अखंड सुहाग के लिए सुहागिनों ने रखा व्रत, ऐसे की पूजा

पटना के कई इलाकों में आज महिलाओं को वट पेड़ के नीचे पूजा करती हुईं नजर आईं. ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन व्रत होने के कारण वट वृक्ष को पंखा चढ़ाने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है.

May 15, 2018, 13:05 PM IST

पटना के कई इलाकों में आज महिलाओं को वट पेड़ के नीचे पूजा करती हुईं नजर आईं. ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन व्रत होने के कारण वट वृक्ष को पंखा चढ़ाने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है.

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rituals near a Banyan tree during Vat Savitri Puja

rituals near a Banyan tree during Vat Savitri Puja

ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानि की आज (15 मई) देशभर की सुहागिनें वट सावित्री का व्रत कर रही है. पति की लंबी आयु और अखण्ड सौभाग्य को प्राप्त करने के लिए सुहागिनें इस व्रत को रखती है. हिंदू धर्म में इस व्रत का खास महत्व माना जाता है. देश के कुछ क्षेत्रों में महिलाएं ये व्रत संतान प्राप्ति के लिए भी रखा जाता है. (फोटो साभार : PTI)

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Women perform rituals near a Banyan tree during Vat Savitri Puja

Women perform rituals near a Banyan tree during Vat Savitri Puja

पौराणिक मान्यता के अनुसार, सबसे पहली बार इस व्रत को सावित्री ने इस व्रत को रखा था. भद्र देश के राजा अश्वपति की कोई संतान नहीं थी. उन्होंने संतान की प्राप्ति के लिए यज्ञ करते हुए प्रतिदिन एक लाख आहुतियां दीं. यह आहूतियां एक दो नहीं बल्कि 18 वर्षों तक दी गई, जिसके बाद सावित्रीदेवी प्रकट हुईं और उन्होंने राजा को आशीर्वाद दिया कि उनके घर एक तेजस्वी कन्या का जन्म होगा. नौ मास के बाद जब कन्या का जन्म हुआ तो राजा ने उसका नाम सावित्री रखा. (फोटो साभार : PTI)

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Women perform rituals near a Banyan tree during Vat Savitri Puja

Women perform rituals near a Banyan tree during Vat Savitri Puja

कथाओं के अनुसार जब यमराज सत्यवान की मृत्यु के बाद जब यमराज उनके प्राण ले जाने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे पीछे चलने लगी. यम ने उन्हें तीन वरदान मांगने के लिए कहा. सावित्री ने सबसे पहले अपने नेत्रहीन सास-ससुर के आंखों की ज्योति और दीर्घायु की कामना की. यम ने उन्हें कामना पूरी की. इसके बाद भी वे यम के पीछे चलती रहीं. दूसरे वरदान में उन्हें अपने ससुर का छीना हुआ राज्यपाठ वापस मिल गया, फिर भी सावित्री अपने यम के पीछे चलती रहीं. (फोटो साभार : PTI)

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Vat Savitri Puja 2018

Vat Savitri Puja 2018

इस बार यम से उन्होंने 100 पुत्रों का वरदान मंगा, यम ने इस वरदान पर भी सती को तथास्तु कह दिया. जब यम ने उन्हें ये वरदान दिया तो सावित्री ने कहा कि वे पतिव्रता स्त्री है और बिना पति के मां नहीं बन सकती, जिसके बाद यम ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए.

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tie threads banyan tree

tie threads banyan tree

सावित्री के व्रत रखने के बाद से ही इसे वट सावित्री ने नाम से पूजा जाने लगा. पौराणिक मान्यता के मताबिक वट के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास है. इसके नीचे सच्चे मन से पूजा करने शादी-शुदा महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. पटना के कई इलाकों में आज महिलाओं को वट पेड़ के नीचे पूजा करती हुईं नजर आईं. ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन व्रत होने के कारण वट वृक्ष को पंखा चढ़ाने की परंपरा भी इस दिन निभाई जाती है.(फोटो साभार : India.com)

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