गणेश चतुर्थी 2018: इस दिन चांद देखना माना जाता है अशुभ, लगता है श्राप

13 सितंबर गुरुवार को गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू हो रहा है. गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी या फिर गणेश महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है.

वंदना यादव | Sep 12, 2018, 18:29 PM IST

13 सितंबर गुरुवार को गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरू हो रहा है. गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी या फिर गणेश महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का त्योहार 10 दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन चांद को अर्घ्य देकर पूजा शुरू होती है. वहीं उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी के दिन चांद को न देने की परंपरा है. ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि चतुर्थी का चांद देखने से कलंक लगता है. 

1/10

13 सितंबर से 23 सितंबर तक गणेश उत्सव का त्योहार

Ganesh Chaturthi Fascinating Facts

गणपति को अपने पिता भगवान से वरदान मिला था कि सभी शुभ कामों में पहला निमंत्रण उन्हें दिया जाएगा. इसी के साथ गणेश जी को प्रथम निवेदन भगवान भी मानते हैं जो भक्तों के कष्ट एक ही पुकार में दूर कर देते हैं. 13 सितंबर से 23 सितंबर तक गणेश उत्सव का त्योहार धूमधाम से पूरे देश में मनाया जाएगा. 

2/10

गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र में काफी धूमधाम से मनाई जाती है

ganesh chaturthi moon considered as bad luck

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को श्री गणेश चतुर्थी के नाम से मनाया जाता है. देश भर में गणेश चतुर्थी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है. गणपति के भक्त सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी हैं. जापानी उन्हें कांगितेन के नाम से जानते हैं और इसके अलावा थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, नेपाल और चीन में भी इन्हें अलग-अलग रूपों में पूजा जाता है.

3/10

भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को श्री गणेश चतुर्थी के नाम से मनाया जाता है

Shubh muhurat of Ganesh Chaturthi

गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र में काफी धूमधाम से मनाई जाती है. 1893 में लोकमान्य तिलक ने इस समारोह को निजी से सामूहिक आयोजन में तब्दील कर दिया. उनका उद्देश्य जात-पात के फासलों को मिटाने का था और यह बात अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को बढ़ावा देने के भी बहुत काम आई.

4/10

दूसरे देशों में भी बप्पा का पूजन किया जाता है

Ganesh Sthapana Puja Dharam

पुराने लोगों की मानें तो पुराने जमाने में भारतीय कारोबारी सफर के दौरान अपने साथ भगवान गणेश की मूर्ति साथ ले जाया करते थे और इस तरह दूसरे देशों में भी बप्पा का आगमन हुआ. 

5/10

इस दिन चांद देखने की मनाही होती है

It is considered unlucky to look at the Moon during Ganesha Chaturthi

बता दें कि जहां महाराष्ट्र में गणपति आगमन को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है तो वहीं उत्तर भारत में गणेश चतुर्थी की रात के चांद को कलंक का चांद मानते हैं. इस दिन चांद देखने की मनाही होती है. ऐसा माना जाता है कि गणेश चतुर्थी का चांद देखने से श्राप मिलता है. 

6/10

गणेश चतुर्थी के चांद को कलंक का चांद मानते हैं

Ganesh Chaturthi Katha

किवदंतियों की मानें तो चतुर्थी की रात गणेश जी को उनके प्रिय व्यंजन लड्डू और मोदक खाने को मिले. गणेश जी भोजन स्वादिष्ट होने की वजह से जमकर पेट पूजा कर चुके थे और भोजन पचाने के लिए अपने बैठ घूमने निकल पड़े. छोटे से मूषकराज भरपूर शक्ति लगाकर उन्हें साधे रखने का भरपूर प्रयास कर रहे थे. लेकिन थोड़ी देर बाद मूषकराज का संतुलन बिगड़ गया और गणपति गिर पड़े. गणपति को गिरते हुए किसी ने नहीं देखा था लेकिन चतुर्थी का चांद अपनी हंसी नहीं रोक पाया और ठहाका मारकर हंस पड़ा. 

7/10

प्रथा चली आ रही है कि चतुर्थी का चांद कलंक लाता है

know more about Ganesh Chaturthi Pooja

गणपति वैसे ही गिरने से लज्जित गुस्से से भरे हुए थे उस पर चंद्रमा की हंसी ने आग में घी का काम किया. गजानन ने क्रोध में भरकर चंद्रमा को श्राप दे दिया कि जो व्यक्ति चतुर्थी के चांद के दर्शन करेगा, वह अपयश का भागी होगा. तब से ये प्रथा चली आ रही है कि चतुर्थी का चांद कलंक लाता है.

8/10

चतुर्थी का त्योहार 13 सितंबर 2018 को पड़ रहा है

Ganesh Chaturthi Pooja and methodologies

इस साल चतुर्थी का त्योहार 13 सितंबर 2018 को पड़ रहा है. अगर इस दिन की पूजा सही समय और मुहूर्त पर की जाए तो हर मनोकामना की पूर्ति होता है. ऐसा माना जाता है कि गणपति जी का जन्म मध्यकाल में हुआ था इसलिए उनकी स्थापना इसी काल में होनी चाहिए. 

9/10

पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक है

Ganesh Chaturthi The Curse of the Moon

गणेश जी का पूजन प्रातःकाल, दोपहर और शाम में से किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन चतुर्थी के दिन मध्याह्न 12 बजे का समय गणेश-पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है. मध्याह्न पूजा का समय गणेश-चतुर्थी पूजा मुहूर्त के नाम से ही जाना जाता है, इसीलिए पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे तक होता है. चतुर्थी तिथि गुरुवार 13 सितंबर को पूरे दिन रहेगी इसलिए गणेश जन्मोत्सव की पूजा और स्थापना इस दिन कभी भी कर सकते हैं. 

10/10

गणपति को का भोग लगाने का विधान है

popular myth or superstition goes along with Ganesh Chaturthi

चतुर्थी के दिन प्रातः काल उठकर सोने, चांदी, तांबे और मिट्टी के गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार विधि से उनका पूजन करते हैं. पूजन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर ब्राह्मणों को दक्षिणा देते हैं. इस पूजा में गणपति को 21 लड्डुओं का भोग लगाने का विधान है.

By continuing to use the site, you agree to the use of cookies. You can find out more by clicking this link

Close