GSAT-11: अब भारत में भी विदेश जैसी स्‍पीड से चलेगा इंटरनेट, एक सेकेंड में डाउनलोड हो जाएंगी 3 फिल्में

भारत के सबसे वजनी सैटेलाइट जीसैट-11 की लॉन्चिंग से भारत में संचार क्रांति आएगी. इससे आप एक सेकंड में एक-एक GB की तीन फिल्में डाउनलोड कर सकेंगे.

नीरज चौधरी | Dec 05, 2018, 11:47 AM IST

नई दिल्ली: भारत के सबसे वजनी सैटेलाइट जीसैट-11 की बुधवार तड़के फ्रेंच गुयाना से एरिएयनस्पेस रॉकेट की मदद से सफल लॉन्चिंग की गई. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी देते हुए बताया कि जीसैट-11 की लॉन्चिंग से देश में ब्रॉडबैंड सेवा को और बेहतर बनाया जाएगा. इस बदलाव के होने के बाद आप एक सेकंड में एक-एक GB की तीन फिल्में डाउनलोड कर सकेंगे. इसके अलावा आपको केबल, डिश और इंटरनेट के तारों से भी आपको छुटकारा मिल सकता है. 5854 किलोग्राम वजनी जीसैट की लागत करीब 500 करोड़ रुपए आई है. दरअसल यह इसरो के इंटरनेट बेस्ड सैटेलाइट सीरीज का हिस्सा है. इसका मकसद इंटरनेट स्पीड को बढ़ाना है. इसके तहत अंतरिक्ष में 18 महीने में तीन सैटेलाइट भेजे जाने हैं. पहला सैटेलाइट जीसैट-19 बीते साल जून में भेजा जा चुका है. जीसैट-11 को जल्द लॉन्च करने की तैयारी है. इसके बाद जीसैट-20 को साल के आखिरी तक भेजने की योजना है. ये तीनों मल्टीपल स्पॉट बीम टेक्नोलॉजी पर काम करेंगे. आइए जानते हैं GSAT-11 से जुड़ी और भी खास बातें...

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सफल लॉन्चिंग

gsat 11 launched by isro

दक्षिण अमेरिका के पूर्वोत्तर तटीय इलाके में स्थित फ्रांस के अधिकार वाले भूभाग फ्रेंच गुयाना के कौरू में स्थित एरियन प्रक्षेपण केन्द्र से भारतीय समयानुसार तड़के दो बजकर सात मिनट पर रॉकेट ने उड़ान भरी. एरियन-5 रॉकेट ने बेहद सुगमता से करीब 33 मिनट में जीसैट-11 को उसकी कक्षा में स्थापित कर दिया.

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30 मिनट की उड़ान

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एजेंसी ने बताया कि करीब 30 मिनट की उड़ान के बाद जीसैट-11 अपने वाहक रॉकेट एरियन-5 से अलग हुआ और जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित हुआ. यह कक्षा उपग्रह के लिए पहले से तय कक्षा के बेहद करीब है.

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सैटेलाइट का वजन करीब 5,854 किलो

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ISRO के प्रमुख के. सिवन ने सफल लॉन्चिंग के बाद कहा, ‘‘भारत द्वारा निर्मित अब तक के सबसे भारी, सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली उपग्रह का एरियन-5 के जरिये आज सफल प्रक्षेपण हुआ.’’ उन्होंने कहा कि जीसैट-11 भारत की बेहरीन अंतरिक्ष संपत्ति है. इसरो द्वारा बनाए गए इस सैटेलाइट का वजन करीब 5,854 किलोग्राम है.

 

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15 साल का जीवनकाल

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यह अत्याधुनिक और अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह है जिसे इसरो के आई-6के बस के साथ कंफिगर किया गया है. इसका जीवन काल 15 साल या उससे ज्यादा होने का अनुमान है.

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एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जीसैट-11 के एरियन-5 से अलग होने के बाद कर्नाटक के हासन में स्थित इसरो की मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी ने उपग्रह का कमांड और नियंत्रण अपने कब्जे में ले लिया. एजेंसी के मुताबिक जीसैट-11 बिलकुल ठीक है.

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जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित

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सैटेलाइट को फिलहाल जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया गया है. आगे वाले दिनों में धीरे-धीरे करके चरणबद्ध तरीके से उसे जियोस्टेशनरी (भूस्थिर) कक्षा में भेजा जाएगा. जियोस्टेशनरी कक्षा की ऊंचाई भूमध्य रेखा से करीब 36,000 किलोमीटर होती है.

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जब काम करने लगेगा GSAT-11

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इसरो ने बताया कि जीसैट-11 को जियोस्टेशनरी कक्षा में 74 डिग्री पूर्वी देशांतर पर रखा जाएगा. उसके बाद उसके दो सौर एरेज और चार एंटिना रिफ्लेक्टर भी कक्षा में स्थापित किए जाएंगे. कक्षा में सभी परीक्षण पूरे होने के बाद उपग्रह काम करने लगेगा.

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हाई-स्पीड डेटा

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इसरो के मुताबिक जीसैट-11 भारत की मुख्य भूमि और द्वीपीय क्षेत्र में हाई-स्पीड डेटा सेवा मुहैया कराने में मददगार साबित होगा. उसमें केयू बैंड में 32 यूजर बीम जबकि केए बैंड में आठ हब बीम हैं.

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पीएम नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

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यह सैटेलाइट भारत में 16 जीबीपीएस डेटा स्पीड मुहैया करा सकेगा. उन्होंने बताया कि चार संचार सैटेलाइटों के माध्यम से देश में 100 जीबीपीएस डेटा स्पीड मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया है. इस श्रेणी में जीसैट-11 तीसरा सैटेलाइट है.

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