डॉ. हर्षवर्धन- देखिए काम करके ही हेल्थ को प्रायोरिटी सेक्टर में लाया जा सकता है और मैं समझता हूं कि स्वास्थ्य और शिक्षा नरेंद्र मोदी जी की बड़ी प्रायोरिटीज में से हैं... मैं ये समझता हूं कि ये मेरा सौभाग्य है कि उन्होंने मुझे इस योग्य समझा की मैं देश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की जिम्मेदारी संभालूं..और मुझे पूरा विश्वास है कि देश के सभी स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ मिलकर ..अपने स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम और स्वयंसेवी संस्थाओं को साथ लेकर हम स्वास्थ्य को एक बड़ा जन आंदोलन बनाएंगे ..ये मेरा कमिटमेंट है..

 

वासिंद्र मिश्र - नब्बे के दशक में देश में एक नई अर्थव्यवस्था आई थी... अलग अलग क्षेत्रों में प्राइवेट सेक्टर का हस्तक्षेप बढ़ा ... देखा जाए प्राइवेट सेक्टर के जरिए हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में जितना exploitation हुआ, उतना किसी सेक्टर में नहीं हुआ..हम कह सकते हैं कि आम आदमी के हेल्थ को प्राइवेट सेक्टर और प्राइवेट कंपनियों ने जैसे पैसा छापने का एक जरिया बना लिया..तो ये जो गंभीर समस्या बन गई है पूरे देश की तो इस समस्या से आप किस तरह निपटेंगे ?

डॉ. हर्षवर्धन- देखिए... प्राइवेट सेक्टर में भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो ईमानदारी से और कर्तव्यविष्ठ होकर काम कर रहे हैं... हां इसमें भी कोई शक नहीं है कि बहुत सारे लोग प्राइवेट संस्थानों पर या कई अन्य जगहों पर Exploit भी कर रहे हैं... मैं कई साल से मेडिकल काउंसिल से अपील करता रहता हूं कि MCI को अपने प्रोफेशन के लोगों को ऑडिट करने का, उनके अंदर अगर कोई ब्लैकशीप है ..तो उनको सज़ा देने का एक मैकेनिज्म डेवलप करना पड़ेगा । मुझे लगता है कि बड़ी संख्या में डॉक्टर ईमानदारी से अच्छा काम कर रहे हैं...अच्छा काम करना चाहते हैं । देश के लिए समाज के लिए..उनकी अच्छी भावना है । जब मैंने 1994 में स्वास्थ्य मंत्री के रुप में पोलियो उन्मूलन का अभियान शुरु किया तो सरकारी हों या प्राइवेट, सभी डॉक्टर्स को हमने सबको इन्वॉल्व किया..और इतना बडा़ अभियान खड़ा कर दिया.. कि बडे़-बड़े अस्पतालों के प्रोफेसर और सीनियर कंसलटेंट्स ने सड़कों पर उतर कर पोलियो उन्मूलन अभियान को सपोर्ट किया..मुझे लगता है कि जब स्वास्थ्य को बड़ा आंदोलन बनाना है..तो जिसका जितना सहयोग चाहिए उसे प्रेम से, उनकी हौसला अफज़ाई कर उनका सहयोग लेकर आगे बढ़ना होगा ... जो लोग गलत काम कर गए हैं ... उनके ऊपर भी मैकेनिज्म डेवलप करना पड़ेगा..

 

वासिंद्र मिश्र - डॉ साहब ये सच हे कि ...आपके नेतृत्व में बहुत ही शानदार काम हुआ ..और देश में शायद इतनी कामयाब और कोई योजना नही रही होगी...जितनी की पोलियो उन्मूलन की रही..कमोबेश उसी तरह की एक महामारी..का रुप धारण कर चुका है इंसेफ्लाइटिस ..इसकी जद में पूरा पूर्वांचल, पूर्वी बिहार से लगे हुए जिले आ चुके हैं ... उस दिशा में ना तो किसी एजेंसी का ध्यान जा रहा है ..और ना ही कोई सरकार इसपर ध्यान दे रही है ... चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दल और नेता इंसेफ्लाइटिस की बात करते हैं.... चुनाव जब खत्म हो जाता है तो बात वहीं की वहीं रह जाती है ...आपके पास क्या एक्शन प्लान है ..इस बीमारी से निपटने के लिए ?

डॉ. हर्षवर्धन- देखिए, एक डॉक्टर होने के नाते तो मुझे इंसेफ्लाइटिस के बारे में ये पता था कि ये बीमारी है....किताबों में पढ़ता रहा हूं लेकिन जब इलेक्शन के दौरान कैंपेन करने पूर्वांचल गया तब मुझे इसकी गंभीरता का पहली बार अहसास हुआ... स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद ..एक हफ्ते में मैंने जितनी मीटिंग की सबमें मैंने इसके बारे में बहुत गहराई से बात की... ये एक ऐसा विषय है जिसे बहुत गंभीरता से लेना है... .पिछले 3-4 दिनों में मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के जिलो में 44 बच्चों की मौतें... हमने इसके लिए एक मीटिंग बुलाई थी, जिसमें वहां के स्वास्थ्य सचिवों, सांसदों को बुलायाऔर अपने राष्ट्रीय स्तर के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए थे ....इसके साथ-साथ रिसर्च से जुड़े लोगों को बुलाकर भी विस्तार से मीटिंग की है... और उसके बाद मुझे लगता है कि सब प्रभावित जिलों में पल्स पोलियों की तर्ज पर टीकाकरण की जरूरत है .. इसके साथ साथ जरूरत है कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के लिए 100 वेंटीलेटर हो, ..जिससे बच्चों के लिए आईसीयू हों, उन इलाकों में जिला अस्पतालों में इसके लिए स्पेशलाइज्ड वार्ड हों ...सर्विलांस की सुविधा हो जैसे पोलियो के लिए पूरे देश में बनाए गए हैं ... मैं इस महीने के अंदर अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन के अधिकारियों से भी मिलने वाला हूं... इनके साथ भी चर्चा करने वाला हूं...बिहार में पोलियो, स्माल पॉक्स जैसी कई और बीमारियों के इरेडिकेशन से जुड़े हुए बच्चों के डॉक्टर जैकब जॉन को बिहार भेजा हुआ है... कुल मिलाकर हमने इंसेफ्लाइटिस के इरेडिकेशन की कोशिशें तेज कर दी है, जल्दी ही गोरखपुर के लिए वेंटीलेटर वगैरह लाने का काम शुरु हो जाएगा... हमारी कोशिश है कि पुणे की नेशनल वायरोलॉजी लैब की तर्ज पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और बिहार के तीन-चार मेडिकल कॉलेज में भी लैब बनाए जाएं

 

वासिंद्र मिश्र - डॉ, साहब सबसे बड़ी समस्या प्लानिंग की नहीं है.. दिक्कत ये है कि प्लानिंग के हिसाब से काम नहीं हो पाता ... दो सरकारों के बीच में तालमेल का अभाव दिखता है.... कई बार देखा गया है कि केंद्र सरकार की तरफ से जो भी शुरुआत की गई उसे पूरा करने में राज्य सरकार ने वह फुर्ती नहीं दिखाई या ये कहें कि जो उनका नज़रिया होना चाहिए था वो नहीं रहा ... इस बार आप क्या उम्मीद करते हैं ?

डॉ हर्षवर्धन--देखिए मुझे खुद पर पूरा विश्वास है कि चाहे कोई भी स्वास्थ्य मंत्री रहे ... कोई भी स्वास्थ्य अधिकारी हो मैं उसके साथ पूरा तालमेल बना सकता हूं ..मैं स्वयं मॉनिटर करुंगा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में देशभर में किसी भी तरह कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मैं अपने व्यवहार आचरण और अपने अधिकारियों के काम से किसी भी तरह की राजनीति नहीं आने दूंगा... मुझे पूरा विश्वास है कि राज्यों में जो स्वास्थ्य मंत्री हैं उनकी भी पूरी इच्छा होगी कि उनके राज्य में लोग स्वस्थ रहें ... उनके साथ विस्तार से बातचीत करेंगे..

 

वासिंद्र मिश्र - डॉक्टर साहब ये बहुत अच्छा इनिशिएटिव है कि हेल्थ को राजनीति से अलग रखना चाहिए, लेकिन हेल्थ सेक्टप में सबसे बड़ा रोल क्वालिटी एज्यूकेशन का होता है ..अगर आप डॉक्टर तैनात भी कर रहे हैं और अगर उसे समझ नहीं है वो सही डायग्नोसिस नहीं कर पाता .. अगर वो डिग्री खरीदकर लाया है तो वो किस तरह का इलाज करेगा ... आप अच्छी तरह समझ सकते हैं, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया पिछले लगभग10 साल से लगभग चर्चा में है... जो उसके मुखिया रहे हैं वो घूस लेने के आरोप में कई महीने तक जेल में भी रहे.. कहा जाता है कि कानूनी कारणों से वो MCI से अलग रहते हुए भी अपना दखल रखते हैं .. MCI पर काबिज लोग उन्हीं के हैं .. और वो अपने ढंग से देश के मेडिकल कॉलेजों को कंट्रोल कर रहे हैं, इससे पहले आरोप लगते रहे हैं कि पहले के दो स्वास्थ्य मंत्री भी MCI के कुछ चुनिंदा अधिकारियों के दवाब में रहे हैं ... आप क्वालिटी एज्यूकेशन और क्वालिटी कंट्रोल के लिए बनाई गई इस संस्था की वर्किंग में कैसे सुधार लाएंगे ?

डॉ हर्षवर्धन- देखिए, मै दो बातें आपको कहूंगा कि मैं आपकी इस बात से सहमत हूं मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया कि जो जिम्मेदारी रही है मेडिकल एज्यूकेशन को निष्पक्षता से स्वच्छ रखना, पारदर्शी रखना, अपग्रेड करके जनता के भले के लिए काम करना, शायद उस जिम्मेदारी को वो बखूबी निभा नहीं पाई, और पिछले अनेक वर्षों में ये भ्रष्टाचार के बड़े केंद्र के रुप में इसकी समाज में एक प्रकार से प्रतिष्ठा गिरी है, लेकिन एक बात मैं आपको विश्वास के साथ कह सकता हूं कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अंदर जितनी भी गड़बड़ियां हो रही हैं उनको जड़ से समाप्त करने की इच्छा शक्ति मैं रखता हूं, और मुझे पूरा विश्वास है कि इसमें मुझे पूरे मेडिकल प्रोफेशनल्स का साथ मिलने वाला है ...मुझे हमारे नेतृत्व का भी साथ मिलने वाला है और हम इसमें किसी तरह की कोताही नहीं करेंगे ... मेडिकल एज्यूकेशन के मसले पर देश में जो भी गड़बड़ियां हो रही हैं ... पोस्ट ग्रेजूएशन के लिए प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में कैपिटेशन फीस ली जा रही है.. इस पर हम गंभीरता से काम करेंगे ... मैं इसके अंदर अपने प्रधानमंत्री जी से भी सहयोग लूंगा, अपने कैबिनेट के सहयोगियों से भी मदद लूंगा और सबके सहयोग से देश में मेडिकल शिक्षा का स्तर बेहतर करूंगा

 

वासिंद्र मिश्र - डॉक्टर साहब, थोड़ी सी राजनीति की बात हो जाए..दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने आपको एक फेस के रुप में प्रोजेक्ट किया था चुनाव में और पार्टी को काफी उससे फायदा भी मिला, और ये भी सच्चाई है कि दिल्ली में बीजेपी जिस तरह से डिवाइडेट हाउस थी, उस डिवाइडेट हाउस को अगर किसी सबल और सशक्त नेतृत्व दिया तो डॉक्टर हर्षवर्धन ने दिया, अब डॉक्टर हर्षवर्धन दिल्ली की राजनीति से केंद्र की राजनीति में हैं, और माना जा रहा है कि दिल्ली में जब भी विधानसभा का चुनाव होगा, तो ऐसी स्थिति पूरे देश के साथ साथ आपकी सरकार और आपकी पार्टी से दिल्ली की जनता भी काफी उम्मीदें रखती है ... ऐसी स्थिति में आप दिल्ली में अपने विकल्प के रुप में किसे मानते हैं ?

डॉ हर्षवर्धन- देखिए, इन विषयों हमारी पार्टी में पार्टी के वरिष्ठ लोग तय करते हैं, उनका बहुत अनुभव है, बहुत वर्षों से वो ये सब काम कर रहे हैं, तो इस संदर्भ में मैं अपना कोई भी विचार रखूं ये ऊचित नहीं होगा, मुझसे मेरा ओपिनियन मांगा जाएगा, मैं जरुर दूंगा, लेकिन डॉक्टर हर्षवर्धन के बारे में तो डॉक्टर हर्षवर्धन ने कभी कोई फैसला किया नहीं , और बिना मांगे हम सलाह आराम से देते भी नहीं हैं, लेकिन ये है कि पार्टी के जो बड़े हमारे नेता हैं, उनकी योग्यता, उनका अनुभव, उनकी दृष्टि, उनकी सोच, उनकी योजना पर हम लोगों को भरोसा है, वो जो भी पार्टी के लिए फैसला करेंगे, वो हमारी पार्टी के सभी कार्यकर्ता उसको मानकर उसके उपर आगे बढ़ेंगे

 

वासिंद्र मिश्र - आपके बारे में तो ये भी चर्चा रहती है कि दिल्ली के बारे में जब फैसला होना था..आपको उस फैसले की जानकारी लगभग डेढ़ दो साल पहले से थी, लेकिन आपने अपनी तरफ से उसको सार्वजनिक नहीं किया, हम ये जानना चाह रहे हैं कि जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से अचानक दिल्ली की जनता बिजली, पानी जैसे मुद्दों को लेकर अपना धैर्य खो रही है तरह तरह की प्रॉब्लम अचानक सामने आ रही है...

डॉ हर्षवर्धन-इसमें कोई शक की बात नहीं है कि दिल्ली की जनता को एक चुनी हुई सरकार नहीं होने से बहुत तकलीफ हो रही है, अरविंद केजरीवाल जी से बहुत उम्मीदें थीं, उन्होंने भले ही गलत तरीके से सरकार बनाई , उसी भ्रष्ट कांग्रेस के साथ मिलकर बनाई जिसका विरोध करते थे, लेकिन उस 49 दिन में भी कुछ गहराई और गंभीरता से काम करते दिल्ली के लिए कुछ तो योजनाओं पर काम करते , कुछ दिशा देते, कुछ करते, लेकिन ना तो उन 49 दिन उन्होंने कोई भी काम किया गंभीरता से, सिर्फ प्रर्दशन, संविधान का अपमान करने में वो लगे रहे, और फिर 49 दिन के बाद भी झूठा बहाना बनाकर वो छोड़कर चले गए, तो निश्चित रुप से दिल्ली के लोगों को तकलीफ है, 15 साल के उन्होंने कुशासन से मुक्ति पाई, लेकिन जो है उसके बावजूद भी उनको एक सही मायने में सरकार मिली नहीं है, और अब लेफ्टिनेंट गवर्नर साहब और सरकारी अधिकारी हैं, उनके भरोसे दिल्ली की व्यवस्था चल रही है, उसमें परेशानियां निश्चित तौर पर पिछले दिनों आंधी-तूफान के कारण आई हैं, बिजली की कमी के कारण लोगों को बहुत तकलीफें हो रही हैं.., जो लेफ्टिनेंट गवर्नर साहब से हमारी आए दिन बात होती है वो यही कहते है कि कुछ ट्रांसमिशन लाइन खराब हो गई हैं, तो उनको ठीक करने में कुछ समय लग रहा है, स्वाभाविक है कि दिल्ली की जनता के लिए तकलीफ का विषय है, चुनी हुई सरकार दिल्ली को मिलेगी, वो दिल्ली के बेहतरी के लिए होगा,

 

वासिंद्र मिश्र - -डॉक्टर साहब आपकी नजर में इसका निदान क्या है... फिर जोड़-तोड़ करके सरकार बनाना, या दिल्ली विधानसभा को भंग कर एक बार फिर जनादेश के लिए जाना ?

डॉ हर्षवर्धन-अगर आप मेरी राय जानना चाहते हैं तो मैंने 8 दिसंबर को सार्वजनिक तौर पर कहा था जब चुनाव के नतीजे आए थे, उस समय भी मैने यही कहा था कि किसी भी जोड़-तोड़ से गलत तरीके से सरकार बनाने के पक्ष में हम नहीं हैं, अगर उस तरीके से हमारी पार्टी को सरकार बनानी होती, तो हमने 8 दिसंबर को ही बना ली होती, हमें विधानसभा में आकर शपथ लेने में कोई दिक्कत नहीं थी और हमें समर्थन देने वाले भी शायद बाद में बहुत लोग तैयार हो जाते, लेकिन वो तरीका जो है मैं उसको स्वच्छ राजनीति ना मानता हूं, और ना ही मुझको लगता है कि उस तरीके को अपनाने की आवश्यकता है, जो जनता के बीच में दोबारा जाकर और सरकार चुनी जाए, जनता का आशीर्वाद लिया जाए, शायद यही एक विकल्प अब दिल्ली वालों के लिए बाकी है 

एक्सक्लूसिव

First Published: Wednesday, June 11, 2014 - 21:10


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