दिवाली के बाद और बढ़ा प्रदूषण, आयुर्वेद के इन तरीकों से ऐसे करें बचाव

आनंद विहार में गुरुवार (08 नवंबर) की सुबह प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया. आज सुबह 6 बजे कुल एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) PM 2.5 805 रेकॉर्ड किया गया.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Nov 08, 2018, 11:08 AM IST

नई दिल्ली: देशभर में धूमधाम से दिवाली मनाई गई. दिवाली की खुशियों के साथ ही प्रदूषण ने लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है. दिवाली पर जलाए गए पटाखों से देशभर के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है. बात राजधानी की करें, तो पूर्वी दिल्ली में आने वाले आनंद विहार में गुरुवार (08 नवंबर) की सुबह प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया. आज सुबह 6 बजे कुल एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) PM 2.5 805 रेकॉर्ड किया गया. आनंद विहार में हवा की गुणवत्ता इंडेक्स पैमाने पर 999 (AQI) दर्ज की गई. वहीं, चाणक्यपुरी स्थित अमेरिकी दूतावास के इलाके में हवा की गुणवत्ता इंडेक्स पैमाने पर 459 (AQI) दर्ज की गई. वहीं मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम के इलाके में हवा की क्वालिटी इंडेक्स पैमाने पर 999 (AQI) दर्ज की गई. इसके अलावा दिल्ली से सटे नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गुरुग्राम में गुरुवार सुबह आसमान में धुंध छाए दिखे.

 

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सेहत के लिए हानिकारक है ये धुआं

Smoke is harmful for health

लगातार बढ़ रहें इस धुएं के गुबार लोगों की सेहत को खराब कर रहा है. इस प्रदूषित हवा में नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओजोन के खतरनाक कण रहते हैं, जिसके कारण महानगरों में रहने वाले लोगों को कई तरह की बिमारियां होने का खतरा भी रहता है. डॉक्टरों का मानना है कि महानगरों में रहने वाले लोगों के फेफड़ों (lungs) में इससे सबसे ज्यादा संक्रमण होने की संभावना रहती है. प्रदूषण के कारण फेफड़ों (lungs) के अंदर वायु प्रवाह भी कम होने लगता है, जिस कारण फेफड़ों के अंदर मकस (mucous) काफी बढ़ जाता है. ये फेफड़ों को प्रभावी तरीके से बैक्टीरिया और वायरस को फिल्टर करने से भी रोकता है. वायु प्रदूषण फेफड़ों के कैंसर का कारण भी बन सकता है.

 

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तिल का तेल होगा लाभकर

Sesame oil will be beneficial

तिल का तेल (Sesame Oil) को नाक के अंदर खींचना: हालांकि नाक हमारे शरीर का एक ऐसा अंग है जो हवा में मौजूद प्रदूषको (Pollutants) को रोकने के लिए सबसे अधिक प्रभावी फ़िल्टर है. आपको लगभग 15 मिनट तक मुंह में एक चम्मच तिल का तेल (Sesame Oil) डालकर रखना होगा और फिर उसे उगल देना होगा. इस उपाय से आप हानिकारक बैक्टीरिया को साफ कर सकते हैं. साथ ही यह हमारे मुंह के बाहर कई तरह की एलर्जी से लड़ने के लिए मौजूद श्लेष्म स्तर (mucous lining) को भी मजबूत करता है.

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अभ्यंगा ऑयल मसाज

Steam Oil Massage

इस उपाय से हमारे त्वचा (Skin) के अंदर मौजूद उन विषाक्त पदार्थ (Toxins) से छुटकारा पाने में मदद करता है, जो त्वचा (Skin) में चले जाते हैं. हमारे शरीर को विषाक्त पदार्थ (Toxins) से छुटकारा दिलाने (detoxifying) में यह रामबाण साबित हो सकता है. अभयंगा के लगातार प्रयोग आपके शरीर को रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है और आपको हमेशा ऊर्जावान रखता है. आप ऑयल मसाज के लिए तिल के तेल (Sesame Oil) या फिर किसी अन्य आयुर्वेदिक तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

 

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धूपन

Smoke by burning herbs

आप जड़ी-बूटीयों को जलाकर धुआं भी ले सकते हैं. इसके लिए आप गूगल, करूर (Campour) अगुरु, लोबान, शालाकी जैसे जड़ी बूटीयों का इस्तेमाल कर सकते हैं. जड़ी बूटियों को जलाने और इन जड़ी बूटियों के धुएं को सांस लेने की प्रक्रिया आयुर्वेद में धूपन कहा जाता है. इससे न केवल हवा शुद्ध होती है बल्कि यह एक प्रभावी कीटाणुरोधक (Insecticide) के रूप में भी काम करता है. गूगल और शालाकी जैसी जड़ी बूटियां को कमरे में जलाकर रखने से आप अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) जैसी समस्या से भी दूर हो सकते हैं.

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स्वेदना

Sweating

पसीना बहाने की इस प्रक्रिया को आयुर्वेद में स्वेदना कहा जाता है. सर्वांग (पूरा शरीर) को स्वेदना के माध्यम से जिसमें दशमूल जड़ी बूटी (दस पौधों की जड़ें) का उपयोग किया जाता है. इससे हमारे शरीर के अंदर मौजूद विषाक्त पदार्थ (Toxic Elements) बाहर करने में मदद करता है. इसके अलावा आप फेसियल स्टीम का भी प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए आप गर्म पानी में नीलगिरी ऑयल, तुलसी तेल, चाय के पेड़ का तेल और कैरम के बीज को मिलाकर चेहरे पर भाप ले सकते हैं.

 

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नीम का पानी

Neem water

इसके साथ त्वचा और बालों को धोकर भी आप अपनी त्वचा (Skin) और श्लेष्म झिल्ली (Mucous Membrance) में फंस गए प्रदूषक (pollutants) को साफ कर सकते हैं.

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ज्यादा से ज्यादा लगाए हरे पौधे

green plants are beneficial

आयुर्वेद कहता है कि इस मौसम में हरे पौधे सेहत के लिए काफी फायदेमंद है. इसलिए अगर संभव हो, तो अलोवेरा, तुलसी, नीम, बांस, पीस लिली, अंग्रेजी आइवी, क्राइसेंथेमम्स, अरेका हथेली, मनी प्लांट जैसे पौधे अपने घर में उगाएं. ये पौधे न केवल हवा को साफ करने में मदद करते हैं. बल्कि नीम और तुलसी जैसे पौधे भी कई बीमारियों में काफी उपयोगी होते हैं. 

 

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डाइट पर दें ध्यान

Give attention to diet

आप हमेशा ताजा पके हुए गर्म भोजन करने का प्रयास करें. साथ हीं अपने आहार (Food Diet) में अदरक और कैरम के बीज को भी शामिल करें. श्वसन और प्रतिरक्षा प्रणाली( Respiratory and immunine system) को मजबूत करने के लिए तुलसी, पिपली, ट्रिफाला और घी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

 

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