मोदी का मेकओवर प्लान

मिशन 2014 के लिए बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का मेकओवर प्लान अब धीरे-धीरे परवान चढ़ता दिखाई दे रहा है। वो मोदी जिनको कुछ दिनों पहले तक अपने ही कार्यक्रम में मुसलमानों की ओर से दी गई टोपी पहनने से एतराज हुआ करता था।

Updated: Oct 28, 2013, 05:05 PM IST

वासिंद्र मिश्र
संपादक, ज़ी रीजनल चैनल्स

मिशन 2014 के लिए बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का मेकओवर प्लान अब धीरे-धीरे परवान चढ़ता दिखाई दे रहा है। वो मोदी जिनको कुछ दिनों पहले तक अपने ही कार्यक्रम में मुसलमानों की ओर से दी गई टोपी पहनने से एतराज हुआ करता था, वो मोदी जिनका पीछा कई साल पहले हुए गोधरा कांड के कलंक से नहीं छूट रहा है, वो नरेंद्र मोदी जिनको राज धर्म का पाठ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को पढ़ाना पढ़ा था, वही मोदी अपनी चुनावी जनसभाओं में भ्रष्टाचार कुशासन, बिगड़ती कानून व्यवस्था के साथ-साथ मुसलमानों के साथ हो रही नाइंसाफी को भी उठाते दिखाई दे रहे हैं।
मोदी की भाषा, विचारधारा और चुनावी मुद्दों की प्राथमिकताओं में मुसलमानों का मुद्दा जुड़ना अचानक नहीं है। दरअसल ये आरएसएस की सोची समझी चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा है। संघ परिवार समय की आवश्यकता और देश के मिजाज को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनैतिक एजेंडा परोक्ष रूप से तय करता है। जिस समय बीजेपी की राजनीतिक कमान अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी के हाथों में थी उस समय अटल बिहारी वाजपेयी को लगातार उदारवादी नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया जाता रहा।
गुजरात में जब तक मोदी को एक कट्टर हिंदू नेता प्रोजेक्ट करने की आवश्यकता महसूस की गई तक तक मोदी आडवाणी के मुकाबले ज्याद प्रभावी और प्रखर हिंदुत्व के पोषक माने जाते रहे और अब जब देश की कमान मोदी को सौंपने की कोशिश है तब उनकों एक उदारवादी नेता के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रहा है।

आरएसएस की तरफ से एक अलग प्रकोष्ठ बनाया गया है जिसकी जिम्मेदारी श्री इंद्रेश जी को सौंपी गई थी। इंद्रेश जी को ही मोदी की जनसभाओं में मुसलमानों को जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है और इसकी बानगी राजस्थान के जयपुर और मध्यप्रदेश के भोपाल की जनसभा में देखने को मिली जब कई मुस्लिम चेहरे भी इन जनसभाओं में नजर आए।
बीजेपी से अल्पसंख्यकों को खास तौर पर मुसलमानों को जोड़ने की कोशिश अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में ही शुरू हो गई थी। देश के चुनिंदा शायरों को इकट्ठा करके एक कौमी कारवां निकाला गया था लेकिन इसमें पार्टी को खास कामयाबी नहीं मिल पाई लेकिन अब फिर एक बार चुनाव के मद्देनजर इस प्रयोग को इस्तेमाल में लाया जा रहा है। अब देखना होगा कि लोकसभा चुनाव और पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में आरएसएस के मोदी मेकओवर प्लान का कितना फायदा बीजेपी को मिलेगा।
(लेखक ज़ी रीजनल चैनल्‍स के संपादक हैं और आप इन्हें टि्वटर पर फॉलो कर सकते हैं

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