शादी में आ रही है परेशानी और विवाह योग बनाने के लिए ऐसे करें हरतालिका तीज पर पूजा

भारत में हर त्योहार का एक अलग महत्व और मान्यता है. खासकर महिलाओं के लिए इतने त्योहार बनाए गए कि वह पूरा साल इन्हें मनाने में ही चला जाता है. 

आशु दास | Sep 12, 2018, 10:31 AM IST

हरतालिका तीज महिलाओं का खास त्योहार है. ज्यादातर लोगों को लगता है कि हरतालिका तीज सिर्फ शादी-शुदा लोगों का त्योहार है, लेकिन ऐसा नहीं हैं. हरतालिका तीज वह लड़कियां जिनकी शादी टूटने की कगार पर है या फिर शादी में अड़चनें आ रही हैं तो वह भी इस व्रत को कर सकती है. 

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12 सितंबर को मनाई जाएगी हरतालिका तीज

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भाद्र पद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज इस बार 12 सितंबर को मनाई जाएगी. कुछ क्षेत्रों में इसे हरतालिका तीज कहते हैं तो कहीं इसे तीजा कहकर संबोधित किया जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. वहीं, शादी लायक हो चुकी कन्याओं को ये व्रत रखने के बाद मनचाहे वर की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं भारत के इस पर्व के दिन कौन से उपाय करने से क्या लाभ होता है और इस व्रत की पूजन विधि क्या है....

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शीघ्र विवाह के सरल उपाय

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पार्थिव शिवलिंग बनाकर 21 बेल पत्र से पूजा करके 21 परिक्रमा करें -पार्थिव शिवलिंग को बेल के पेड़ के नीचे ही रख दें. शीघ्र विवाह के लिए मां कात्यायिनी के विवाह मंत्र का जाप करें जब तक विवाह न हो जाए. मां कात्ययिनी का विवाह मंत्र इस प्रकार है:   

कात्यायिनी महामाये महायोगिनीधीश्वरी नन्द-गोपसुतं देवि पतिं में कुरु ते नम: 

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पूजन सामग्री

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हरतालिका तीज पर पूजन के लिए - गीली काली मिट्टी या बालू रेत, बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, सभी प्रकार के फल एवं फूल, फुलहरा (प्राकृतिक फूलों से सजा), मां पार्वती के लिए सुहाग सामग्री - मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग पुड़ा आदि, श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, घी, दही, शक्कर, दूध, शहद पंचामृत के लिए आदि.

 

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पूजा की विधि

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हरितालिका तीज का व्रत भी निराहार और निर्जला रहकर किया जाता है. महिलाएं व युवतियां भगवान शिव को गंगाजल, दही, दूध, शहद आदि से स्नान कराकर उन्हें फल समर्पित करती हैं. रात्रि के समय घरों में सुंदर वस्त्रों, फूल पत्रों से सजाकर फुलहार बनाकर शिव और पार्वती की पूजा की जाती है. गांव-शहर के प्रमुख बाजारों में गौरा पार्वती मिलते हैं. तीज पर पार्वती जी के इसी स्वरूप की पूजा की जाती है. सुबह 4.00 बजे उठकर बिना बोले नहाना होता है और फिर दिन भर निर्जला व्रत रखना पड़ता है.

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शिव को पाने के लिए पार्वती ने किया था व्रत

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इस व्रत को सबसे पहले शिव जी को पति के रूप में पाने के लिए पार्वती जी ने शादी से पहले किया था. इसलिए इस व्रत की बहुत मान्यता है. कहते हैं मां पार्वती ने जंगल में जाकर भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई सालों तक ताप किया था. और उन्होंने ये व्रत बिना पानी पिये लगातार किया था. जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकारा था. यह शिव-पार्वती की आराधना का सौभाग्य व्रत है, जो महिलाओं के लिए बेहद पुण्य और फलदायी माना जाता है.

 

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